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Jhalawar News: गंभीर बीमारी से जूझ रहे मासूम को मिली नई जिंदगी, जटिल ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हुआ नवजात
Wed, 24 Jun 2026 12:09 AM IST
झालावाड़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:09 AM IST
सार
जब बड़े शहरों में इलाज की उम्मीद धुंधली पड़ने लगी, तब झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने पांच माह के नवजात को नया जीवन दे दिया। जटिल सर्जरी के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।
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ऑपरेशन करते टीम ओर बालक
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विस्तार
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी एवं जनाना अस्पताल के चिकित्सकों ने आपसी समन्वय, विशेषज्ञता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पांच माह के एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी तथा पैरा मिलिट्री फोर्स में कार्यरत राजेश डांगी के पांच माह के पुत्र का सफल उपचार कर चिकित्सकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
जानकारी के अनुसार राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी 2026 में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के कुछ समय बाद परिजनों ने देखा कि दोनों में से एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से नहीं संभाल पा रहा है। कई जगह उपचार और परामर्श लेने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर चिंतित परिजन बच्चे को इलाज के लिए झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लेकर पहुंचे।
यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल भर्ती कराया। जांच के दौरान पता चला कि बच्चा हाइड्रोसिफलस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे समय पर उपचार नहीं मिलने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
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महज पांच माह की उम्र होने के कारण बच्चे का ऑपरेशन चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती था। विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श के बाद एंडोस्कोपी (दूरबीन पद्धति) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। बेहद छोटे छेद के माध्यम से मस्तिष्क का ऑपरेशन करना जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण था, वहीं इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से एनेस्थीसिया देना भी जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी।
चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय से ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ऑपरेशन के बाद बाल रोग विभाग ने भी बच्चे की निगरानी और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगातार चिकित्सकीय देखभाल के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है। 15 जून को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का संपूर्ण इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से नि:शुल्क किया गया। इससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली।
परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बेहद चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे इलाज की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने न केवल उनके बच्चे को नया जीवन दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटलराज और डॉ. संजीव गुप्ता तथा बाल रोग विभाग के डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी सराहनीय रहा।
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जानकारी के अनुसार राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी 2026 में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के कुछ समय बाद परिजनों ने देखा कि दोनों में से एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से नहीं संभाल पा रहा है। कई जगह उपचार और परामर्श लेने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर चिंतित परिजन बच्चे को इलाज के लिए झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लेकर पहुंचे।
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यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल भर्ती कराया। जांच के दौरान पता चला कि बच्चा हाइड्रोसिफलस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे समय पर उपचार नहीं मिलने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
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महज पांच माह की उम्र होने के कारण बच्चे का ऑपरेशन चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती था। विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श के बाद एंडोस्कोपी (दूरबीन पद्धति) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। बेहद छोटे छेद के माध्यम से मस्तिष्क का ऑपरेशन करना जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण था, वहीं इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से एनेस्थीसिया देना भी जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी।
चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय से ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ऑपरेशन के बाद बाल रोग विभाग ने भी बच्चे की निगरानी और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगातार चिकित्सकीय देखभाल के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है। 15 जून को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का संपूर्ण इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से नि:शुल्क किया गया। इससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली।
परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बेहद चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे इलाज की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने न केवल उनके बच्चे को नया जीवन दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटलराज और डॉ. संजीव गुप्ता तथा बाल रोग विभाग के डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी सराहनीय रहा।