Rajasthan: 'छात्रसंघ चुनाव हर साल हों, युवाओं को लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रखें'; बोले- राजेंद्र गुढ़ा
पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने राजस्थान की राजनीति, छात्रसंघ चुनाव और बेरोजगारी के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने छात्रसंघ चुनाव हर साल कराने की मांग करते हुए कहा कि छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी को प्रदेश की बड़ी समस्या बताया। पढ़ें पूरी खबर
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राजस्थान के पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा अक्सर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में रहते हैं। अब उन्होंने विश्वविद्यालयों की स्थिति, छात्रसंघ चुनाव और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर अपनी बात रखी। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले गुढ़ा ने कहा कि शेखावाटी की राजनीति में उन्होंने शुरुआत से ही गरीब, वंचित, अनुसूचित जाति और आदिवासी वर्ग के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि जहां भी किसी के साथ अन्याय होता है, वहां उसके साथ खड़ा होना उनकी राजनीतिक फितरत रही है।
छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए
राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलनों पर गुढ़ा ने कहा कि छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब गांव में पंच और सरपंच, वार्ड में पार्षद और नगर निकायों में चेयरमैन के चुनाव हो सकते हैं, तो छात्रों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने छात्रसंघ चुनाव हर साल कराने की पुरजोर मांग की।
गुढ़ा ने कहा कि छात्र राजनीति से निकलकर कई लोग प्रदेश और देश में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनके मुताबिक, छात्रसंघ चुनाव केवल पद हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र को समझने और नेतृत्व विकसित करने का अवसर भी हैं।
गुढ़ा ने बेरोजगारी को बताया प्रमुख समस्या
बातचीत के दौरान गुढ़ा ने बेरोजगारी को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सबसे बड़ी समस्याओं में बेरोजगारी प्रमुख है और बड़ी संख्या में युवा रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने शेखावाटी क्षेत्र के एक युवक का उदाहरण देते हुए रोजगार के संकट की गंभीरता बताई और कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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पंचायती राज और निकाय चुनावों में देरी पर ये कहा
पंचायती राज और निकाय चुनावों में देरी पर भी गुढ़ा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावों की तारीखें आगे बढ़ने से लोगों में असमंजस पैदा होता है। छात्रसंघ चुनाव को लेकर उन्होंने सरकार से डरने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की अपील की। गुढ़ा ने कहा कि छात्र चुनावों में हार-जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था है। उनके अनुसार, युवाओं को चुनाव लड़ने और अपनी आवाज उठाने का अवसर मिलना चाहिए।