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Jaipur: जगन गुर्जर की मौत के बाद सियासी पटकथा? क्या परिवार के जरिए राजनीति साधेंगे दल, चर्चाओं का बाजार गर्म

Sat, 11 Jul 2026 02:15 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Sat, 11 Jul 2026 02:15 PM IST
सार

जगन गुर्जर की मौत के साथ उसके आपराधिक जीवन का अंत हो गया, लेकिन अब उसके परिवार को लेकर राजनीतिक अटकलें शुरू हो गई हैं। चर्चा है कि भविष्य में परिवार की राजनीति में भूमिका बन सकती है, हालांकि अभी तक किसी दल ने इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की है।
 

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Rajasthan News: New Political Buzz After Jagan Gujjar's Death, Will Parties Reach Out Through His Family?
जगन गुर्जर के परिवार की राजनीति में एंट्री? - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धौलपुर के बीहड़ों से शुरू हुई कुख्यात अपराधी जगन गुर्जर की कहानी अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में उसकी हत्या के साथ समाप्त हो गई। वर्षों तक अपराध जगत में चर्चित रहे जगन गुर्जर की मौत के बाद अब एक नई चर्चा शुरू हो गई है- क्या उसके परिवार की राजनीति में सक्रिय भूमिका हो सकती है?

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जेल में सहबंदी विष्णु पर हत्या का आरोप लगने के बाद जगन गुर्जर के परिजन न्याय की मांग को लेकर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के बाहर धरने पर बैठे, हालांकि यह धरना कुछ घंटों बाद समाप्त हो गया। अंतिम संस्कार के दौरान जगन की पत्नी ममता गुर्जर ने न्याय की लड़ाई जारी रखने की बात कही लेकिन इसके बाद किसी बड़े आंदोलन की घोषणा नहीं हुई।
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इसी बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या जगन गुर्जर के परिवार की राजनीतिक भूमिका अब शुरू हो सकती है। जगन गुर्जर अपने जीवनकाल में भी अपनी पत्नी ममता गुर्जर को राजनीति में स्थापित करना चाहता था। ममता ने एक विधानसभा चुनाव भी लड़ा था लेकिन उन्हें केवल 1,500 के करीब वोट ही मिले थे। अब जगन गुर्जर की मौत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या उसका परिवार सक्रिय राजनीति की ओर कदम बढ़ाएगा। हालांकि अभी तक ममता गुर्जर, उसके परिवार या किसी भी राजनीतिक दल की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा या संकेत नहीं दिया गया है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में किसी दल द्वारा ममता गुर्जर या परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में अवसर दिया जाता है तो इसे अलग-अलग नजरिए से देखा जाएगा। एक पक्ष इसे अपराध प्रभावित परिवार को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल मान सकता है, जबकि दूसरा इसे धौलपुर के बीहड़ क्षेत्र और गुर्जर समाज के बीच राजनीतिक संदेश के रूप में देख सकता है।

बता दें कि धौलपुर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दुर्गा सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा था कि यदि समाज और व्यवस्था मिलकर प्रयास करें तो अपराध प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव संभव है। उनके अनुसार व्यवस्था के भीतर रहकर परिवर्तन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि जगन गुर्जर की मौत के बाद शुरू हुई यह राजनीतिक चर्चा किसी वास्तविक दिशा में आगे बढ़ेगी या नहीं। आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा कि क्या परिवार सक्रिय राजनीति में कदम रखता है या यह चर्चा केवल अटकलों तक सीमित रहती है।

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