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Rajasthan News: टीन शेड में चल रही बेटियों की पढ़ाई, जर्जर स्कूल भवन बना खतरा, पढ़ाई छोड़ने को मजबूर छात्राएं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Thu, 07 Aug 2025 12:35 PM IST
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सार
सरकार बालिका शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करके कई प्रकार की योजनाएं चला रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिले के फतेहगढ़ उपखंड की झिनझिनयाली उप तहसील में चल रहे एकमात्र बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की हालत कुछ ऐसी ही है।
खुले में बैठकर पढ़ने को मजबूर छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कई योजनाएं चला रही है, प्रोत्साहन राशि दी जा रही है लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी स्कूलों की हालत उजागर कर रही है। उपखंड फतेहगढ़ की उप तहसील झिनझिनयाली के बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 200 से अधिक छात्राओं का नामांकन है, लेकिन भवन की स्थिति भयावह है।
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विद्यालय में बने पांच कक्षों में से तीन पूरी तरह जर्जर हैं और बंद पड़े हैं। शेष दो कक्षों में दसवीं और ग्यारहवीं की छात्राएं बैठती हैं, जबकि पहली से नौवीं तक की सभी छात्राओं को एक ही टीन शेड के नीचे पढ़ाया जा रहा है। इससे शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और बालिकाओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। बरसात में जर्जर कक्षों के ध्वस्त होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे छात्राएं डर के साए में हैं।
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विद्यालय में एक भी महिला अध्यापिका नहीं है। रसोईघर की दीवारों में दरारें हैं और छत गिरने की कगार पर है। पेयजल के लिए बना टांका भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार सिर्फ कागजों में ही बालिका शिक्षा को लेकर बड़े बड़े दावे करती है हकीकत कुछ ओर ही है अभी कुछ दिन पहले झालावाड़ के पिपलोदा में हुए हादसे के बाद प्रशासन और परिजन दोनों ही एक्टिव मोड में आ गए हैं, जिसके बाद पता चला कि झालावाड़ ही नहीं पूरे राजस्थान के यहीं हाल हैं, हर स्कूल में कमरे छतिग्रस्त हैं |
ग्रामीण फतेहसिंह का कहना है कि यह विद्यालय आठ-दस गांवों के लिए एकमात्र बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय है। जर्जर कक्षों और सुविधाओं के अभाव में छात्राएं पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रही हैं। प्रधानाचार्य इंद्राराम पन्नू ने बताया कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया है और उप तहसील भवन में वैकल्पिक रूप से विद्यालय चलाने की मांग भी की गई है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई आदेश नहीं मिला है।