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कच्छ में गोडावण संरक्षण को बड़ा झटका: जैसलमेर से लाए गए अंडे से निकला चूजा रहस्यमय ढंग से गायब, चिंता बढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 11:53 AM IST
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सार
कच्छ के नलिया में गोडावण का चूजा संदिग्ध हालात में गायब हो गया। यह चूजा जैसलमेर से लाए गए अंडे से 26 मार्च को निकला था। कड़ी सुरक्षा के बावजूद 18 अप्रैल के बाद से नहीं दिखा, शिकार होने की आशंका, संरक्षण प्रयासों पर सवाल उठे।
कड़ी सुरक्षा के बीच गायब हुआ गोडावण का चूजा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की पहचान और राजस्थान के गौरवशाली राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण को लेकर देशभर में चल रहे प्रयासों के बीच एक चिंताजनक खबर सामने आई है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण को लेकर विशेष चर्चा करते हुए इसके बचाव के प्रयासों की सराहना की थी, लेकिन इसी बीच गुजरात के कच्छ जिले से आई एक घटना ने पूरे अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जैसलमेर से कच्छ तक उम्मीदों का सफर
गोडावण की घटती संख्या को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक अनोखा प्रयोग किया। राजस्थान के जैसलमेर जिले के सम स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से एक ‘फर्टाइल’ अंडा चुना गया। 21 मार्च 2026 को इस अंडे को अत्याधुनिक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में सुरक्षित रखते हुए लगभग 770 किलोमीटर दूर गुजरात के कच्छ जिले के नलिया क्षेत्र तक पहुंचाया गया। यह यात्रा करीब 19 घंटे में बिना रुके पूरी की गई। कच्छ पहुंचने के बाद इस अंडे को एक जंगली मादा गोडावण के घोंसले में रखा गया। इस प्रक्रिया को ‘सेरोगेसी’ या ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक कहा जाता है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक वातावरण में प्रजनन को बढ़ावा देना है।
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26 मार्च 2026 को जब इस अंडे से चूजा बाहर निकला, तो इसे गोडावण संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया। यह न केवल वैज्ञानिकों के प्रयासों की सफलता थी, बल्कि यह उम्मीद भी जगी कि कच्छ जैसे क्षेत्र में गोडावण की आबादी फिर से बढ़ाई जा सकती है, जहां वर्तमान में केवल तीन मादा गोडावण ही शेष हैं और एक भी नर पक्षी मौजूद नहीं है।
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कड़ी सुरक्षा के बावजूद चूजा गायब
चूजे के जन्म के बाद सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। वन विभाग ने 50 से अधिक कर्मियों की विशेष टीम तैनात की थी, जो 24 घंटे निगरानी कर रही थी। घोंसले के आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया था और ऊंचे वॉच टावरों से दूरबीन के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। यहां तक कि आने-जाने वाले रास्तों को भी सीमित कर दिया गया था। इसके बावजूद, 18 अप्रैल के बाद से चूजा अपनी मां के साथ दिखाई नहीं दिया। इस अचानक गायब होने की घटना ने वन विभाग और वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।
क्या हुआ चूजे के साथ?
हालांकि अभी तक वन विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार चूजा अब जीवित नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि सुरक्षा घेरे में किसी कमजोर कड़ी का फायदा उठाकर कोई जंगली जानवर घुस आया और उसे अपना शिकार बना लिया।
विशेषज्ञों की चिंता
गोडावण संरक्षण से जुड़े वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट सुमित डूकिया के अनुसार, स्थानीय स्तर पर चूजे के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने बताया कि गोडावण के चूजों की मृत्यु दर सामान्यतः अधिक होती है, लेकिन इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इस तरह की घटना होना गंभीर चिंता का विषय है और इसकी गहन जांच जरूरी है।
गोडावण पर मंडरा रहा अस्तित्व का संकट
गौरतलब है कि गोडावण भारत की सबसे संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में से एक है। इसकी कुल संख्या अब 150 से भी कम रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईटेंशन बिजली लाइनों से टकराव, अवैध शिकार और प्राकृतिक खतरों के चलते यह प्रजाति तेजी से विलुप्ति की ओर बढ़ रही है।
अब क्या आगे?
इस घटना ने गोडावण संरक्षण के मौजूदा मॉडल और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिकों और वन विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे ऐसी घटनाओं को दोहराने से कैसे रोकें और इस दुर्लभ पक्षी को सुरक्षित भविष्य कैसे दें। गोडावण का यह गायब हुआ चूजा सिर्फ एक पक्षी नहीं था, बल्कि एक उम्मीद थी जो फिलहाल अधूरी नजर आ रही है।
