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Jaisalmer News: बालोतरा, बाड़मेर और जैसलमेर में मिला दुर्लभ खनिजों का खजाना; संसद में सरकार ने की पुष्टि

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर/बाड़मेर/बालोतरा Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Mon, 04 Aug 2025 07:47 PM IST
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सार

Jaisalmer News: सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल द्वारा संसद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में भारत सरकार के खान मंत्रालय ने खुलासा किया कि पश्चिमी राजस्थान में चूना पत्थर और मिट्टी के अलावा कई दुर्लभ खनिजों का भंडार है। पढ़ें पूरी खबर...।

Rajasthan News Rare Mineral Reserves Found in Barmer Balotra and Jaisalmer, Govt Confirms in Parliament
बालोतरा, बाड़मेर और जैसलमेर में मिला दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार
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विस्तार

राजस्थान के पश्चिमी हिस्से को अब सिर्फ मरुस्थल और सीमांत जिलों के रूप में नहीं देखा जाएगा। संसद में भारत सरकार की ओर से दी गई एक अहम जानकारी ने इस क्षेत्र को देश के खनिज मानचित्र पर एक संभावनाओं से भरपूर भूभाग के रूप में स्थापित कर दिया है। बालोतरा, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में दुर्लभ, सामरिक और तकनीकी दृष्टि से महत्त्वपूर्ण खनिजों की भारी मात्रा में मौजूदगी की पुष्टि खुद केंद्र सरकार ने की है।

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यह स्वीकारोक्ति राज्य के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल द्वारा संसद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में मिली। इसमें भारत सरकार के खान मंत्रालय ने खुलासा किया कि पश्चिमी राजस्थान में चूना पत्थर और मिट्टी के अलावा थोरियम, नायोडिमियम, टैंटलम, जिरकोनियम, नाइओबियम, रेनियम, रेडियम और रुबिडियम जैसे खनिजों का विशाल भंडार छिपा हुआ है। यह जानकारी सामने आते ही न केवल इन जिलों के भविष्य को लेकर उत्साह बढ़ा है, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षेत्र की मजबूती की संभावनाएं भी प्रबल हो गई हैं।
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बालोतरा के सिवाना में है सबसे अधिक भंडार
भारत सरकार के अधीन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट (AMD) ने अब तक इस क्षेत्र में कुल 47 भूगर्भीय सर्वेक्षण किए हैं। इन अध्ययनों के दौरान विशेष रूप से बालोतरा के सिवाना क्षेत्र में थोरियम (81.8 मिलियन टन), नायोडिमियम (67.6 मिलियन टन), टैंटलम (6.8 मिलियन टन) और जिरकोनियम (52.5 मिलियन टन) जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजों की भारी मात्रा में उपस्थिति दर्ज की गई है।
 
इन खनिजों का उपयोग मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा, रक्षा उपकरण, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष अनुसंधान, सुपरकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण जैसे अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में होता है। ऐसे में इनका भारत में मिलना न केवल विदेशी निर्भरता को कम करेगा, बल्कि देश को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भी सशक्त बनाएगा।

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अभी तक कोई स्पष्ट रणनीति नहीं, सांसद ने जताई चिंता
हालांकि इतना बड़ा खनिज भंडार मिलने की पुष्टि होने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस रणनीति, खनन नीति या औद्योगिक योजना सामने नहीं आई है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने कहा कि सरकार को इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए इसे राष्ट्रीय खनिज नीति में शामिल करना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दुर्लभ खनिजों के दोहन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उपयोग के लिए दीर्घकालिक और पारदर्शी कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। साथ ही इस पूरी प्रक्रिया को स्थानीय रोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि यह विकास सिर्फ कागजों तक सीमित न रह जाए, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और समृद्धि का माध्यम बन सके।

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