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Jalore News: जालोर शिक्षा विभाग में 600 कार्मिक एसओजी की रडार पर, मंडल स्तर पर 10 बिंदुओं पर होगी जांच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर
Published by: जालौर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2026 08:57 AM IST
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सार
जालोर के शिक्षा विभाग में कार्यरत करीब 600 कार्मिकों की नियुक्ति संदिग्ध पाई गई है। इन मामलों की जांच अब मंडल स्तर पर की जाएगी। इनमें से 80 से अधिक कार्मिक पहले ही बर्खास्त, सस्पेंड या गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
जालोर शिक्षा विभाग में 600 कार्मिक एसओजी की रडार पर, मंडल स्तर पर 10 बिंदुओं पर होगी जांच
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जालोर जिले के शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में संदिग्ध नियुक्तियों का मामला सामने आया है। विभागीय जांच में करीब 600 कार्मिकों की नियुक्ति संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद इन मामलों की जांच अब मंडल स्तर पर कराई जाएगी।
जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में नियुक्त हुए कार्मिकों की जांच (एसओजी) ने राज्य स्तर पर कराई थी। जांच में सामने आया कि पूरे राजस्थान में जालोर जिले में सबसे ज्यादा संदिग्ध कार्मिक शिक्षा विभाग में पाए गए हैं।
विभागीय जांच के अनुसार संदिग्ध 600 कार्मिकों में करीब 250 सेकेंडरी और 350 प्राइमरी सेक्शन के कर्मचारी शामिल हैं। विभाग ने दो बार जांच करने के बाद इन सभी की सूची एसओजी को भेज दी है। इनमें से 150 से अधिक कार्मिकों के खिलाफ पहले से ही मामले दर्ज हैं।
पढ़ें: भारत की ऐतिहासिक जीत पर अजमेर में जश्न, गांधी भवन चौराहे पर आतिशबाजी और नाच-गाने से मनाई खुशी
मंडल स्तर पर होगी दोबारा जांच
एसओजी ने संदिग्ध कार्मिकों की सूची मंडल स्तर के कार्यालयों को भेज दी है। अब मंडल स्तर के अधिकारी संबंधित विश्वविद्यालयों में जाकर अभ्यर्थियों की डिग्री और दस्तावेजों की जांच करेंगे और रिपोर्ट तैयार कर एसओजी को सौंपेंगे।
इन 10 बिंदुओं पर होगी जांच
फर्जी डिग्री की जांच के लिए एसओजी ने 10 प्रमुख बिंदु तय किए हैं, जिनके आधार पर अभ्यर्थियों की डिग्री की वैधता की पुष्टि की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से
जांच में कार्मिकों के संदिग्ध होने के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं। पहला, कई मामलों में डिग्री फर्जी होने की आशंका है। दूसरा, आवेदन पत्र और दस्तावेज सत्यापन के दौरान फोटो और हस्ताक्षर में अंतर या अलग-अलग विश्वविद्यालयों की डिग्री बताने जैसे मामले सामने आए हैं।
विभाग के अनुसार अब तक 80 से अधिक कार्मिकों को सेवा से बर्खास्त या निलंबित किया जा चुका है, जबकि कई मामलों में गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जिन कार्मिकों की गिरफ्तारी होती है, उनकी सूचना मिलते ही विभाग की ओर से निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2021 से अब तक हुई भर्तियों में 200 से अधिक कार्मिकों पर डमी अभ्यर्थी बैठाकर परीक्षा पास करने, फर्जी डिग्री लगाने और फोटो-साइन मिसमैच जैसे आरोपों में मामले दर्ज हो चुके हैं।
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जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में नियुक्त हुए कार्मिकों की जांच (एसओजी) ने राज्य स्तर पर कराई थी। जांच में सामने आया कि पूरे राजस्थान में जालोर जिले में सबसे ज्यादा संदिग्ध कार्मिक शिक्षा विभाग में पाए गए हैं।
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विभागीय जांच के अनुसार संदिग्ध 600 कार्मिकों में करीब 250 सेकेंडरी और 350 प्राइमरी सेक्शन के कर्मचारी शामिल हैं। विभाग ने दो बार जांच करने के बाद इन सभी की सूची एसओजी को भेज दी है। इनमें से 150 से अधिक कार्मिकों के खिलाफ पहले से ही मामले दर्ज हैं।
पढ़ें: भारत की ऐतिहासिक जीत पर अजमेर में जश्न, गांधी भवन चौराहे पर आतिशबाजी और नाच-गाने से मनाई खुशी
मंडल स्तर पर होगी दोबारा जांच
एसओजी ने संदिग्ध कार्मिकों की सूची मंडल स्तर के कार्यालयों को भेज दी है। अब मंडल स्तर के अधिकारी संबंधित विश्वविद्यालयों में जाकर अभ्यर्थियों की डिग्री और दस्तावेजों की जांच करेंगे और रिपोर्ट तैयार कर एसओजी को सौंपेंगे।
इन 10 बिंदुओं पर होगी जांच
फर्जी डिग्री की जांच के लिए एसओजी ने 10 प्रमुख बिंदु तय किए हैं, जिनके आधार पर अभ्यर्थियों की डिग्री की वैधता की पुष्टि की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से
- यूनिवर्सिटी में जमा किया गया आवेदन पत्र
- एनरोलमेंट और रोल नंबर
- प्रवेश के समय जमा कराया गया माइग्रेशन सर्टिफिकेट
- पूर्व कॉलेज या विश्वविद्यालय का ट्रांसफर सर्टिफिकेट
- शैक्षणिक शुल्क जमा की रसीद
- छात्र उपस्थिति पंजिका
- परीक्षा का टाइम टेबल और आवंटित परीक्षा केंद्र
- परीक्षा के लिए जारी एडमिट कार्ड
- रिजल्ट की टीआर शीट
- संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान की एनसीटीई से मान्यता का प्रमाण
- संदिग्ध होने के दो प्रमुख कारण
जांच में कार्मिकों के संदिग्ध होने के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं। पहला, कई मामलों में डिग्री फर्जी होने की आशंका है। दूसरा, आवेदन पत्र और दस्तावेज सत्यापन के दौरान फोटो और हस्ताक्षर में अंतर या अलग-अलग विश्वविद्यालयों की डिग्री बताने जैसे मामले सामने आए हैं।
विभाग के अनुसार अब तक 80 से अधिक कार्मिकों को सेवा से बर्खास्त या निलंबित किया जा चुका है, जबकि कई मामलों में गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जिन कार्मिकों की गिरफ्तारी होती है, उनकी सूचना मिलते ही विभाग की ओर से निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2021 से अब तक हुई भर्तियों में 200 से अधिक कार्मिकों पर डमी अभ्यर्थी बैठाकर परीक्षा पास करने, फर्जी डिग्री लगाने और फोटो-साइन मिसमैच जैसे आरोपों में मामले दर्ज हो चुके हैं।