राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षक की डांट आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, तीन पर लगे आरोप हुए रद्द
Rajasthan High Court: राजस्थान हाई कोर्ट ने 2005 के बीकानेर छात्रा आत्महत्या मामले में दो शिक्षिकाओं समेत तीन आरोपियों पर लगे आरोप रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि अनुशासन के लिए शिक्षक की डांट-फटकार आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं मानी जा सकती, जब तक ठोस सबूत न हों।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शिक्षकों द्वारा छात्रों को अनुशासन में रखने के लिए डांटना-फटकारना आत्महत्या के लिए उकसाने के समान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने वर्ष 2005 के बीकानेर छात्रा आत्महत्या मामले में दो शिक्षिकाओं समेत तीन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 305 के तहत तय आरोपों को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर ने रवि भटनागर सहित अन्य की आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी शिक्षक द्वारा छात्र को नियमित रूप से स्कूल आने, पढ़ाई पर ध्यान देने, कक्षा में अनुशासन बनाए रखने या खराब प्रदर्शन पर डांटने-फटकारने जैसी सामान्य अनुशासनात्मक कार्रवाई को तब तक आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं माना जा सकता, जब तक आत्महत्या के लिए उकसाने या जानबूझकर सहायता करने का स्पष्ट और ठोस प्रमाण न हो। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने बीकानेर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संख्या-6 द्वारा 9 फरवरी 2021 को आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया।
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यह मामला बीकानेर के एक स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा से जुड़ा है, जिसने 19 अक्टूबर 2005 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। छात्रा ने कथित तौर पर एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें स्कूल के शिक्षकों पर प्रताड़ित करने, अपमानित करने और स्कूल से निकालने का प्रयास करने के आरोप लगाए गए थे।
जांच में सामने आया कि छात्रा नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित नहीं होती थी और पढ़ाई पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही थी। शिक्षकों ने उसे नियमित रूप से स्कूल आने, पढ़ाई करने और क्लास टेस्ट में शामिल होने के लिए समझाया था। रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि आरोपियों की ओर से ऐसा कोई प्रत्यक्ष या सक्रिय कृत्य नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाया था। मामले में अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी और अभिषेक मेहता ने पैरवी की।