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Jodhpur News: तांत्रिक के इशारे पर चल रही थी चोरी की जांच, हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार, जांच अधिकारी बदला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: जोधपुर ब्यूरो Updated Thu, 21 May 2026 05:21 PM IST
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सार

नागौर में चोरी के एक मामले की जांच के दौरान तांत्रिक के इशारों पर कार्रवाई करने का आरोप सामने आने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि अपराध की जांच अंधविश्वास नहीं, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।

Jodhpur News: HC Pulls Up Police Over Theft Probe Based on Tantrik’s Claims, Investigation Officer Replaced
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले में चोरी के एक मामले की जांच के दौरान तांत्रिक के कथित हस्तक्षेप को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी आपराधिक मामले की जांच अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र या किसी भोपी के इशारों पर नहीं की जा सकती। जांच केवल तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए।



मामले की सुनवाई जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता खेमी देवी ने अदालत को बताया कि 7 मार्च 2026 को उनके घर में चोरी हुई थी, जिसमें सोने-चांदी के जेवरात और नकदी चोरी हो गई थी। मामले की जांच पुलिस थाना श्री बालाजी के हेड कांस्टेबल रतिराम को सौंपी गई थी।
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याचिका में आरोप लगाया गया कि चोरी का खुलासा नहीं होने पर जांच अधिकारी परिवादी और गांव के कुछ लोगों को अलवर स्थित एक भोपी के पास ले गया। वहां कथित भोपी ने परिवादी की पुत्रवधू के पिता मोहनराम को चोरी का आरोपी बताया, जिसके बाद पुलिस ने उसी दिशा में जांच शुरू कर दी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोहर सिंह राठौड़ ने अदालत में दलील दी कि भारतीय कानून में कहीं भी तांत्रिक या भोपी के आधार पर अपराध जांच करने का प्रावधान नहीं है। जांच पूरी तरह साक्ष्यों और निष्पक्ष प्रक्रिया पर आधारित होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने भी स्वीकार किया कि जांच अधिकारी अलवर स्थित उस स्थान पर गया था, जहां कथित भोपी रहती है।

इस पर हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच न्याय व्यवस्था की मूल आवश्यकता है। अदालत ने नागौर पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि एफआईआर की जांच किसी अन्य थाने के सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को सौंपी जाए। साथ ही वर्तमान जांच अधिकारी को हटाकर 15 दिनों के भीतर नए अधिकारी को जांच सौंपने के आदेश दिए गए।

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