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बासनपीर छतरी विवाद:थार की अपनायत का संदेश लेकर गए नेताओं को गांव में नहीं मिला प्रवेश, सख्त नाकेबंदी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 19 Jul 2025 02:56 PM IST
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सार

विधायक हरीश चौधरी ने शांतिपूर्ण धुन और सर्वधर्म प्रार्थना के आयोजन का उद्देश्य बताया, लेकिन प्रशासन ने धारा 163 लागू कर सभा की अनुमति नहीं दी। जिले की सीमाओं पर सख्त नाकेबंदी की गई और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

Basanpeer Chhatri dispute: Congress leaders were not allowed to enter Basanpeer
बायतु विधायक हरीश चौधरी और कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी बासनपीर के लिए निकले। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जैसलमेर जिले के बासनपीर गांव में छतरी निर्माण को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर सियासी हलचल दिनों-दिन तेज होती जा रही है। शनिवार को कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिनमें सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री और संगठन पदाधिकारी एकजुट होकर बासनपीर की ओर कूच कर गए। यह पूरा काफिला बाड़मेर सर्किट हाउस से "थार की अपनायत" के संदेश और झंडों के साथ रवाना हुआ। वर्तमान में बासनपीर गांव में भारतीय दंड संहिता की धारा 163 लागू है, जिसके तहत एक स्थान पर पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। इसी के चलते पुलिस प्रशासन ने किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं करने देने का सख्त निर्देश जारी किया है। इस आदेश की पालना करते हुए बाड़मेर और जैसलमेर की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया गया है।

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Basanpeer Chhatri dispute: Congress leaders were not allowed to enter Basanpeer
बासनपीर छतरी विवाद इतिहास । - फोटो : अमर उजाला
काफिले में शामिल कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट रूप से प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका मकसद केवल शांति और सौहार्द का संदेश देना है। बायतु विधायक हरीश चौधरी ने कहा, “हम बासनपीर में गांधी राम धुन और सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन करना चाहते हैं। यह थार की मेलजोल की संस्कृति का प्रतीक है, लेकिन अफसोस की बात है कि प्रशासन ने हमें इसकी अनुमति नहीं दी।”

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Basanpeer Chhatri dispute: Congress leaders were not allowed to enter Basanpeer
बासनपीर जाते हुए कारों का काफिला - फोटो : अमर उजाला
सीमा पर नाकेबंदी और वाहन जांच
जैसलमेर प्रशासन ने जिले की सीमाओं पर सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया है। बाड़मेर-जैसलमेर सीमा पर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। प्रमुख सड़कों पर बेरिकेड्स लगाकर हर गुजरने वाले वाहन की सघन जांच की जा रही है। कोई भी वाहन बिना जांच के जिले में प्रवेश नहीं कर पा रहा है। यह सुरक्षा बंदोबस्त संभावित कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

Basanpeer Chhatri dispute: Congress leaders were not allowed to enter Basanpeer
प्रवेश नहीं मिलने पर एक जगह इकट्ठा लोग। - फोटो : अमर उजाला
काफिले में शामिल दिग्गज नेता
इस कांग्रेस काफिले में बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, बायतु विधायक हरीश चौधरी, जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी, पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, सिवाना विधायक मदन प्रजापत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष गफूर अहमद, पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व समर्थक शामिल हुए। सभी नेताओं की गाड़ियों पर "थार की अपनायत" के पोस्टर और झंडे लगे थे, जो उनके इस अभियान की भावना को दर्शाते हैं।

 

Basanpeer Chhatri dispute: Congress leaders were not allowed to enter Basanpeer
बायतु विधायक हरीश चौधरी और कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी व अन्य लोग। - फोटो : अमर उजाला
हरीश चौधरी ने कहा “हम संविधान में विश्वास रखने वाले लोग हैं”
बायतु विधायक हरीश चौधरी ने बासनपीर प्रकरण पर बोलते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। हम न तो कोई कानून तोड़ने जा रहे हैं और न ही किसी प्रकार का टकराव चाहते हैं। हम संविधान में पूरी आस्था रखते हैं। प्रशासन की नाकाबंदी करना उसका अधिकार है और हम उसका सम्मान करते हैं, लेकिन जैसलमेर मुख्यालय पर जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस यात्रा का उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध या तनाव नहीं, बल्कि केवल और केवल शांति और सद्भावना का संदेश देना है। “हम थार की उस परंपरा को आगे ले जाने निकले हैं, जो मेलजोल, भाईचारा और अपनायत पर आधारित है,” उन्होंने कहा।

प्रशासन और राजनीति आमने-सामने
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और सियासी नेतृत्व को एक प्रकार की टकराव की स्थिति में ला खड़ा किया है। एक तरफ प्रशासन कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका काफिला केवल धार्मिक-सांस्कृतिक उद्देश्य से निकला है, न कि किसी राजनीतिक प्रदर्शन के लिए। बासनपीर प्रकरण में अब हर कदम पर सियासी समीकरण गहराते जा रहे हैं। प्रशासन की सख्ती और नेताओं की सक्रियता आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और जटिल बना सकती है। हालांकि अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की स्थिति क्या मोड़ लेगी।
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