Rajasthan News: नागौर की ग्राम पंचायत चाऊ में लाखों का मनरेगा घोटाला, बीडीओ-सरपंच समेत पांच पर मुकदमा दर्ज
Nagaur News: ग्राम पंचायत चाऊ में मनरेगा योजना के तहत 1.55 लाख रुपये से अधिक के वित्तीय घोटाले का मामला उजागर हुआ है। इसमें बीडीओ-सरपंच समेत पांच लोगों पर जालसाजी और सरकारी धन के गबन का आरोप लगा है, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
विस्तार
नागौर के श्री बालाजी थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत चाऊ में मनरेगा योजना के तहत 1.55 लाख रुपये से अधिक के वित्तीय घोटाले का मामला उजागर हुआ है। इसमें तत्कालीन ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ), ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), सहायक अभियंता, तकनीकी सहायक और सरपंच सहित पांच लोगों पर जालसाजी और सरकारी धन के गबन का आरोप लगा है। यह कार्रवाई झोरड़ा निवासी रामूराम मेघवाल की शिकायत के आधार पर शुरू हुई, जिन्होंने अपनी जमीन पर स्वीकृत कार्यों में फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
शिकायत से खुला घोटाला
रामूराम का कहना है कि उनकी जमीन पर निजी टांका, कैटलशेड और भूमि सुधार कार्य के लिए 31 मार्च 2023 को 1.50 लाख रुपये की स्वीकृति जारी हुई थी। ग्राम पंचायत चाऊ के जिम्मे यह कार्य सौंपा गया और सामग्री आपूर्ति पदम कंस्ट्रक्शन कंपनी, सुराणा द्वारा की जानी थी। आरोप है कि जमीन पर कोई कार्य नहीं हुआ, लेकिन तत्कालीन बीडीओ रामदेव जांगीड़, सहायक अभियंता रामलाल सुथार, तकनीकी सहायक अनिल स्वामी, ग्राम विकास अधिकारी दीपक बिट्टू और सरपंच सुरेश चारण ने मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर 1,55,976 रुपये का भुगतान निकाल लिया।
जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा
शिकायत के बाद जिला परिषद सीईओ ने एईएन दिनेश और सहायक लेखाधिकारी कमल गोदारा की जांच कमेटी गठित की। जांच में पाया गया कि न तो टांका बना, न कैटलशेड और न ही कोई भूमि सुधार कार्य हुआ। साथ ही, यह भी सामने आया कि सामुदायिक भवन का निर्माण प्रतिबंधित गोचर भूमि पर किया गया। जांच कमेटी ने कार्यकारी संस्था को दोषी ठहराते हुए खर्च की गई राशि की वसूली की अनुशंसा की।
सरकार ने बनाई राज्य स्तरीय जांच दल
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने राज्य स्तरीय जांच दल गठित किया है, जिसे 15 दिनों में जांच पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई का प्रस्ताव देने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, संभागीय आयुक्त ने सरपंच सुरेश चारण को 10 नोटिस जारी किए, लेकिन अनुपस्थिति के कारण एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
रामूराम की ओर से थाने में दी गई शिकायत पर शुरुआत में पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नागौर के आदेश पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस घोटाले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार आरोपियों से पूछताछ जल्द शुरू हो सकती है।
योजनाओं की पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस प्रकरण ने मनरेगा जैसी गरीबों के लिए बनी योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता रामूराम का कहना है कि यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि सरकारी कोष का दुरुपयोग भी है, जिसे गरीबों के कल्याण के लिए आवंटित किया गया था।
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