'सरकार खुद बढ़ा रही उनका राजनीतिक कद': नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर राजेंद्र गुढ़ा का हमला...क्या-क्या कहा?
राजेंद्र गुढ़ा ने नरेश मीणा की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से नरेश का राजनीतिक कद बढ़ रहा है। गुढ़ा के मुताबिक, युवाओं में उनका प्रभाव बढ़ रहा है और तीसरे मोर्चे की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
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नरेश मीणा की गिरफ्तारी को लेकर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। गुढ़ा ने कहा कि सरकार को नरेश मीणा से डरने के बजाय उनकी ऊर्जा और ताकत को समझना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नरेश मीणा के खिलाफ कार्रवाई करके सरकार खुद उनका राजनीतिक कद बढ़ा रही है।
राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि नरेश मीणा जिस तरह युवाओं के मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, उसका असर खासतौर पर युवाओं के बीच दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज का नौजवान पुरानी राजनीतिक शैली और नेताओं की चापलूसी वाली राजनीति को स्वीकार नहीं कर रहा है। युवाओं को ऐसा नेतृत्व पसंद आ रहा है, जो उनके मुद्दों को लेकर संघर्ष करता दिखाई दे।
गुढ़ा ने नरेश मीणा के चुनावी प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नरेश मीणा ने अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई है। उनके चुनावी प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि उनकी राजनीति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गुढ़ा के मुताबिक, कोटा संभाग समेत प्रदेश के कई हिस्सों में युवाओं के बीच नरेश मीणा का प्रभाव बढ़ रहा है।
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राजेंद्र गुढ़ा ने नरेश मीणा को राजस्थान में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं से भी जोड़ते हुए कहा कि उन्हें इसमें उम्मीद नजर आती है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में नरेश मीणा की सक्रियता राजनीतिक समीकरणों में बदलाव ला सकती है और इसका असर चुनावी नतीजों में देखने को मिल सकता है।
गुढ़ा ने राजस्थान में उभर रही वैकल्पिक राजनीति का उदाहरण देते हुए डूंगरपुर और बांसवाड़ा का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत आदिवासी पार्टी के नेता राजकुमार रोत की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में बड़े राजनीतिक दलों को चुनौती मिली है। उनके मुताबिक, कई इलाकों में कांग्रेस और भाजपा को भी कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
गुढ़ा का कहना है कि राजस्थान में युवाओं और नए राजनीतिक नेतृत्व की बढ़ती स्वीकार्यता आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि नरेश मीणा की सक्रियता केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकती और इसका असर प्रदेश के व्यापक राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।