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RJ LS Polls: राजस्थान की इन सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्रियों की साख दांव पर, कल जनता करेगी फैसला
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Thu, 25 Apr 2024 10:01 PM IST
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सार
राजस्थान लोकसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण का मतदान कल यानी 26 अप्रैल को होगा। प्रदेश की 13 सीटों पर जनता किसे चुनेगी, इसका इंतजार सभी प्रत्याशियों को है। लेकिन राजस्थान की कुछ सीटें ऐसी हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों का राजनीतिक करियर तय करेंगी।
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान में लोकसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल शुक्रवार को होगा। जनता प्रदेश के 13 सीटों जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालौर, राजसमंद, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा, टोंक-सवाई माधोपुर, कोटा और झालावाड़-बारां लोकसभा सीटों पर मतदान करेगी। चुनाव को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है।
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ऐसे में इन 13 में से दो सीटें ऐसी हैं, जहां दो पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के बेटे मैदान में उतरे हैं। इनकी प्रतिष्ठा तो दांव पर है ही, साथ ही उनके बेटों का राजनीतिक करियर भी दांव पर है।
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वसुंधरा और गहलोत की प्रतिष्ठा दांव पर
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा दांव पर है। झालावाड़-बारां लोकसभा सीट से वसुंधरा राजे के बेटे और मौजूदा सांसद दुष्यंत सिंह बीजेपी से उम्मीदवार हैं। जहां उनका सामना कांग्रेस उम्मीदवार उर्मिला जैन भाया से है। वहीं, दूसरी तरफ राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत जो जालौर-सिरोही लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से मैदान में खड़े हैं। जहां उनका मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार लुंबाराम चौधरी से है।
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में किसने किसको दी थी मात
जालौर-सिरोही लोकसभा सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार देवजी पटेल ने कांग्रेस के रतन देवासी को 2 लाख 61 हजार 110 वोटों के अंतर से हराया था। पटेल को 7 लाख 72 हजार 833 वोट मिले थे। जबकि देवासी को केवल 5 लाख 11 हजार 723 वोट प्राप्त हुए थे।
वहीं, झालावाड़-बारां लोकसभा सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार दुष्यंत सिंह ने कांग्रेस के प्रमोद शर्मा को 4 लाख 53 हजार 928 वोटों के अंतर से हराया था। दुष्यंत सिंह को 8 लाख 87 हजार 400 वोट मिले थे। जबकि प्रमोद शर्मा को 4 लाख 33 हजार 472 वोट प्राप्त हुए थे।
जालौर-सिरोही लोकसभा सीट पर मुकाबला
जालौर-सिरोही लोकसभा सीट पर कांग्रेस की ओर से वैभव गहलोत मैदान में हैं। वैभव राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे हैं। यहां से कुल 12 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच में ही है। वर्तमान में यह सीट बीजेपी के पास है। बीजेपी जालौर लोकसभा सीट पर पिछले 20 साल से राज कर रही है। देवजी मानसिंगराम पटेल लगातार तीन बार से यहां से सांसद हैं। बीजेपी ने इस बार उनका टिकट काटकर लुंबाराम चौधरी को प्रत्याशी बनाया है।
आठ विधानसभा सीटें आती हैं
राजस्थान के जालौर लोकसभा सीट के अंतर्गत आठ विधानसभा सीट आती हैं। इनमें जालौर, आहोर, भीनमाल, सांचौर, रानीवाड़ा, सिरोही, पिंडवाड़ा-आबू और रेओदर विधानसभा सीट शामिल हैं। इनमें चार पर बीजेपी, तीन पर कांग्रेस और एक सीट पर निर्दलीय विधायक है।
जालौर लोकसभा सीट पर 2004 से अब तक लगातार बीजेपी का कब्जा है। किसी समय में यह सीट कांग्रेस पार्टी का गढ़ मानी जाती थी। केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह यहां से चार बार सांसद रह चुके हैं। साल 2004 में बीजेपी के टिकट पर सुशील बंगारू (बंगारू लक्ष्मण की पत्नी) ने बूटा सिंह को हराकर यहां चुनाव जीता था। बूटा सिंह पहली बार जालौर सीट से 1984 में सांसद चुने गए थे। लेकिन 1989 में यह सीट बीजेपी के कैलाश मेघवाल के पास आ गई।
बूटा सिंह 1998 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप लड़े थे और जीत हासिल की। लेकिन अगले ही साल 1999 में वे फिर से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की। साल 2019 के चुनाव में देवजी पटेल को 7.72 लाख वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के रतन देवासी को 5.11 लाख लोगों ने वोट दिया था।
झालावाड़-बारां लोकसभा सीट
यह तीसरी बार है, जब जैन परिवार और राजे परिवार आमने-सामने होंगे। इससे पहले साल 2009 में उर्मिला और 2014 में उनके पति प्रमोद जैन चुनावी मैदान में थे। दोनों बार बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। जहां तक वर्तमान स्थिति की बात करें दोनों उम्मीदवार दमखम के साथ चुनावी अभियान में जुटे रहे। प्रचार के मामले में भाजपा काफी आगे दिखी। भाजपा के झंडे, होर्डिंग्स झालावाड़ व बारां के दूर-दराज इलाकों में दिखे। अधिकांश जगह राम मंदिर की छवि वाले भगवा झंडे भी लगे हुए हैं। वहीं, कांग्रेस के होर्डिंग्स शहरों तक सीमित है। कुछ गांवों में झंडे जरूर दिख रहे हैं।
बीजेपी का पलड़ा भारी
स्थानीय लोगों का मानना है यही दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है। झालावाड़ और बारां जिले में चार-चार विधानसभाएं हैं। बारां में चारों विधानसभा सीटें बीजेपी के पास हैं, जबकि झालावाड़ में खानपुर को छोड़कर बाकी तीनों विधानसभाएं बीजेपी के पास हैं।
आपको बता दें कि झालावाड़-बारां सीट के 80 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता ग्रामीण इलाके से हैं। क्षेत्र में लगभग 21 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें SC-ST मतदाताओं की संख्या करीब आठ लाख हैं। मुस्लिम आबादी भी करीब दो लाख के आसपास है। ब्राहम्ण, राजपूत और ओबीसी मतदाताओं की संख्या भी निर्णायक भूमिका में है।
कल 152 उम्मीदवार होंगे मैदान में
राजस्थान के इन 13 लोकसभा सीटों पर 152 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके भविष्य का फैसला 26 अप्रैल यानी शुक्रवार को जनता द्वारा किया जाएगा। 152 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला कल ईवीएम में बंद होगा। 13 सीटों की यदि बात करें तो सबसे ज्यादा उम्मीदवार चित्तौड़गढ़ सीट पर हैं, जिस कारण इस सीट पर बने हर पोलिंग बूथ पर दो-दो ईवीएम मशीनें लगाई जाएंगी। दूसरी तरफ, झालावाड़-बारां लोकसभा सीट पर सबसे कम उम्मीदवार हैं।
8.66 लाख वोटर पहली बार डालेंगे वोट
राजस्थान की 13 लोकसभा सीटों पर 26 अप्रैल शुक्रवार को आठ लाख 66 हजार वोटर पहली बार वोट डालेंगे। इनमें 5 लाख 7 हजार युवक हैं। वहीं, तीन लाख 58 हजार युवतियां हैं। टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर ज्यादा से ज्यादा वोटिंग हो, इसलिए कल व्यापारियों ने लोगों को डिस्काउंट देने का निर्णय लिया है। शेविंग-कटिंग, मेडिकल, किराना, कपड़े आदि में उन लोगों को डिस्काउंट दिया जाएगा, जो वोट डालकर स्याही का निशान दिखाएंगे।