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Jaisalmer News: बॉर्डर पर मिले किशोर दंपति का अंतिम संस्कार, जैसलमेर से था गहरा नाता, भारत आने की थी ये मजबूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jul 2025 11:20 AM IST
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सार
बीती 28 जून को भारत-पाक सीमा पर मिले युवक-युवती के शवों की शिनाख्त हो चुकी है। ये दोनों पाकिस्तानी दंपति बेहतर जीवन की तलाश में भारत आना चाहते थे और इसके लिए डेढ़ साल से वीजा के प्रयास कर रहे थे लेकिन वीजा मिलने में हो रही देरी के कारण दोनों ने पैदल ही भारत आने का जोखिम लिया और रेगिस्तान की गर्मी और प्यास से उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
बॉर्डर पर मृत मिले दंपती का जैसलमेर में हुआ अंतिम संस्कार
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विस्तार
तपते रेगिस्तान में हाल ही में घटी एक हृदय विदारक घटना ने फिर से सीमा पार से बेहतर जीवन और धार्मिक आजादी की तलाश में आने वालों की पीड़ा को उजागर कर दिया है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से अवैध रूप से भारत में प्रवेश की कोशिश कर रहे किशोर दंपती की गर्मी और प्यास के कारण दर्दनाक मौत हो गई।
मृतकों की पहचान 17 वर्षीय रवि कुमार और उसकी 15 वर्षीय पत्नी शांति बाई के रूप में हुई है, जो पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी जिले के मीरपुर माथेलो गांव के निवासी थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों दोनों के शव सीमावर्ती क्षेत्र में मिलने के बाद खोजबीन शुरू हुई थी।
सूत्रों के अनुसार रवि और शांति पिछले डेढ़ साल से भारत के वीजा के लिए आवेदन कर रहे थे लेकिन लगातार अस्वीकृति और देरी से निराश होकर उन्होंने पैदल ही भारत आने का जोखिम उठाया। 21 जून को दोनों घर से निकले थे। रवि ने परिवार को बताया कि वह पत्नी को उसके मायके गुलाम हुसैन गांव छोड़ने जा रहा है। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया और अगले दिन पाकिस्तान में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई।
ये भी पढ़ें: Alwar News: फैक्टरी में काम कर रहे इलेक्ट्रीशियन की करंट लगने से मौत, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
रवि और शांति ने भारत में प्रवेश के लिए जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके से 50 किलोमीटर पैदल यात्रा की। बताया गया है कि रवि मोटर साइकिल से कुछ दूरी तक आया था, फिर दोनों ने रेगिस्तानी इलाके में पैदल सफर जारी रखा। 28 जून को साधेवाला क्षेत्र में गज सिंह कुएं के पास कुछ चरवाहों ने दो शव देखे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस को मौके से पाकिस्तान के राष्ट्रीय पहचान पत्र मिले, जिनके पीछे उर्दू में कुछ भावुक पंक्तियां भी लिखी थीं।
जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि शव अत्यधिक सड़ चुके थे, जिससे संक्रमण का खतरा था। इसलिए पोस्टमार्टम के बाद तत्काल अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतकों के पाकिस्तानी रिश्तेदारों से संपर्क करवाने में जैसलमेर के मेवाराम नामक व्यक्ति ने मदद की। मेवाराम मृतका शांति के गांव के दामाद हैं, जो स्वयं दस साल पहले पाकिस्तान के सिंध से भारत आकर शरण ले चुके हैं। मेवाराम ने बताया कि रवि का अपने पिता से विवाद चल रहा था और वह पत्नी के साथ घर छोड़कर भारत में शरण लेने निकल पड़ा। रवि का सपना था कि भारत में आकर एक सुरक्षित और बेहतर जीवन जी सके, लेकिन वीजा प्रक्रिया में हो रही देरी और असफल प्रयासों ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार जब रवि और शांति ने रेगिस्तान पार करने की कोशिश की तब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक था। तपती रेतख् निर्जन इलाका और पानी की भारी कमी ने उनकी जान ले ली। रामगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उनके रिश्तेदारों की मदद से दोनों का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मृतकों की पहचान 17 वर्षीय रवि कुमार और उसकी 15 वर्षीय पत्नी शांति बाई के रूप में हुई है, जो पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी जिले के मीरपुर माथेलो गांव के निवासी थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों दोनों के शव सीमावर्ती क्षेत्र में मिलने के बाद खोजबीन शुरू हुई थी।
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सूत्रों के अनुसार रवि और शांति पिछले डेढ़ साल से भारत के वीजा के लिए आवेदन कर रहे थे लेकिन लगातार अस्वीकृति और देरी से निराश होकर उन्होंने पैदल ही भारत आने का जोखिम उठाया। 21 जून को दोनों घर से निकले थे। रवि ने परिवार को बताया कि वह पत्नी को उसके मायके गुलाम हुसैन गांव छोड़ने जा रहा है। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया और अगले दिन पाकिस्तान में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई।
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रवि और शांति ने भारत में प्रवेश के लिए जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके से 50 किलोमीटर पैदल यात्रा की। बताया गया है कि रवि मोटर साइकिल से कुछ दूरी तक आया था, फिर दोनों ने रेगिस्तानी इलाके में पैदल सफर जारी रखा। 28 जून को साधेवाला क्षेत्र में गज सिंह कुएं के पास कुछ चरवाहों ने दो शव देखे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस को मौके से पाकिस्तान के राष्ट्रीय पहचान पत्र मिले, जिनके पीछे उर्दू में कुछ भावुक पंक्तियां भी लिखी थीं।
जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि शव अत्यधिक सड़ चुके थे, जिससे संक्रमण का खतरा था। इसलिए पोस्टमार्टम के बाद तत्काल अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतकों के पाकिस्तानी रिश्तेदारों से संपर्क करवाने में जैसलमेर के मेवाराम नामक व्यक्ति ने मदद की। मेवाराम मृतका शांति के गांव के दामाद हैं, जो स्वयं दस साल पहले पाकिस्तान के सिंध से भारत आकर शरण ले चुके हैं। मेवाराम ने बताया कि रवि का अपने पिता से विवाद चल रहा था और वह पत्नी के साथ घर छोड़कर भारत में शरण लेने निकल पड़ा। रवि का सपना था कि भारत में आकर एक सुरक्षित और बेहतर जीवन जी सके, लेकिन वीजा प्रक्रिया में हो रही देरी और असफल प्रयासों ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार जब रवि और शांति ने रेगिस्तान पार करने की कोशिश की तब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक था। तपती रेतख् निर्जन इलाका और पानी की भारी कमी ने उनकी जान ले ली। रामगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उनके रिश्तेदारों की मदद से दोनों का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया गया।