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Rajasthan News: थार के टीलों में छिपा 4500 साल पुराना इतिहास, हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Wed, 30 Jul 2025 02:07 PM IST
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सार

जैसलमेर जिले की रातडिया री डेरी में हड़प्पा सभ्यता से जुड़ा प्राचीन पुरास्थल खोजा गया है। बताया जा रहा है कि यह स्थल लगभग 4500 साल पुराना हो सकता है। यहां से हड़प्पा सभ्यता के महत्पूर्ण अवशेष मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि थार के कठोर और शुष्क वातावरण में भी नगरीय जीवन संभव था।
 

Rajasthan News: 4500 Year Old History Unearthed in Thar Dunes, Significant Harappan Remains Found in Jaisalmer
थार में मिले 4500 साल पुराने अवशेष
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विस्तार

राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में इतिहास का एक नया और अहम अध्याय सामने आया है। जैसलमेर जिले की रामगढ़ तहसील से लगभग 60 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित रातडिया री डेरी नामक स्थल पर हड़प्पा सभ्यता से जुड़ा एक प्राचीन पुरास्थल खोजा गया है। यह खोज भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यता हड़प्पा या सिंधु घाटी सभ्यता के विस्तार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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यह ऐतिहासिक खोज राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास एवं भारतीय संस्कृति विभाग के शोधार्थी दिलीप कुमार सैनी, इतिहासकार पार्थ जगानी, रामगढ़ निवासी चतरसिंह 'जाम', प्रो. जीवन सिंह खरकवाल (राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर), डॉ. तमेघ पंवार, डॉ. रविंद्र देवड़ा और प्रदीप कुमार गर्ग की टीम ने की है। जून 2025 में इस स्थल का निरीक्षण हिमाचल विश्वविद्यालय के डॉ. पंकज चांडक और अरावली महाविद्यालय, सुमेरपुर के प्राचार्य डॉ. कृष्णपाल सिंह ने भी किया।
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पुरातत्वविदों के अनुसार यह स्थल लगभग 4500 वर्ष पुराना हो सकता है। यहां से बड़ी मात्रा में लाल लेपयुक्त मृदभांड (घड़े, कटोरे, परफोरेटेड जार), चर्ट पत्थर से बने ब्लेड, मिट्टी और शंख की चूड़ियां, त्रिकोणीय व इडली आकार के टेराकोटा केक, पीसने-घिसने के पत्थर और भट्ठियों के अवशेष मिले हैं। स्थल के दक्षिणी भाग में एक भट्टी के भीतर मिली कॉलमनुमा संरचना मोहनजोदड़ो और गुजरात के कानमेर स्थलों से समानता रखती है। इसके अलावा वेज-आकार की ईंटें भी मिली हैं, जो हड़प्पाकालीन गोलाकार संरचनाओं के निर्माण में प्रयुक्त होती थीं।

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शोधकर्ता दिलीप सैनी के अनुसार यह थार क्षेत्र में हड़प्पा संस्कृति से जुड़ा पहला इतना समृद्ध और स्पष्ट पुरास्थल है। यह न केवल इस प्राचीन सभ्यता के भौगोलिक विस्तार को पुष्ट करता है, बल्कि यह भी प्रमाणित करता है कि थार के कठोर और शुष्क वातावरण में भी नगरीय जीवन संभव था।

इतिहासकार पार्थ जगानी के मुताबिक यह खोज उत्तरी राजस्थान और गुजरात के बीच फैले थार क्षेत्र में हड़प्पा सभ्यता का पहला स्पष्ट प्रमाण है, जो इसे पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट बनाता है। उनका मानना है कि यदि इस स्थल की वैज्ञानिक खुदाई और संरक्षण किया जाए, तो यह भारतीय पुरातत्व मानचित्र पर एक नया अध्याय जोड़ सकता है।

रातडिया री डेरी की यह खोज सिर्फ एक पुरातात्विक उपलब्धि नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक चेतना और इतिहास की पुनर्खोज का प्रतीक भी बन सकती है। यदि इसे संरक्षित कर आगे अध्ययन किया जाए तो यह स्थल वैश्विक ऐतिहासिक विमर्श में राजस्थान की भूमिका को सशक्त बना सकता है।
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