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Kota News: प्रसूताओं से मिलने अस्पताल पहुंचे गहलोत, सरकार पर लापरवाही के आरोप, जांच पर उठाए सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Wed, 17 Jun 2026 06:32 PM IST
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सार

सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अस्पताल का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने दवाओं की उपलब्धता और उपचार व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

Kota News: Gehlot visits hospital, alleges government negligence, questions probe into maternal deaths
प्रसूताओं के हाल जानने पहुंचे अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत के मामले को लेकर मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भर्ती महिलाओं के परिजनों से मुलाकात की और चिकित्सकों से मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान गहलोत ने मामले को गंभीर बताते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अशोक गहलोत ने कहा कि प्रसूताओं की अचानक मौत होना सामान्य घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बात की गंभीरता से जांच होनी चाहिए कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं और इसके पीछे क्या कारण रहे?


गहलोत ने कहा कि अस्पताल में किडनी फेल होने जैसी जटिलताओं के चलते पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। वहीं अन्य कई महिलाएं अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ मरीजों के डायलिसिस की जानकारी भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि अधिकांश प्रभावित महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं, जो निजी अस्पतालों में इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं और सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहती हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक मृत महिलाओं की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है। चिकित्सकों के अनुसार रिपोर्ट आने में चार से छह महीने का समय लग सकता है। उनका कहना था कि रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। अशोक गहलोत ने कहा कि सरकारी अस्पतालों के प्रति मरीजों का विश्वास बनाए रखने के लिए दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ परिजनों ने शिकायत की है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई कई दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं, जिसके कारण उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।


गहलोत ने कहा कि यदि मरीजों और परिजनों के मन में जेनेरिक दवाओं को लेकर किसी प्रकार की शंका या भ्रम है, तो सरकार को उनका भरोसा जीतने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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