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तबादला: राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 25 IAS अधिकारियों का हुआ ट्रांसफर

राजस्थान की गहलोत सरकार ने अचानक से दो कलेक्टर समेत 25 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। सरकार ने जिन अधिकारियों की लिस्ट जारी की है, उनमें तीन ऐसे सीनियर आईएएस अधिकारी भी हैं, जिनके पुराने अनुभवों को देखते हुए पुराने विभागों में भेज दिया गया है। ये वो अधिकारी हैं जो वसुंधरा सरकार में इन विभागों की जिम्मेदारी संभालते थे। अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान और पेट्रोलियम) सुबोध अग्रवाल को ऊर्जा विभाग दिया गया था, जो वर्तमान में उनके पास है। उन्हें राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड का सीएमडी भी बनाया गया है।प्रधान रेजिडेंट कमिश्नर, नई दिल्ली, रोली सिंह को राजस्थान में सामान्य प्रशासन विभाग, एस्टेट, स्टेट मोटर गैरेज, प्रोटोकॉल और नागरिक उड्डयन विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है।

प्रतापगढ़ कलेक्टर रेणु जयपाल को बंदी का कलेक्टर बनाया गया। वह आशीष गुप्ता का स्थान लेंगी, जिन्हें वाटरशेड विकास और मृदा संरक्षण विभाग में निदेशक के रूप में स्थानांतरित किया गया है। 
पीएचडी विभाग से नवीन महाजन को हटाकर राजस्थान कर बोर्ड अजमेर भेज दिया गया है।

डॉक्टर पृथ्वी बने जल संसाधन विभाग के सचिव
सामान्य प्रशासन का जिम्मा संभाल रहीं गायत्री राठौड़ अब पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव होंगी। वहीं, अनुपमा जोर वाल राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की एमडी बनाई गईं हैं। इन सबके अलावा मुख्यमंत्री गहलोत के खास माने वाले डॉक्टर पृथ्वी को वित्त विभाग से जल संसाधन विभाग का सचिव बनाया गया है। उन्हें जलजीवन मिशन का एमडी भी बनाया गया है।
 
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यह कैसा नियम: गहलोत सरकार ने बाल विवाह को भी दी मंजूरी? एक महीने में पंजीकरण के आदेश, विरोध शुरू

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को विपक्ष के कड़े विरोध के बीच राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2021 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के पारित होने से अब राज्य में बाल विवाह के पंजीकरण की भी अनुमति मिल जाएगी। विधेयक में कहा गया है कि अगर शादी के समय लड़के की उम्र 21 साल से कम और लड़की की उम्र 18 साल से कम है, तो माता-पिता या अभिभावकों को 30 दिनों के भीतर इसकी जानकारी देनी होगी और पंजीकरण अधिकारी के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस विधेयक के पास होने पर भाजपा ने नाराजगी जताई है। 

संसद की कार्यवाही के दौरान विधानसभा में मुख्य विपक्ष दल भाजपा ने सवाल उठाते हुए पूछा, "पंजीकरण की क्या आवश्यकता है और बिल का उद्देश्य क्या है। भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या विधानसभा हमें सर्वसम्मति से बाल विवाह की अनुमति देती है? यह विधेयक विधानसभा के इतिहास में काला अध्याय लिखेगा ।

भाजपा ने बिल पर उठाए सवाल
वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि कांग्रेस की ओर से पारित किया गया यह संशोधन विधेयक हिंदू मैरिज एक्ट के खिलाफ है। हिंदुओं में नाबालिग की शादी गैरकानूनी है, लेकिन कांग्रेस इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं है।


बाल विवाह करने वाले जोड़ों को पंजीकरण कराने का आदेश
इसपर राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि इस विधेयक का मकसद हर विवाहित (चाहे बाल विवाह ही क्यों नहीं हो) को पंजीयन कराना होगा। उन्होंने कहा कि संशोधन कही नहीं कहता कि ऐसे विवाह वैध होंगे। कलेक्टर या डीएम चाहे तो उनपर कार्रवाई कर सकते हैं। यह विधेयक केंद्रीय कानून का विरोधाभास नहीं है। विवाह प्रमाण पत्र एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके अभाव में विधवा को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। 
शनिवार को पास हुए चार विधेयक
वहीं, राजस्थान विधानसभा ने शनिवार को आपराधिक कानून (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2021 समेत चार विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिए। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सदन को बताया कि आपराधिक कानून (राजस्थान संशोधन) विधेयक में खाद्य पदार्थों में मिलावट के लिए सजा बढ़ाने का प्रावधान है। वहीं, पंचायती राज (संशोधन) विधेयक-2021 में 'ग्राम सेवक' का पद बदलकर ग्राम विकास अधिकारी कर दिया गया है। धारीवाल ने सदन को बताया कि अधिनियम में वर्णित 'ग्राम सेविका' का पद पंचायती राज संस्थाओं में नहीं है। इसलिए संशोधन विधेयक में इस प्रावधान को भी हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती में महिलाओं के लिए आरक्षण रहेगा। 

इसके अलावा सदन ने राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन) विधेयक-2021 और राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक-2020 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। बिल पास होने के बाद स्पीकर ने शाम करीब 6.25 बजे सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सदन में लगातार हो रहे हंगामे और संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल से टकराव के चलते अचानक से सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था।  हालांकि, उन्होंने शुक्रवार से सत्र को वापस बुला लिया और गुरुवार को अधिसूचना जारी कर दी गई।
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हैरानी: जलकुंभी में 32 घंटे फंसा रहा बुजुर्ग, अंतिम संस्कार की तैयारी थी शुरू, लेकिन बाहर आते ही खोल दीं आंखें

राजस्थान के बांसवाड़ा में एक अधेड़ जलकुंभी में ऐसा फंसा कि वह 32 घंटे तक पानी में ही रह गया। यहां सिविल डिफेंस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बुजुर्ग को जिंदा बाहर निकाला। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, काली मिट्टी वाले दलदल में अधेड़ जलकुंभी से बुरी तरह उलझा हुआ था। जलकुंभी के बीच वह गर्दन तक पानी में डूबा हुआ था। घटना के बाद अधेड़ को हार्ट अटैक भी आया। उसका महात्मा गांधी राजकीय चिकित्सालय में इलाज चल रहा है। सदर थाना प्रभारी पूनाराम गुर्जर ने बताया कि खांडा डेरा निवासी नानू मंगलवार सुबह 6 बजे घर से मछली पकड़ने के लिए निकला था। जो गलती से गहरे दलदली हिस्से में जलकुंभी के बीच फंस गया था। सिविल डिफेंस की मदद से आदिवासी नानू को बाहर निकाला गया। 


गमछे और चप्पलों से  हुई पहचान
मंगलवार सुबह घर से निकला नानू रात तक घर नहीं लौटा। परिजनों ने रात को आसापस में ढूंढा लेकिन कोई पता नहीं चला, पिरजनों ने नजदीकी रिश्तेदारों के यहां भी पता किया। कोई संपर्क नहीं हुआ तो दूसरे दिन सुबह जल्दी तलाश की। बुधवार सुबह करीब 8 बजे परिजन ने बेक वाटर के करीब उसका गमछा और चप्पलें देखी। इससे उन्हें नानू के आस-पास ही होने का अंदेशा हुआ। कई घंटों की तलाश के बाद दलदल के बीच नानू की हलचल दिखी तो घरवालों ने उसे आवाज दी। उसने घरवालों की आवाज सुनकर एक-दो बार पानी से बाहर हाथ निकालने की कोशिश भी की। बाद में पुलिस के माध्यम से पहुंची सिविल डिफेंस की टीम ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद जलकुंभी के दलदल के बीच से नानू को निकाल लिया।


कड़ी मशक्कत के बाद नानू बाहर निकला
परिवार वालों ने मान लिया था कि नानू की मौत हो चुकी है। सभी इधर उधर नानू को ढूंढे लेकिन नानू कही नहीं मिले। परिवार के कुछ लोगों ने तो अंतिम संस्कार की तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन इसी वक्त खबर आई कि नानू पास के तालाब में जलकुंभी में फंसा है। पुलिस और बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद नानू को वहां से बाहर निकाला। पानी से बाहर निकलते ही नानू को दिल का दौरा पड़ गया। अस्पताल में भर्ती कराया गया , जहां करीब 9 घंटे तक नानू को होश नहीं आया। 
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कार्रवाई: फर्जी पुलिस इंस्पेक्टर बनकर ठगने वाला युवक गिरफ्तार, 15 लाख रुपये का किराना सामान लेने के चक्कर में फंस गया आरोपी

जयपुर में झोटवाड़ा थाना पुलिस ने फर्जी पुलिस इंस्पेक्टर बनकर शातिर ठग को गिरफ्तार किया है। एक व्यापारी की सूझबूझ से फर्जी पुलिस बनकर ठगी करने वाले युवक को पकड़ा गया है। एक किराना कारोबारी पर रौब झाड़ने के लिए शातिर ठग पुलिस इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर डिपार्टमेंटल दुकान पर चला गया। वहां अपनी फर्जी आईडी और पुलिस लाइन के लैटरपेड पर पुलिस कमिश्नर और एसपी के नाम से मुहर लगी सामान की लिस्ट भी थमा दी।

संदेह होने पर व्यवसायी ने अपने परिचित पुलिस वालों से बातचीत की तब ठगी का खुलासा हुआ। आरोपी के पास से आईएएस और आईपीएस की 14 मुहर भी बरामद की गई है। पुलिस इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले युवक पर कई राज्यों में मुकदमा दर्ज है। 

फर्जी कागजात बना कर ठगी करता था आरोपी
डीसीपी (पश्चिम) ऋचा तोमर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी  राहुल शेखावत उर्फ  कालुराम  श्रीगंगानगर जिले के एसकेएम, पुलिस थाना रावला का निवासी है। राहुल शेखावत के कब्जे से पुलिस की चार वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड (एसीबी इंस्पेक्टर राजस्थान, पुलिस इंस्पेक्टर, आबकारी इंस्पेक्टर) बरामद हुई है। इसके अलावा 11 पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की 14 सील मोहर जब्त की गई है। पुछताछ में पुलिस ने बताया कि राहुल लोगों को भर्ती के नाम पर फर्जी कागजात बना कर ठगी करने में इसी मोहर को इस्तेमाल करता था। इसके अलावा तीन मोबाइल फोन व दो लग्जरी कार भी बरामद हुई है।

पकड़े जाने पर पुलिस पर झाड़ने लगा रौब
झोटवाड़ा थाना प्रभारी घनश्याम सिंह ने बताया कि किराना व्यापारी मनीष रावत ने रविवार को केस दर्ज करवाया था। बताया था कि वह इंस्पेक्टर 17 अक्तूबर को ही माल की डिलीवरी लेने आएगा। पुलिस की स्पेशल टीम राहुल शेखावत को गिरफ्तार करने के लिए पहले ही दुकान पर पहुंच गई। जैसे राहुल शेखावत पुलिस की वर्दी पहनकर डिपार्टमेंटल स्टोर पर सामान की डिलीवरी लेने पहुंचा। तभी कॉन्स्टेबल बलराम व मालीराम ने राहुल को पकड़ लिया। उसने दोनों पुलिसकर्मियों पर रौब झाड़ते हुए कहा कि वह एसीबी में पुलिस इंस्पेक्टर है। शातिर ठग ने धमकाते हुए यह भी कहा कि तुम मुझे जानते नहीं हो। हालांकि, दोनों पुलिस अधिकारी उसे झोटवाड़ा थाने ले गए। सोमवार को उसे कोर्ट में पेशकर रिमांड लिया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। 
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पीली टीशर्ट में आरोपी पीली टीशर्ट में आरोपी

बिहार: राजद विधायक का गुस्से वाला ऑडियो वायरल, गैंगरेप की जानकारी मांगने पर युवक पर निकाली भड़ास, बोले-मैं आपका एमएलए नहीं

औरंगाबाद जिले के मदनपुर गैंगरेप मामले में रफीगंज विधानसभा के विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन का गुस्से वाला आॉडियो सामने आया है। गैंगरेप मामले की जानकारी देने को लेकर एक शख्स ने विधायक को कॉल किया। इस पर विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन भड़क गए। उन्होंने कहा कि गैंगरेप मामले से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही फोन करने वाले को कहा कि आपके विधायक भी हम नहीं हैं।

उपचुनाव में व्यस्त हैं विधायक
ऑडियो में रफीगंज के विधायक कह रहे हैं कि गैंगरेप मामले से कुछ लेना-देना नहीं है। उन्होंने फोन करने वाले को कहा कि ऐसा हुआ है तो एसपी-डीएम पास जाओ। हमें फोन करने की जरूरत नहीं है। हम आपके विधायक नहीं हैं। उन्होंने यह भी धमकी दी कि आप पूछने वाले कौन होते हैं। जब, फोन करने वाले शख्स ने कहा कि आप हमारे विधायक हैं। लेकिन, घूम रहे हैं तारापुर में। तारापुर उपचुनाव में प्रचार में जा रहे हैं। इस पर भी विधायक भड़क गए।

युवक के सवाल पर भड़क गए मोहम्मद नेहालुद्दीन
आॉडियो की पुष्टि करने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने रफीगंज विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन से बातचीत की। उन्होंने फोन आने की बात स्वीकार की। कहा कि कुछ लड़के उनके साथ बदतमीजी कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि तारापुर विधानसभा उपचुनाव मे व्यस्त होने की वजह से मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। लड़कों की ओर से बदतमीजी करने पर गुस्सा आ गया। वहीं, रफीगंज में आकर पीड़िता से मिलने के सवाल पर विधायक मो. नेहालुद्दीन ने कहा कि तारापुर विधानसभा उपचुनाव खत्म होने के बाद ही आ पाएंगे, अभी किसी भी हालत में नही आ सकते।

क्या है मामला
 16 अक्तूबर को 20 साल की छात्रा (बीए फाइनल) पास ही रहने वाली सहेली के घर जा रही थी, तभी राहुल कुमार नाम के युवक ने उसे अगवा कर लिया। वह उसे कार से सुनसान जगह पर ले जाकर तीन दोस्तों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जहां उसने और उसके दो साथियों अविनाश कुमार राम और पंकज राम ने गैंगरेप किया। इसके बाद छात्रा को झाड़ी में फेंककर फरार हो गए। पेट्रोलिंग पर निकली पुलिस ने लड़की के कराहने की आवाज सुनी तो उसे सदर अस्पताल ले गई थी।

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राजस्थान: ट्रांसजेंडर्स की माली स्थिति दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने उठाया बड़ा कदम, ऐसे लागू होगी योजना , जानें पूरा मामला?

 ट्रांसजेंडर्स के समावेशी विकास के लिए राजस्थान सरकार ने अलग योजना बनाई है। इसके तहत ट्रांसजेंडर्स को पढ़ाई से लेकर कारोबार करने की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। गहलोत सरकार ने  ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए पूरी पढ़ाई मुफ्त में कराने का फैसला किया है। राज्य सरकार सरकारी खर्चे पर ड्रांसजेंडर्स को स्किल डेवलपमेंट के जरिए  सशक्त करने में भी जुटी है। गहलोत सरकार ने ट्रांसजेंडर्स उत्थान कोष के नाम से योजना के नियम जारी कर इसे लागू कर दिया है। सीएम ने इस साल के बजट में इस योजना की घोषणा की थी।

 छात्रवृत्ति लेने वाले छात्रों का खर्च भी उठाएगी सरकार
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया गया है। योजना को कई चरणों में चलाया जा रहा है। पहला फेज ट्रांसजेडर बच्चों के लिए है ट्रांसजेंडर बच्चों की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। तकनीकी और प्रोफेशनल पढ़ाई के लिए पूरी फीस सरकार भरेगी।। योजना का फायदा उन्हें ही मिलेगा, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये से कम हैं। ट्रासंजेंडर बच्चों को हर महीने प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप में 225 रुपये और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के 1000 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा स्कॉलरशिप ले रहे ट्रांसजेंडर्स बच्चे अगर घर से बाहर पढ़ाई करेंगे तो उनके मकान किराए का पैसा भी सरकार देगी। इसके लिए 72 हजार रुपये तक देने का प्रावधान किया गया है।

कारोबार के लिए कर्ज लेने पर 25 फीसदी सब्सिडी
ट्रांसजेंडर्स को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग मुफ्त में करवाई जाएगी। स्किल डेवलपमेंट की पूरी फीस का भुगतान सरकार करेगी। इसके बाद खुद कारोबार शुरू करने के लिए सरकार उसकी लागत की 25 फीसदी सब्सिडी देगी। 

सर्जरी के लिए 2.5 लाख की सहायता
ट्रांसजेंडर्स को लिंग चेंज सर्जरी करवाने पर भी सरकार मदद करने की घोषणा की है। सर्जरी के लिए 2.5 लाख रुपये तक की लागत सरकार उठाएगी। यह लाभ मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत उन्हें प्रदान किया जाएगा। 

 20 नवंबर को ट्रांसजेंडर्स दिवस मनाएगी सरकार
20 नवंबर को सरकार प्रदेश भर में ट्रांसजेंडर्स दिवस मनाने का फैसला किया है। प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक किन्नर महोत्सव और किन्नर आर्ट एंड कल्चर फेस्टिवल आयोजित कराए जाएंगे। राज्य स्तर के कार्यकम के लिए सरकार 10 लाख रुपये और जिला स्तर के कार्यक्रम के लिए 1 लाख रुपये देगी।
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अजीबो गरीब बयान: जिस स्कूल में महिला शिक्षक अधिक होंगी, वहां झगड़े-लड़ाई भी ज्यादा होंगे, सुर्खियों में शिक्षा मंत्री के बोल

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक बयान इन दिनों अचानक से सुर्खियों में है। उन्होंने एक कार्यक्रम में बयान दिया कि जिस स्कूल में महिला शिक्षक अधिक होती हैं वहां, झगड़े भी ज्यादा होते हैं।  अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे कि  सरकार ने हर जगह महिलाओं को प्राथमिकता दी हुई है और महिलाएं थोड़े और प्रयास से बहुत आगे आ सकती हैं। डोटासार ने कहा, 'हमारे पास कई लोग आते हैं, कहते हैं कि शहर के पास हमारी ड्यूटी लगा दीजिए। हम लोगों से कहते हैं जगह नहीं है। फिर वे लोग कहते हैं कि जगह कैसे होगी सारी महिला शिक्षकों को शहर के नजदीक लगा दिया गया है। 


शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि महिलाओं के लिए सरकार ने कई नई नीति बनाई है। सिलेक्शन, प्रमोशन में महिलाओं को प्राथमिकता दी है।  कई लोगों को यह अच्छा नहीं लगता। वे पूछते हैं कि क्या हम लोग अच्छा नहीं पढ़ाते हैं? , लेकिन एक बात मैं आप लोगों से कहना चाहूंगा। आप (महिला टीचर्स) लोगों के आपस में झगड़े लड़ाी भी बहुत होते हैं, जिस स्कूल में महिला स्टाफ ज्यादा हो जाए वहां वारे न्यारे हो जाएंगे।
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योगदान: इस राज्य से आया राम मंदिर के लिए सबसे ज्यादा चंदा, केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

गोविंद सिंह डोटासरा
राम मंदिर निर्माण में सबसे ज्यादा आर्थिक सहयोग राजस्थान ने किया है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने ये जानकारी दी है। अहमदाबाद में राजस्थान-गुजरात मैत्री संघ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैलाश चौधरी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए अभी तक आए चंदों में से सबसे ज्यादा राशि राजस्थान से आई है। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी समाज समाजिक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वाला समाज है। मंदिर बनाने के लिए इस समाज ने बहुत बड़ा योगदान दिया है। 

मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते तो अर्थव्यवस्था ठप हो जाती- कैलाश चौधरी
इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कोरोना काल को लेकर भी लोगों से चर्चा की। संतोष चौधरी ने कहा कि कोरोनाकाल के दौरान नरेंद्र मोदी के अलावा अगर कोई दूसरा प्रधानमंत्री होता तो देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती। केंद्रीय मंत्री चौधरी ने कहा कि पीएम मोदी ने मार्च 2020 में लॉकडाउन लागू कर अच्छा फैसला किया। नहीं तो कोरोना से कितने लोगों की मौत होती यह कह पानी मुश्किल होता। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में केंद्र सरकार ने महामारी से निपटने के लिए आवश्यक सैनिटाइटर और अस्पतालों में बेड,ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए भरपूर मदद की। 


कृषि वैज्ञानिकों से भी मिले कैलाश चौधरी
कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी गुजरात प्रवास के दौरान आंणद कृषि विश्वविद्यालय के निरीक्षण करने भी पहुंचे।  इस दौरान उन्होंने विवि परिसर में लगाए गए फल, सब्जियों एवं औषधीय पदार्थों की विभिन्न प्रकार की किस्मों और उन्नत तकनीक का अवलोकन किया। इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों से कृषि व किसान कल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद किया। 
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राजस्थान: 'काले हीरे' से बिजली की चमक पड़ी फीकी, शहरों में छह से सात घंटों तक कटौती, सीएम बोले- एसी कम चलाएं अधिकारी

राजस्थान में बिजली संकट गहराता जा रहा है। सरकार का बिजली उत्पादन से लेकर खरीद और वितरण प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है। बिजली उत्पादन के लिए कोयले की खरीदारी समय पर नहीं होने से उत्पादन पर असर पड़ने लगा है।  प्रदेश के कई जिलों में घोषित और अघोषित बिजली कटौती शुरू हो गई है। बिजली संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जागरूकता फैलाने की अपील की है। साथ ही अधिकारियों से एयर कंडिशनर (एसी) कम चलाने का आग्रह किया है। ।

राज्य सरकार ने खुद भी माना है कि प्रदेश में बिजली संकट बढ़ा है। हालात ये हैं कि राजधानी में ही शुक्रवार को करीब 200 कॉलोनी और बस्तियों में 4 से 7 घंटे तक बिजली सप्लाई नहीं आने की घोषणा की जा चुकी है।  राजस्थान में 35 डिग्री से ऊपर के तापमान के बीच लोगों को गर्मी में रहना पड़ रहा है। जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 2 से 5 घंटे की बिजली कटौती की जा रही है। जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र के अंतर्गत कई जिलों में कंपनी की ओर से बिजली कटौती लागू की गई है।

सीएम ने जरूरत के हिसाब से बिजली खर्च करने की अपील की
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह लोगों को बिजली बचाने के लिए जागरूक करें। इसके साथ ही सरकारी अधिकारियों को भी कहा है कि वह एसी कम चलाएं और बिजली की बचत करें। सरकारी विभागों में भी जरूरत के समय ही बिजली खर्च की जाए, बाकी समय उपकरणों को बंद रखा जाए। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर ध्यान रखकर बिजली को बचया जा सकता है। 
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सियासी कलह : पंजाब सीएम का मंगलवार को जयपुर दौरा, चन्नी मुख्यमंत्री गहलोत से लेंगे सियासी संकट दूर करने के टिप्स

पंजाब कांग्रेस में सियासी हलचल के बीच अब राजस्थान कांग्रेस कूद पड़ी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पंजाब में जारी सियासी विवाद को खत्म करने के लिए आगे आए हैं। गहलोत मुख्यमंत्री चन्नी को कलह शांत करने का मंत्र देंगे। इस सिलसिले में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी मंगलवार को जयपुर पहुंच रहे हैं।  चन्नी के सम्मान में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भोज का कार्यक्रम रखा है। इस भोज में गहलोत कैबिनेट के सभी मंत्री और प्रमुख कांग्रेस नेताओं को बुलाया है।

पंजाब में सियासी संकट पर अब तक सीएम गहलोत केवल सोशल मीडिया पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को अनुभवी नेता बताते हुए पार्टी के खिलाफ कोई ऐसा कदम नहीं उठाने की अपील थी। गहलोत ने कहा था कि कैप्टन अमरिंदर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और वह कोई भी फैसला ऐसा नहीं लेंगे जिससे पार्टी को नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा गहलोत ने कोई बयान नहीं दिया था। अब चन्नी को बड़ा भोज देकर एक तरह से पंजाब कांग्रेस विवाद को सुलझाने के लिए गहलोत की भी एंट्री हो गई है।

चन्नी का जयपुर दौरा काफी अहम
गहलोत कैबिनेट में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी अब भी चंडीगढ़ में कैंप करके पंजाब कांग्रेस विवाद पर हाईकमान के साथ कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। चन्नी के जयपुर दौरे को कांग्रेस की सियासत के हिसाब से काफी अहम माना जा रहा है।

सियासी कलह दूर करने के लिए गहलोत देंगे चन्नी को टिप्स
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है। चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हुए हैं। ऐसे में अशोक गहलोत के साथ चन्नी मौजूदा राजनीतिक मसलों पर चर्चा करेंगे। पंजाब में नवजोत सिद्धू के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस में कलह जारी है।

चन्नी को हाईकमान ने चुनाव से ठीक पहले सीएम बनाया है। ऐसे में सरकार को तेज गति से फैसले लेने के साथ पार्टी को भी साध कर चुनावी मोड में लाना चन्नी के सामने बड़ी चुनौती है। चरणजीत सिंह चन्नी के सामने कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई नाराज नेताओं को भी संभालकर रखने की चुनौती है। ऐसे में चन्नी का जयपुर दौरा कांग्रेस और चन्नी के लिए बेहद अहम है। 
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राजस्थान: REET दोबारा कराने की मांग को सीएम ने किया खारिज, बोले- जहां पेपर लीक हुआ वहां पर होगी फिर से परीक्षा

राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (REET) दोबारा नहीं कराई जाएगी। इस परीक्षा का पेपर लीक हुआ था ना कि वायरल हुआ था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि परीक्षा को लेकर अगर कोई शिकायत मिलेगी तो सच्चाई का पता लगाया जाएगा। गड़बड़ी की पुष्टि होने पर उस सेंटर पर फिर से परीक्षा कराई जाएगी। इसकी आड़ में लाखों लोगों को फिर से परीक्षा के लिए बुलाना कहां कि समझदारी है। यह समझ से परे है। गहलोत ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे नकल हो या पेपर लीक। पूरी परीक्षा फिर से कराना संभव नहीं है। 

पिछले दिनों REET-2021 परीक्षा में नकल मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG)के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें सवाई माधोपुर में तैनात कॉन्स्टेबल दिगम्बर, उसका भाई व एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। 

समाज में कुछ लोग युवाओं को भ्रमित कर रहे- सीएम 
गहलोत ने एक साक्षात्कार में कहा-राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा में राजस्थान के लोगों ने इतिहास रचा है। अभी भी हमने कहा है कि चाहे भाजपा का राज हो या कांग्रेस का। पेपर आउट होने की खबरें आती रहती हैं। हमने इस बार काफी कड़ाई बरती है। सरकारी अधिकारी-कर्मचारी के लिप्त पाए जाने पर उसे नौकरी से बर्खास्त करने की बात पहले ही बता दी थी। जिन सेंटर पर नकल करते हुए पाया गया, ऐसे स्कूलों की मान्यता समाप्त करने और कार्रवाई करने की बात कह दी थी।

33 हजार युवाओं को लगेगी नौकरी
15-17 लाख नौजवान छात्र परीक्षा में बैठे थे। फ्री खाना और ठहरने की व्यवस्था कराई गई थी। ये हमारे विपक्ष के साथियों को पच नहीं रहा है। REET देने आए नौजवान लोगों ने सरकार,समाजसेवियों, एक्टिविस्टों के जिन्दाबाद के नारे लगाए। विपक्ष से यह हजम नहीं हो रहा। इसलिए समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि 33 हजार युवाओं की इस परीक्षा से नौकरी लगने वाली है। यह संख्या अपने आप में बड़ी है। विपक्ष ऐसे लोगों को भड़का रहा है, जिनकी नौकरी ही नहीं होने वाली। ऐसे लोगों को भ्रमित करना काफी आसान होता है। गहलोत ने कहा कि आज-कल पेपर ओमएमआर शीट से आते हैं। उसी वक्त बच्चों को मालूम पड़ जाता है कि मैं पास होऊंगा या फेल। ऐसे लोगों को भाजपा टारगेट कर भड़काने की कोशिश में लगी रहती है। 
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राजस्थान : श्रीगंगानगर में धरने पर बैठे किसानों से पीएचईडी मंत्री ने की मुलाकात, मांगों पर विचार करने का दिया आश्वासन

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में करीब 250 किसानों ने इंदिरा गांधी नहर से सिंचाई का पानी छोड़ने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी है। बीते शनिवार को घड़साना में सैकड़ों किसानों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर जमा होकर परिसर का घेराव किया। उन्होंने कार्यालय में प्रवेश को अवरुद्ध कर दिया जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि वहां तैनात कुछ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को किसानों ने कुछ देर के लिए कार्यालय के अंदर बंद कर दिया। श्रीगंगानगर के कलेक्टर जाकिर हुसैन ने कहा, स्थिति शांतिपूर्ण है और लगभग 250 किसान इस समय घड़साना में धरने पर बैठे हैं और नहर से सिंचाई के पानी की मांग कर रहे हैं।

वहीं रविवार को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान सरकार के जलसंसाधन मंत्री बीडी कल्ला से मुलाकात की। जिसके बाद मंत्री ने किसानों की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है। कलेक्टर ने कहा, बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत ने कहा कि एसडीएम कार्यालय के अंदर और बाहर पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजस्थान सशस्त्र बल (आरएसी) की एक बटालियन को भी तैनात किया गया है।

किसानों की नहीं सुनी जा रही थी बातें
कई दिन से किसान खेतों में सिंचाई के लिए पानी दिए जाने की ठोस मांग करने का अनुरोध कर रहे थे। किसानों ने कई बार इस बाबत प्रशासन को घेराव और बंधक बनाने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन सरकार पर असर नहीं हो रहा था। शनिवार को किसानों का धर्य टूटने लगा और उन्होंने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर डीएसपी समेत कई पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को कब्जे में लेकर एक कमरे में बंद कर दिया। हालांकि, कलेक्टर और एसपी के दखल के बाद कब्जे में लिए गए अधिकारियों को रिहा किया गया। 

2004 में किसानों का हुआ था उग्र आंदोलन
घड़साना में वर्ष 2004 में भी सिंचाई पानी के लिए उग्र आंदोलन हुआ था। उस वक्त भी किसानों ने सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने पर प्रदर्शन किया था। कई दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद प्रशासन को पानी की व्यवस्था करना पड़ा था। एक बार फिर से किसानों के इस प्रदर्शन को देखते हुए सरकारी अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।  

पुलिस और किसानों के बीच धक्का मुक्की
शुक्रवार को जिला कलेक्टर और एसपी ने भी घड़साना के किसान नेताओं से बात कर उनसे शांति बनाए रखने की अपील की थी,  लेकिन शाम होते-होते यह बेअसर हो गई। किसान नेताओं ने कलेक्टर और एसपी को किसानों की ओर से टकराव की पहल नहीं करने का विश्वास दिलाया था , लेकिन शाम को किसान पुलिसकर्मियों से उलझ गए और धक्का मुक्की की नौबत आ गई ।

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सियासी संकट: पंजाब के बाद अब राजस्थान में उथल-पुथल का दौर शुरू, बसपा से कांग्रेस में आए चार विधायक भाजपा का थामेंगे दामन

पंजाब के ताजा घटनाक्रम का राजस्थान में भी असर दिखने लगा है।  राजस्थान का सियासी पारा अचानक से बढ़ गया है। बहुजन समाज पार्टी से कांग्रेस में शामिल हुए छह विधायक में से चार विधायक बगावत के मूड में हैं। ये विधायक दिल्ली में डारे डाले हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, विधायक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं और बात बनती है तो ये कांग्रेस से भाजपा में शामिल भी हो सकते हैं। 

बता दें कि बीएसपी से छह विधायकों को सीएम अशोक गहलोत ने कांग्रेस में काफी पहले ही शामिल कराया था। कहा जा रहा है कि इन विधायकों को तब मंत्रीपद का भरोसा दिया गया था, लेकिन मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से चार विधायक नाराज चल रहे हैं और वह भाजपा में जाने का मूड बनाए हुए हैं।

दलबदल कानून के तहत विधायकों पर लटकी तलवार
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल कानून के तहत पार्टी बदलने के लिए रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों छह विधायकों से रिपोर्ट पेश करने को आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विधायकों को अपनी सदस्यता खत्म होने का डर भी सताने लगा है। 
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