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Rajasthan: टीएसपी भर्ती के 75 शिक्षकों की किस्मत का फैसला 20 जुलाई को, हाईकोर्ट में होगी अहम सुनवाई

Wed, 15 Jul 2026 07:54 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Wed, 15 Jul 2026 07:54 PM IST
सार

टीएसपी लेवल-1 शिक्षक भर्ती-2022 से जुड़े 75 शिक्षकों की सेवा समाप्ति मामले में 20 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। शिक्षक आरएसएसबी की त्रुटि का दंड न देने, सेवा बहाली, सभी लाभ और 75 शैडो पोस्ट सृजित करने की मांग कर रहे हैं।

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TSP Teacher Recruitment Row: Eyes on July 20 High Court Hearing, Teachers Demand Reinstatement
शिक्षक विकास पाटीदार

विस्तार

अनुसूचित क्षेत्र (टीएसपी) तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2022 (लेवल-1) से जुड़े 75 शिक्षकों का मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। इस बहुचर्चित विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट में 20 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर प्रभावित शिक्षकों और उनके परिवारों की निगाहें टिकी हैं। शिक्षक संगठन और प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) की प्रशासनिक त्रुटि का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए।

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प्रभावित शिक्षकों के अनुसार, टीएसपी क्षेत्र में उनका चयन नियमानुसार हुआ था और वे करीब 30 महीने तक विभिन्न विद्यालयों में सेवाएं देते रहे। इनमें से कई शिक्षकों का स्थायीकरण भी हो चुका था। हालांकि, 29 अगस्त 2025 को राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने दिव्यांगजन आरक्षण के श्रेणी-अंतर परिवर्तन का हवाला देते हुए भर्ती का परिणाम वापस ले लिया। इसके बाद शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने 28 नवंबर 2025 को जिला आवंटन निरस्त करते हुए संबंधित शिक्षकों को सेवा से कार्यमुक्त कर दिया।
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इसके खिलाफ प्रभावित शिक्षकों ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शिक्षकों का कहना है कि न्यायालय ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित आदेशों पर रोक लगाई थी। वर्तमान में कुछ शिक्षक न्यायालय के स्थगन आदेश के आधार पर विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि कई अन्य अब भी सेवा से बाहर हैं। इससे समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों के बीच अलग-अलग स्थिति बन गई है।
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प्रभावित शिक्षकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि न्यायालय के आदेशों की पूर्ण पालना करते हुए सेवा से हटाए गए शिक्षकों को तत्काल पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाए और उन्हें सभी सेवा संबंधी लाभ दिए जाएं। साथ ही उन्होंने लेवल-2 भर्ती में बनाए गए 1301 शैडो पोस्ट की तर्ज पर लेवल-1 के लिए भी 75 शैडो पोस्ट सृजित करने की मांग की है, ताकि किसी भी शिक्षक की नौकरी प्रभावित न हो।

शिक्षक विकास पाटीदार ने कहा कि चयन बोर्ड की प्रशासनिक गलती की सजा शिक्षकों को नहीं मिलनी चाहिए। वहीं, शिक्षिका कल्पना पाटीदार ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में बेटियों का उच्च शिक्षा तक पहुंचना आज भी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में नौकरी मिलने के बाद उसका छिन जाना केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी असर डालता है। उन्होंने कहा कि जबकि उनकी कोई गलती नहीं है, फिर भी समाज में उन्हें अनावश्यक सवालों का सामना करना पड़ रहा है। अब इस मामले में 20 जुलाई को होने वाली राजस्थान हाईकोर्ट की सुनवाई पर सभी प्रभावित शिक्षकों और उनके परिवारों की उम्मीदें टिकी हुई हैं।

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