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Jodhpur News: ड्रोन टेक्नोलॉजी का नया हब बन रहा आईआईटी जोधपुर, 50 किलो से ज्यादा वजन उठाएंगे ड्रोन
Mon, 17 Aug 2026 04:01 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Mon, 17 Aug 2026 04:01 PM IST
सार
जोधपुर अब सिर्फ टेक्सटाइल और पर्यटन ही नहीं, बल्कि ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। IIT जोधपुर में विकसित ड्रोन हब में भारी वजन उठाने वाले ड्रोन से लेकर एंटी-ड्रोन सिस्टम और एयर टैक्सी तक की तकनीक पर काम चल रहा है।
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आईआईटी जोधपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जोधपुर अब सिर्फ टेक्सटाइल और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। IIT जोधपुर में विकसित ड्रोन हब में भारी वजन उठाने वाले ड्रोन से लेकर एंटी-ड्रोन सिस्टम और एयर टैक्सी तक की तकनीक पर काम चल रहा है।
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देश में मानव रहित हवाई वाहनों के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए जोधपुर को प्रमुख ड्रोन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के परिसर में आधुनिक ड्रोन केंद्र स्थापित किया गया है। यह केंद्र पैसेंजर ड्रोन से लेकर एंटी-ड्रोन तकनीक के विकास और निर्माण पर काम कर रहा है।
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आईआईटी जोधपुर के निदेशक ने बताया कि यह हब रक्षा बलों, आपातकालीन सेवाओं और सिविल उड़ानों की जरूरतों को पूरा करेगा। अधिकारियों के अनुसार पश्चिमी सीमा के पास स्थित होने के कारण जोधपुर रणनीतिक दृष्टि से ड्रोन शोध और परीक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। संस्थान की अनुसंधान टीम के अनुसार इस केंद्र में भारी सामान ढोने वाले हेवी-लिफ्ट ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये ड्रोन आपदा प्रबंधन और दुर्गम क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने में सहायक होंगे। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों के छिड़काव और फसलों की निगरानी के लिए भी विशेष उपकरण बनाए जा रहे हैं।
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आईआईटी जोधपुर के तकनीकी संकाय ने पुष्टि की है कि संस्थान में निर्मित ड्रोन 50 किलोग्राम से अधिक वजन उठाने में सक्षम होंगे। आधिकारिक विवरण के अनुसार इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से वित्तीय सहायता प्राप्त हो रही है। ड्रोन हब का मुख्य ध्यान एंटी-ड्रोन प्रणालियों के निर्माण पर केंद्रित है। आईआईटी जोधपुर के रक्षा अनुसंधान सेल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए विशेष रडार आधारित एंटी-ड्रोन उपकरण बनाए जा रहे हैं। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन को पहचानकर उसे निष्क्रिय करने की क्षमता रखेगी।
साथ ही भविष्य के शहरी परिवहन को सुगम बनाने के लिए पैसेंजर ड्रोन यानी एयर टैक्सी का मॉडल विकसित किया जा रहा है। परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने दावा किया कि कुछ वर्षों में एक से दो यात्रियों को ले जाने वाले स्वचालित पैसेंजर ड्रोन का सफल परीक्षण पूरा कर लिया जाएगा। इस ड्रोन केंद्र के माध्यम से राज्य के युवाओं और तकनीकी स्टार्टअप को सीधा प्रोत्साहन मिलेगा। आईआईटी जोधपुर इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर के रिकॉर्ड के अनुसार 20 से अधिक नए स्टार्टअप इस हब से जुड़ चुके हैं। संस्थान इन कंपनियों को प्रयोगशाला, परीक्षण मैदान और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है।
केंद्र के संचालन से रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग ने भी इस पहल की सराहना करते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावना जताई है। आगामी पांच वर्षों में इस हब के जरिए सैकड़ों कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों को अवसर मिलने की उम्मीद जताई गई है।