Rajasthan News: हजारों करोड़ का बजट, सबसे ज्यादा घोषणाएं लेकिन फिर भी कछुआ चाल से चल रहा काम, कैसे होगा विकास?
राज्य सरकार के पहले डेढ़ महीनों में योजनागत बजट को लेकर महकमों की रफ्तार से लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजना विभाग की एक रिव्यू मीटिंग हुई। बजट में सबसे ज्यादा घोषणा PWD को लेकर हुई थी लेकिन इसी की रफ्तार सबसे सुस्त रही।
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राजस्थान में सड़क और आधारभूत ढांचा विकास से जुड़ी परियोजनाओं की रफ्तार को लेकर आयोजना विभाग की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में सार्वजनिक निर्माण विभाग की धीमी रफ्तार सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026-27 में विभाग को 2566.84 करोड़ रुपए का योजनागत बजट आवंटित किया गया है लेकिन शुरुआती डेढ़ महीने में कई प्रमुख योजनाओं में खर्च बेहद कम रहा और कुछ परियोजनाओं में तो काम शुरू तक नहीं हो सका।
आयोजना विभाग की इसी समीक्षा रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मौजूदा बजट में सबसे ज्यादा PWD में 476 बजट घोषणाएं की गईं लेकिन शुरुआती डेढ़ महीने में इनमें से सिर्फ एक घोषणा पूरी हुई है, जबकि 418 परियोजनाएं अभी भी प्रारंभिक स्तर पर हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि विभाग का बड़ा खर्च पुरानी शेष राशि के आधार पर दिख रहा है। ऐसे में सड़क निर्माण, बॉर्डर रोड और ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
आयोजना की विभागवार केंद्र प्रवर्तित योजनाओं यानी सीएसएस समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार पीडब्ल्यूडी के तहत केंद्रीय सड़क निधि, बॉर्डर रोड और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी प्रमुख योजनाएं संचालित हो रही हैं। इन तीनों योजनाओं का कुल बजट 2566.84 करोड़ रुपए है।
रिपोर्ट के मुताबिक:
- सेंट्रल रोड फंड यानी केंद्रीय सड़क निधि के लिए 1200 करोड़ रुपए,
- बॉर्डर के लिए 621.64 करोड़ रुपए,
- जबकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 745.20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
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इसके अलावा विभाग के पास 1 अप्रैल 2026 तक 194.26 करोड़ रुपये की अवशेष राशि भी उपलब्ध थी। हालांकि 12 मई तक केंद्र सरकार से कोई नई राशि जारी नहीं हुई। विभाग को सिर्फ 42 करोड़ रुपये की तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके बावजूद विभाग ने 388.12 करोड़ रुपये का खर्च दर्शाया है।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे खराब हालत केंद्रीय सड़क निधि से जुड़ी योजनाओं की रही। सीआरएफ के तहत विभाग के पास 194.26 करोड़ रुपये उपलब्ध थे, लेकिन खर्च 386.60 करोड़ रुपये दिखाया गया है, जो उपलब्ध राशि का लगभग 199 प्रतिशत है। वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति तब बनती है जब विभाग पुराने बकाया भुगतान या पहले से स्वीकृत कामों के भुगतान को खर्च में जोड़ता है। हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि खर्च इतनी अधिक राशि कैसे दिखाया गया। वहीं बॉर्डर परियोजनाओं की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक दिखाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार
- बॉर्डर रोड के लिए 621.64 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया लेकिन 12 मई तक खर्च शून्य रहा।
- राजस्थान की पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए सीमावर्ती सड़क परियोजनाएं सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे में शुरुआती डेढ़ महीने में खर्च नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
ऐसे ही ग्रामीण संपर्क बढ़ाने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाई है। रिपोर्ट के अनुसार:
- PMGSY के लिए 745.20 करोड़ रुपये का बजट रखा गया
- 42 करोड़ रुपये की वित्तीय व तकनीकी स्वीकृति मिली
- लेकिन खर्च सिर्फ 2.52 करोड़ रुपये हुआ
- यह कुल बजट का मात्र 0.34 प्रतिशत है। उपलब्ध राशि के मुकाबले भी खर्च केवल 6 प्रतिशत दर्ज हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि PMGSY की धीमी प्रगति का असर गांवों की सड़क कनेक्टिविटी, कृषि परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर मानसून से पहले सड़क परियोजनाओं की धीमी गति भविष्य में निर्माण कार्यों को और प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति घोषणा बनाम क्रियान्वयन के अंतर को उजागर करती है। सरकार ने हाल के बजटों में सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी, लेकिन जमीन पर परियोजनाओं की गति बेहद सीमित दिखाई दे रही है।