राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव का एलान: 17 अगस्त को शेड्यूल, सितंबर से मतदान प्रक्रिया; नवंबर तक पूरा चुनाव
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों का कार्यक्रम तय हो गया है। हाईकोर्ट में सरकार ने बताया कि 22 अगस्त को अधिसूचना जारी होगी। 19 सितंबर से चुनाव शुरू होंगे और 15 नवंबर तक प्रक्रिया पूरी होगी।
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राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर आखिरकार तस्वीर साफ हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने चुनाव कार्यक्रम पेश करते हुए बताया कि 17 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा, जबकि 22 अगस्त को अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से चुनाव कराए जाएंगे और 15 नवंबर 2026 तक पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। हाईकोर्ट में पेश कार्यक्रम के अनुसार 19 सितंबर को नगर निकायों के अध्यक्ष (चेयरमैन) और 20 सितंबर को उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) का चुनाव होगा, जबकि 23 सितंबर से पंचायत चुनावों की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि याचिकाकर्ता की तरफ से इस चुनाव कार्यक्रम का विरोध किया गया लेकिन हाईकोर्ट ने इसे मंजूरी दे दी है।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने दिखाई थी सख्ती
पिछले सप्ताह सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंचायत व निकाय चुनावों में देरी को लेकर राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयुक्त व ओबीसी आयोग को तलब करते हुए जमकर फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने सरकार को को निर्देश दिए थे लेकिन 20 अगस्त को होने वाली सुनवाई तक चुनाव की तारीखों शेड्यूल लेकर आएं। राज्य सरकार आज कोर्ट ने चुनाव के शेड्यूल के साथ पहुंची।
इसमें 17 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। वहीं 22 अगस्त को पंचायत व निकाय चुनावों के लिए अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद 19 सितंबर को निकाय में चेयरमैन व सितंबर को 20 वाइस चेयरमैन के चुनाव होंगे। इसके बाद 23 सितंबर से पंचायत चुनाव शुरू होंगे जो 15 नवंबर तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। यह लगभग वही टाइम लाइन है जो राज्य निर्वाचन आयोग बता रहा था। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पेश होने के बाद 90 में चुनाव पूरे करवाने की बात कही थी। पूर्व में सरकार ने 31 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को देने की बात कही थी। इसके बाद 90 दिन की समय सीमा लगभग 90 नवंबर में ही पूरी हो रही थी।
जबकि हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस 90 दिन की टाइम लाइन को लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह व राज्य सरकार को जमकर लताड़ा था। इसके जवाब में राजेश्वर सिंह ने अदालत को बताया था कि यह पत्र राज्य सरकार के आग्रह पर भेजा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग समय पर चुनाव कराने के लिए कई बार सरकार को पत्र लिख चुका है।
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सीईसी ने कहा था- आरक्षण तय करना सरकार का अधिकार
पिछली सुनवाई के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और महिला आरक्षण तय करना राज्य निर्वाचन आयोग का नहीं, बल्कि राज्य सरकार का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जैसे ही पदवार और वर्गवार आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करेगी,राज्य निर्वाचन आयोग दो दिन के भीतर चुनाव कार्यक्रम जारी कर देगा। राजेश्वर सिंह ने यह भी कहा कि यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना ओबीसी आरक्षण को लेकर कोई निर्णय लेना है, तो उसका अधिकार भी राज्य सरकार के पास है।