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राजस्थान: सिजेरियन डिलीवरी के बाद आठ प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी, दो की हालत गंभीर; अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर बंद
Mon, 22 Jun 2026 10:20 AM IST
जोधपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: जोधपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 10:20 AM IST
सार
जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद आठ प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई। दो महिलाओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें एमडीएम अस्पताल रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने ऑपरेशन थिएटर बंद कर जांच शुरू कर दी है।
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सिजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी आठ प्रसूताओं की तबीयत
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में भी ऐसा मामला सामने आया है। यहां सिजेरियन ऑपरेशन से प्रसव कराने वाली आठ महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार को पावटा जिला अस्पताल में आठ महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी की गई थी। ऑपरेशन के कुछ समय बाद कई महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं सामने आने लगीं। कुछ मरीजों को कमजोरी, रक्तचाप में गिरावट और अन्य चिकित्सकीय समस्याओं की शिकायत हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया।
ऑपरेशन थिएटर को बंद किया
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एहतियातन ऑपरेशन थिएटर को बंद कर दिया है। साथ ही संभावित संक्रमण या अन्य तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
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दो महिलाओं को एमडीएम अस्पताल किया गया रेफर
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि प्रभावित आठ महिलाओं में से दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल रेफर किया गया है। शेष छह महिलाओं का उपचार पावटा जिला अस्पताल में ही चल रहा है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों में एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या हुई, जबकि दूसरी महिला पहले से मधुमेह की मरीज थी और उसका रक्तचाप काफी कम हो गया था। दोनों का विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज जारी है।
ये भी पढ़ें- Bihar News: अभिनेता पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई पर जानलेवा हमला, गंभीर हालत में पटना रेफर; दहशत में परिवार
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। ऑपरेशन थिएटर और सर्जरी में उपयोग की गई चिकित्सा सामग्री के नमूने एकत्र कर परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण, दवाओं की गुणवत्ता या अन्य तकनीकी कारणों की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
फिलहाल, सभी प्रभावित महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
बीकानेर में छह महिलाओं की किडनी हुई थी फेल
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में रविवार को एक और प्रसूता की मौत हो गई। अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी से छह महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी। बीते कई दिनों से शारदा वेंटिलेटर पर थी। उन्होंने रविवार को दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, प्रसव के बाद शारदा के कई अंग प्रभावित हो गए थे। विशेष रूप से किडनी संबंधी गंभीर समस्या उत्पन्न होने के बाद उसका लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था। डिलीवरी के बाद कुल छह महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। इनमें किडनी सहित शरीर के अन्य अंगों पर प्रतिकूल असर पड़ने की बात सामने आई थी। प्रभावित महिलाओं में से एक महिला उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है, जबकि अन्य महिलाओं का अभी भी अस्पताल में इलाज जारी है।
कोटा में बीते दिनों हुई थीं पांच मौतें
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में बीते दिनों एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल्योर की घटना हुई थी। उस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बताया था कि प्रसूताओं को जो ऑक्सीटोक्सीन के इंजेक्शन दिए गए थे। उसमें सिर्फ पानी था। सूत्रों के अनुसार, एक महिला की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण हुई, जबकि दूसरे मामले में संक्रमण बढ़कर सेप्टीसीमिया और मल्टी ऑर्गन फेल्योर तक पहुंच गया। एक अन्य मामले में गर्भाशय संक्रमण और उपचार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। वहीं, रिपोर्ट में एक महिला की मौत का कारण पूर्व से मौजूद हृदय रोग तथा एक अन्य की मृत्यु प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है।
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जानकारी के अनुसार, शनिवार को पावटा जिला अस्पताल में आठ महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी की गई थी। ऑपरेशन के कुछ समय बाद कई महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं सामने आने लगीं। कुछ मरीजों को कमजोरी, रक्तचाप में गिरावट और अन्य चिकित्सकीय समस्याओं की शिकायत हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया।
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ऑपरेशन थिएटर को बंद किया
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एहतियातन ऑपरेशन थिएटर को बंद कर दिया है। साथ ही संभावित संक्रमण या अन्य तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
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दो महिलाओं को एमडीएम अस्पताल किया गया रेफर
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि प्रभावित आठ महिलाओं में से दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल रेफर किया गया है। शेष छह महिलाओं का उपचार पावटा जिला अस्पताल में ही चल रहा है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों में एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या हुई, जबकि दूसरी महिला पहले से मधुमेह की मरीज थी और उसका रक्तचाप काफी कम हो गया था। दोनों का विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज जारी है।
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स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। ऑपरेशन थिएटर और सर्जरी में उपयोग की गई चिकित्सा सामग्री के नमूने एकत्र कर परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण, दवाओं की गुणवत्ता या अन्य तकनीकी कारणों की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
फिलहाल, सभी प्रभावित महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
बीकानेर में छह महिलाओं की किडनी हुई थी फेल
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में रविवार को एक और प्रसूता की मौत हो गई। अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी से छह महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी। बीते कई दिनों से शारदा वेंटिलेटर पर थी। उन्होंने रविवार को दम तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, प्रसव के बाद शारदा के कई अंग प्रभावित हो गए थे। विशेष रूप से किडनी संबंधी गंभीर समस्या उत्पन्न होने के बाद उसका लंबे समय से अस्पताल में इलाज चल रहा था। डिलीवरी के बाद कुल छह महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। इनमें किडनी सहित शरीर के अन्य अंगों पर प्रतिकूल असर पड़ने की बात सामने आई थी। प्रभावित महिलाओं में से एक महिला उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है, जबकि अन्य महिलाओं का अभी भी अस्पताल में इलाज जारी है।
कोटा में बीते दिनों हुई थीं पांच मौतें
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में बीते दिनों एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल्योर की घटना हुई थी। उस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बताया था कि प्रसूताओं को जो ऑक्सीटोक्सीन के इंजेक्शन दिए गए थे। उसमें सिर्फ पानी था। सूत्रों के अनुसार, एक महिला की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण हुई, जबकि दूसरे मामले में संक्रमण बढ़कर सेप्टीसीमिया और मल्टी ऑर्गन फेल्योर तक पहुंच गया। एक अन्य मामले में गर्भाशय संक्रमण और उपचार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। वहीं, रिपोर्ट में एक महिला की मौत का कारण पूर्व से मौजूद हृदय रोग तथा एक अन्य की मृत्यु प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है।