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Jalore: लोकसभा में गूंजा जालौर-सिरोही का जल संकट, सांसद लुंबाराम चौधरी ने नर्मदा जल की मांग उठाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Wed, 30 Jul 2025 07:10 PM IST
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सार
सांसद लुंबाराम चौधरी ने लोकसभा में जालौर-सिरोही क्षेत्र के जल संकट को गंभीर बताते हुए नर्मदा का पानी उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोनों जिले डार्क जोन घोषित हैं और वर्षों से पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं।
सांसद लुंबाराम चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जालौर-सिरोही से लोकसभा सांसद लुंबाराम चौधरी ने बुधवार को लोकसभा में अपने संसदीय क्षेत्र की जल संकट की गंभीर समस्या को उठाते हुए नर्मदा का पानी जालौर और सिरोही जिलों तक पहुंचाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोनों जिले डार्क जोन घोषित हैं, जहां पीने के पानी और सिंचाई के लिए आवश्यक जल संसाधन मौजूद नहीं हैं। सांसद ने कहा कि क्षेत्र की जनता वर्षों से पानी की कमी से जूझ रही है और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
खोसला कमेटी के समझौते की अनदेखी पर सवाल
सांसद चौधरी ने कहा कि 1 सितंबर 1965 को खोसला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान और गुजरात के बीच कडाणा बांध के निर्माण की सहमति बनी थी। इसके तहत 1 अक्टूबर 1966 को माही जल बंटवारा समझौते में यह तय हुआ था कि गुजरात के खेडा जिले को तब तक कडाणा बांध से पानी मिलेगा जब तक उसे नर्मदा से जल आपूर्ति शुरू नहीं होती। चूंकि वर्ष 2005 से खेडा जिले को नर्मदा का पानी मिल रहा है, ऐसे में समझौते के अनुसार अब कडाणा और माही बांध का दो-तिहाई पानी राजस्थान को मिलना चाहिए, विशेषकर जालौर और सिरोही जिलों को। लेकिन अब तक इस समझौते की पालना नहीं की गई है।
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लाखों लीटर पानी समुद्र में जा रहा बर्बाद
सांसद ने बताया कि गुड़गांव स्थित वापकॉस कंपनी द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार पिछले 37 वर्षों में कडाणा बांध 27 बार ओवरफ्लो हुआ, जिससे लगभग 1.30 लाख एमसीएम पानी समुद्र में बहकर बर्बाद हो गया। यह पानी अगर उपयोग में लाया जाता तो जालौर और सिरोही जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों की तस्वीर बदल सकती थी।
नर्मदा कैनाल से जोड़ने की मांग
चौधरी ने मांग की कि सुजलाम-सुफलाम नहर को सुदृढ़ किया जाए और उसे नर्मदा कैनाल से जोड़ा जाए, ताकि जालौर और सिरोही जिलों को स्थायी रूप से पीने के पानी और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने सरकार से समझौते की पालना सुनिश्चित करने और शीघ्र समाधान की मांग की, जिससे आमजन को राहत मिल सके।
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खोसला कमेटी के समझौते की अनदेखी पर सवाल
सांसद चौधरी ने कहा कि 1 सितंबर 1965 को खोसला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान और गुजरात के बीच कडाणा बांध के निर्माण की सहमति बनी थी। इसके तहत 1 अक्टूबर 1966 को माही जल बंटवारा समझौते में यह तय हुआ था कि गुजरात के खेडा जिले को तब तक कडाणा बांध से पानी मिलेगा जब तक उसे नर्मदा से जल आपूर्ति शुरू नहीं होती। चूंकि वर्ष 2005 से खेडा जिले को नर्मदा का पानी मिल रहा है, ऐसे में समझौते के अनुसार अब कडाणा और माही बांध का दो-तिहाई पानी राजस्थान को मिलना चाहिए, विशेषकर जालौर और सिरोही जिलों को। लेकिन अब तक इस समझौते की पालना नहीं की गई है।
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लाखों लीटर पानी समुद्र में जा रहा बर्बाद
सांसद ने बताया कि गुड़गांव स्थित वापकॉस कंपनी द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार पिछले 37 वर्षों में कडाणा बांध 27 बार ओवरफ्लो हुआ, जिससे लगभग 1.30 लाख एमसीएम पानी समुद्र में बहकर बर्बाद हो गया। यह पानी अगर उपयोग में लाया जाता तो जालौर और सिरोही जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों की तस्वीर बदल सकती थी।
नर्मदा कैनाल से जोड़ने की मांग
चौधरी ने मांग की कि सुजलाम-सुफलाम नहर को सुदृढ़ किया जाए और उसे नर्मदा कैनाल से जोड़ा जाए, ताकि जालौर और सिरोही जिलों को स्थायी रूप से पीने के पानी और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने सरकार से समझौते की पालना सुनिश्चित करने और शीघ्र समाधान की मांग की, जिससे आमजन को राहत मिल सके।