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Balotra News: सेवानिवृत शिक्षक की पीएल पर डाका, फर्जी दस्तावेज से 14 लाख हड़पने वाला एलडीसी गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Sun, 10 Aug 2025 07:09 PM IST
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सार
आरोपी ने पे-मैनेजर पोर्टल पर फर्जी पारिवारिक विवरण और वेतन वृद्धि दिखाकर राशि अपने खाते में स्थानांतरित करवाई। मामला हीरा की ढाणी निवासी प्रधानाचार्य की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ था।
आरोपी शिक्षा कर्मी गिरफ्तार।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गिड़ा पुलिस ने एक बड़े गबन मामले का पर्दाफाश करते हुए शिक्षा विभाग के निलंबित एलडीसी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर सेवानिवृत्त कर्मचारी के उपार्जित अवकाश के भुगतान में भारी गड़बड़ी कर सरकारी खजाने से लाखों रुपये हड़पने का आरोप हैं। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर 12 अगस्त तक पीसी रिमांड पर लिया है, ताकि गबन की गई राशि और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की गहन पूछताछ की जा सके।
मामला हीरा की ढाणी का है, जहां के निवासी एवं वर्तमान में प्रधानाचार्य राउमावि सवाऊ मूलराज ने 15 जनवरी को रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, एलडीसी संदीप मीणा ने रिटायर्ड कर्मचारी शेराराम के पे-मैनेजर पोर्टल पर पारिवारिक विवरण में हेरफेर की। उसने अपने बेटे-बेटी और अन्य रिश्तेदारों को शेराराम का नामिनी दिखा दिया। इतना ही नहीं, शेराराम के मूल वेतन को भी फर्जी तरीके से बढ़ाकर दर्शाया गया। जहां वास्तविक मूल वेतन ₹52,300 था, वहीं आरोपी ने इसे ₹97,300 अंकित कर दिया। इन झूठे आंकड़ों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने सरकारी राशि अपने खाते में स्थानांतरित करवा ली।
ये भी पढ़ें- 'भाजपा कार्यकर्ता संगठन के लिए काम करे, व्यक्तिगत नेता के लिए नहीं'; राठौड़ की क्या तैयारी? जानें
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शेराराम 31 जुलाई 2023 को अधिवार्षिक आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी सेवा समाप्ति के समय उपार्जित 300 दिन का अर्जित अवकाश (पीएल) भुगतान होना था, जिसकी स्वीकृति आहरण-वितरण अधिकारी से ली जानी चाहिए थी। मगर आरोपी ने आदेश और जानकारी के बिना यह भुगतान खुद के लाभ के लिए कर लिया। इस प्रकार उसने कुल ₹14,20,580 की राशि अपने बैंक खाते में जमा करवाई।
मामले की भनक लगते ही विभागीय जांच शुरू हुई। रिकॉर्ड खंगालने पर स्पष्ट हुआ कि आरोपी संदीप मीणा, जो उस समय राउमावि डेलूआं की ढाणी सोहड़ा में एलडीसी के पद पर कार्यरत था, ने धोखाधड़ी और दुराचरण किया है। आरोप साबित होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, बाड़मेर ने उसे निलंबित कर दिया। पुलिस ने उसके बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेज भी जब्त कर जांच में शामिल किए।
गिरफ्तार आरोपी संदीप मीणा पुत्र महेश मीणा मूलतः भोटवाड़ा, किरवाड़ा, जिला करौली का रहने वाला है। वर्तमान में वह एलडीसी (कनिष्ठ सहायक) के पद पर कार्यरत था, लेकिन निलंबन के बाद भी उसने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन का गबन किया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे षड्यंत्र में और कौन-कौन शामिल हो सकता है तथा गबन की गई राशि का इस्तेमाल कहां किया गया।
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मामला हीरा की ढाणी का है, जहां के निवासी एवं वर्तमान में प्रधानाचार्य राउमावि सवाऊ मूलराज ने 15 जनवरी को रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, एलडीसी संदीप मीणा ने रिटायर्ड कर्मचारी शेराराम के पे-मैनेजर पोर्टल पर पारिवारिक विवरण में हेरफेर की। उसने अपने बेटे-बेटी और अन्य रिश्तेदारों को शेराराम का नामिनी दिखा दिया। इतना ही नहीं, शेराराम के मूल वेतन को भी फर्जी तरीके से बढ़ाकर दर्शाया गया। जहां वास्तविक मूल वेतन ₹52,300 था, वहीं आरोपी ने इसे ₹97,300 अंकित कर दिया। इन झूठे आंकड़ों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने सरकारी राशि अपने खाते में स्थानांतरित करवा ली।
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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शेराराम 31 जुलाई 2023 को अधिवार्षिक आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी सेवा समाप्ति के समय उपार्जित 300 दिन का अर्जित अवकाश (पीएल) भुगतान होना था, जिसकी स्वीकृति आहरण-वितरण अधिकारी से ली जानी चाहिए थी। मगर आरोपी ने आदेश और जानकारी के बिना यह भुगतान खुद के लाभ के लिए कर लिया। इस प्रकार उसने कुल ₹14,20,580 की राशि अपने बैंक खाते में जमा करवाई।
मामले की भनक लगते ही विभागीय जांच शुरू हुई। रिकॉर्ड खंगालने पर स्पष्ट हुआ कि आरोपी संदीप मीणा, जो उस समय राउमावि डेलूआं की ढाणी सोहड़ा में एलडीसी के पद पर कार्यरत था, ने धोखाधड़ी और दुराचरण किया है। आरोप साबित होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, बाड़मेर ने उसे निलंबित कर दिया। पुलिस ने उसके बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेज भी जब्त कर जांच में शामिल किए।
गिरफ्तार आरोपी संदीप मीणा पुत्र महेश मीणा मूलतः भोटवाड़ा, किरवाड़ा, जिला करौली का रहने वाला है। वर्तमान में वह एलडीसी (कनिष्ठ सहायक) के पद पर कार्यरत था, लेकिन निलंबन के बाद भी उसने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन का गबन किया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे षड्यंत्र में और कौन-कौन शामिल हो सकता है तथा गबन की गई राशि का इस्तेमाल कहां किया गया।