Rajasthan: आरक्षण लॉटरी से निकला नया सियासी मुद्दा, ‘आबादी बनाम भागीदारी’ पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में कांग्रेस के आबादी बनाम भागीदारी का मुद्दा उछाल दिया है- इस मुद्दे के उठने के साथ ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट विवादों में आ गई है। जानिए इस पर कांग्रेस और बीजेपी का क्या कहना है...
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ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण की लॉटरी का पहला चरण ही विवादों में आ गया है। पंचायत-निकाय चुनाव के सियासी मुद्दे क्या होंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन एक मुद्दा जो फिलहाल चर्चाओं में आ चुका है वह है- आबादी बनाम भागीदारी का। क्या यह मुद्दा राजस्थान के सियासी पारे को परवान दे पाएगा? कांग्रेस ने आरक्षण लॉटरी के बाद सरकार पर ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के साथ अन्याय और आंकड़ों में विसंगति का आरोप लगा दिया है।
ओबीसी आयोग की सर्वे रिपोर्ट में दिए आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान के डीग में ओबीसी आबादी प्रतिशत में सबसे ज्यादा बताई गई है। इसमें डीग में 72.73 प्रतिशत और ब्यावर में 70.89 प्रतिशत ओबीसी आबादी है, लेकिन दोनों जिलों में अनुशंसित ओबीसी आरक्षण क्रमशः 20.69 और 18.52 प्रतिशत है। अजमेर में ओबीसी आबादी 64.05 प्रतिशत के मुकाबले अनुशंसित आरक्षण 24.24 प्रतिशत है। जयपुर में 53.55 प्रतिशत आबादी के मुकाबले 17.54 प्रतिशत और सीकर में 60.46 प्रतिशत के मुकाबले 20.41 प्रतिशत आरक्षण अनुशंसित है।
वहीं जालोर में ओबीसी आबादी 41.36 प्रतिशत है, लेकिन अनुशंसित आरक्षण 20.93 प्रतिशत है। दूसरी ओर बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में ओबीसी आबादी क्रमशः 8.42, 12.13, 14.43 और 15.82 प्रतिशत दर्ज है, जबकि इन जिलों में अनुशंसित ओबीसी आरक्षण शून्य है।
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कांग्रेस ने 192 सीटों के आंकड़े पर उठाया सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के सभापतियों की लॉटरी में OBC, SC और ST वर्ग के साथ अन्याय किया है, बेईमानी की है। उन्होंने कहा कि 41 जिला परिषदों के 1,403 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए केवल 192 वार्ड यानी 13.68 प्रतिशत आरक्षित करने की अनुशंसा की गई है।
डोटासरा ने कहा कि जिला परिषदों में 50 प्रतिशत की कुल सीमा के भीतर ओबीसी को 21 प्रतिशत आरक्षण मिलता तो 294 वार्ड आरक्षित हो सकते थे, लेकिन जिला परिषदों में ओबीसी को कुल 192 सीटों पर रिजर्वेशन मिला है। डोटासरा ने कहा कि इस हिसाब से 102 वार्ड कम आरक्षित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि 457 पंचायत समितियों के 8,245 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए 1,101 वार्ड यानी करीब 13.35 प्रतिशत आरक्षण की बात कही है। पार्टी के मुताबिक 21 प्रतिशत आरक्षण होने पर 1,731 वार्ड आरक्षित हो सकते थे, यानी 630 वार्ड का अंतर है।
कांग्रेस का दावा क्या है?
कांग्रेस ने दावा किया है कि कई जिलों में एससी-एसटी और ओबीसी का संयुक्त आरक्षण भी 40 प्रतिशत से नीचे है। पार्टी ने अजमेर, बालोतरा, बाड़मेर, ब्यावर, चूरू, डीग, डीडवाना-कुचामन, जैसलमेर, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, फलोदी और सीकर के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से आरक्षण निर्धारण का आधार सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि जब कई जिलों में ओबीसी आबादी 45 से 50 प्रतिशत या उससे अधिक बताई जा रही है, तो वहां ओबीसी आरक्षण 10-20 प्रतिशत के आसपास क्यों है? कांग्रेस का आरोप है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ये आंकड़े किस सर्वे, पद्धति और मानक के आधार पर तैयार किए गए हैं।
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बीजेपी ने क्या जवाब दिया?
पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि डोटासरा बिना पढ़े बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग ने जिलों के क्वाटिफायबल आंकड़े लेकर रिपोर्ट तैयार की है और उसी के आधार पर आरक्षण दिया गया है। इसमें किसी के साथ ही भेदभाव का प्रश्न नहीं उठता। डोटासरा सिर्फ भ्रम फैलाने की राजनीति करते हैं ताकि लोगों की सहानुभूति उन्हें मिलती रहे।