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राजस्थान में डेढ़ करोड़ का मायरा: नागौर के भाइयों ने बहन पर लुटाया बेशुमार प्यार, हर तरफ हो रही चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 04:55 PM IST
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सार
नागौर के श्यामसर गांव में चार भाइयों ने अपनी बहन के लिए 1.51 करोड़ रुपये का मायरा भरकर अनोखी मिसाल पेश की है। नगद, जमीन, सोना-चांदी से सजे इस मायरे ने पूरे राजस्थान में भाई-बहन के प्रेम की मिसाल कायम कर दी है।
नागौर के भाईयों ने बहन को दिया डेढ़ करोड़ का मायरा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
नागौर जिले के एक छोटे से गांव श्यामसर ने पूरे राजस्थान को चौंका दिया है। यहां भाई-बहन के रिश्ते ने वो मिसाल कायम की है, जिसकी चर्चा आज मारवाड़ की हर गली में हो रही है। चार सगे भाइयों ने अपनी बहन के लिए जो किया, वो सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से उठी भावनाओं का वो सैलाब था, जिसने परंपरा को नई ऊंचाई दे दी।
चर्चाओं में डेढ़ करोड़ का मायरा
श्यामसर निवासी सुरजाराम सियाग की सुपुत्री रामी देवी के घर शादी की खुशियां थीं। इस शुभ अवसर पर मायरे की रस्म के दौरान उनके चारों भाइयों- गंगाराम, शिवलाल, खीयाराम और श्रवणराम ने मिलकर बहन पर जो प्यार लुटाया, वो देखने वालों की आंखें नम कर गया।
चारों भाई का निश्चल प्रेम झलका
गांव के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इतना भव्य मायरा इससे पहले कभी नहीं देखा गया। लेकिन इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबसूरती यह नहीं कि इसमें करोड़ों रुपये खर्च हुए बल्कि यह है कि इसमें चारों भाइयों का वो निश्छल प्रेम झलका, जो आज के दौर में दुर्लभ होता जा रहा है। जब मायरे की रस्म हुई, तो वहां मौजूद हर आंख भर आई। भाइयों का यह कदम केवल आर्थिक संपन्नता का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश था कि बहन की खुशी से बढ़कर कोई निवेश नहीं।
पूरे राजस्थान में चर्चा
श्यामसर के इस मायरे की खबर जंगल की आग की तरह फैली। आस-पास के गांवों के लोग इस आयोजन को अपनी आंखों से देखने पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे "राजस्थानी संस्कृति का सुनहरा पन्ना" बता रहे हैं।
ये भी पढ़ें- राजस्थान के संस्कृत स्कूलों में गणित के 98% पद खाली, फिर भी रिजल्ट 99%
आज भी जिंदा है परंपरा
राजस्थान में मायरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि यह भाई की ओर से बहन को दिया गया वो सम्मान है, जो जिंदगीभर याद रहता है। श्यामसर के इन चारों भाइयों ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता की आंधी में भी परंपराओं की जड़ें मजबूत हैं, जरूरत है तो बस उन्हें सींचने की इच्छाशक्ति की।
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श्यामसर निवासी सुरजाराम सियाग की सुपुत्री रामी देवी के घर शादी की खुशियां थीं। इस शुभ अवसर पर मायरे की रस्म के दौरान उनके चारों भाइयों- गंगाराम, शिवलाल, खीयाराम और श्रवणराम ने मिलकर बहन पर जो प्यार लुटाया, वो देखने वालों की आंखें नम कर गया।
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चारों भाई का निश्चल प्रेम झलका
गांव के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इतना भव्य मायरा इससे पहले कभी नहीं देखा गया। लेकिन इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबसूरती यह नहीं कि इसमें करोड़ों रुपये खर्च हुए बल्कि यह है कि इसमें चारों भाइयों का वो निश्छल प्रेम झलका, जो आज के दौर में दुर्लभ होता जा रहा है। जब मायरे की रस्म हुई, तो वहां मौजूद हर आंख भर आई। भाइयों का यह कदम केवल आर्थिक संपन्नता का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश था कि बहन की खुशी से बढ़कर कोई निवेश नहीं।
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श्यामसर के इस मायरे की खबर जंगल की आग की तरह फैली। आस-पास के गांवों के लोग इस आयोजन को अपनी आंखों से देखने पहुंचे। सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे "राजस्थानी संस्कृति का सुनहरा पन्ना" बता रहे हैं।
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