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Jhalawar News: 105 साल पुरानी भवानी नाट्यशाला बदहाली की शिकार, संरक्षण की मांग तेज
Thu, 16 Jul 2026 03:40 PM IST
झालावाड़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 03:40 PM IST
सार
झालावाड़ की 105 वर्ष पुरानी ओपेरा शैली की भवानी नाट्यशाला बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में इसके जीर्णोद्धार, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, पर्यटकों के लिए खोलने और यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की मांग उठी।
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आयोजित संगोष्टी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर राजस्थान सरकार ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटकों एवं आमजन के लिए खोलने की पहल की है, ताकि लोग भारतीय संस्कृति और विरासत से रूबरू हो सकें। वहीं झालावाड़ जिला मुख्यालय स्थित उत्तर भारत की प्रसिद्ध भवानी नाट्यशाला आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण चर्चा में है।
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गढ़ परिसर में स्थित ओपेरा शैली में निर्मित भवानी नाट्यशाला का निर्माण तत्कालीन शासक महाराज राणा भवानी सिंह ने 16 जुलाई 1921 को कराया था। कभी यह राजसी वैभव, रंगकर्म और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी, लेकिन आज यह संरक्षण और रखरखाव के अभाव में जर्जर होती जा रही है।
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इतिहास के अनुसार, भवानी नाट्यशाला उत्तर भारत की अपनी तरह की अनूठी ओपेरा शैली की रंगशाला है। यहां अनेक प्रसिद्ध नाटकों का मंचन हुआ। महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम्' का मंचन भी इसी रंगमंच पर किया गया था। रियासतकाल में यहां प्रत्येक आठवें दिन नाटक का मंचन होता था। पहले सात दिन कलाकार रिहर्सल करते और आठवें दिन प्रस्तुति दी जाती थी। उस समय मंच पर उपयोग होने वाले पर्दे की कीमत लगभग 10 हजार रुपये बताई जाती है, जो उस दौर में बेहद बड़ी राशि थी। बताया जाता है कि इस नाट्यशाला में देश-विदेश के कई कलाकारों ने प्रस्तुति दी। प्रख्यात सितार वादक पंडित रवि शंकर और उनके भाई उदय शंकर का भी इस स्थान से ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है।
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105वां स्थापना दिवस मनाया
पर्यटन विकास समिति की ओर से भवानी नाट्यशाला परिसर में 105वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। मुख्य अतिथि ठाकुर मंजीत सिंह कुशवाह ने कहा कि भवानी नाट्यशाला देश की दुर्लभ कला धरोहर है और इसका संरक्षण किया जाना चाहिए, ताकि यह पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन सके।
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संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रारंभिक शिक्षा विभाग के संस्थापन अधिकारी रामजीलाल मीणा ने कहा कि प्रशासन को शीघ्र इसका जीर्णोद्धार कराकर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए। पर्यटन विकास समिति के संयोजक ओम पाठक ने कहा कि ओपेरा शैली में बनी इस अनूठी नाट्यशाला को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने यहां नाट्य अकादमी का कार्यालय स्थापित करने तथा नाट्यशाला को नियमित रूप से पर्यटकों और आमजन के लिए खोलने की भी मांग की।
इतिहासकार ने बताया महत्व
इतिहासकार ललित शर्मा ने बताया कि महाराज राणा भवानी सिंह ने 1921 में इस नाट्यशाला का निर्माण कराया था। इसमें भव्य रंगमंच के साथ 36 बालकनियां बनाई गई हैं। वर्ष 1921 से 1950 तक यहां देशी-विदेशी नाटकों का मंचन होता रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि नाट्यशाला परिसर में एक विस्तृत इतिहास पट्टिका स्थापित की जाए, जिसमें यहां मंचित प्रमुख नाटकों और उनसे जुड़े कलाकारों का उल्लेख हो।