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Nagaur News: आस्था, इतिहास और चमत्कारों का संगम लिकासन माता मंदिर, सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने भी नवाया था शीश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Sep 2025 02:34 PM IST
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सार
लिकासन गांव स्थित लिकासन माता मंदिर सिर्फ आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि इतिहास और चमत्कारों का अनूठा संगम है। यहां घटित चमत्कारों के चलते यह भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
लिकासन माता मंदिर, डीडवाना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डीडवाना क्षेत्र के लिकासन गांव में स्थित लिकासन माता मंदिर आस्था, इतिहास और चमत्कारों का अद्भुत संगम माना जाता है। नाथ संप्रदाय के संत पागलनाथ द्वारा स्थापित यह मंदिर अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर चोरी के मामलों में निर्दोषों की रक्षा करने की मान्यता के कारण। कोलकाता के काली मंदिर से लाई गई ज्योत और काली माता के दुर्गा स्वरूप की प्रतिमा के साथ यह धाम भक्तों के लिए आध्यात्मिक शरणस्थली बन गया है। सम्राट पृथ्वीराज चौहान और मुगल बादशाह औरंगजेब से जुड़ी कथाएं इसे ऐतिहासिक महत्व भी प्रदान करती हैं।
किंवदंती है कि प्राचीनकाल में संत पागलनाथ ने जोजड़ी नदी के तट पर कठोर तप किया। तप के दौरान कमंडल रखने की जगह न होने पर उन्होंने अपनी सिद्धि से एक सूखी टहनी को भूमि में रोप दिया, जो रातोंरात खेजड़ी के विशाल वृक्ष में बदल गई। इसी पर कमंडल टांगकर उन्होंने तप पूरा किया। बाद में वे कोलकाता के काली मंदिर से ज्योत लाए और यहां धूनी व मंदिर की स्थापना की। माना जाता है कि यहां कई चमत्कार हुए, जिनमें एक निसंतान सेठ को माता की कृपा से पांच पुत्रों की प्राप्ति शामिल है। प्रत्येक पुत्र के जन्म पर उसने मंदिर में एक दिव्य स्तंभ स्थापित कराया, जो आज भी मौजूद है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व तब बढ़ा जब सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने यहां शीश नवाया और संत पागलनाथ को गुरु मानकर 18,000 बीघा भूमि मंदिर को दान कर दी। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम लिकासन माता के नाम पर पड़ा और यहां आज भी नाथ संप्रदाय के अनुयायी रहते हैं।
ये भी पढ़ें: Sharadiya Navratri 2025: माता के नौ सिरों वाला नोसर माता मंदिर, नौ रूपों से साथ विराजमान हैं मां दुर्गा
मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर की मूर्तियों को खंडित कराया, विशेषकर देवी की नाक और कान को क्षतिग्रस्त किया। इसके बावजूद माता की शक्ति कम नहीं हुई। कथा है कि एक चोर ने चोरी का बैल मंदिर के स्तंभ से बांधा, जो चमत्कारिक रूप से गाय में बदल गया। इसके बाद चोर ने चोरी हमेशा के लिए छोड़ दी। इसी तरह एक बार रेलगाड़ी से सामान गायब होने पर एक कर्मचारी पर दर्ज होने वाला मामला अचानक टल गया, जिसे भक्त माता का चमत्कार मानते हैं।
आधुनिक काल में भी यहां चमत्कार की मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि एक उद्योगपति को रोग से मुक्ति तब मिली जब माता ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों और पुजारियों की सहमति से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
आज लिकासन माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि चमत्कारों और ऐतिहासिक महत्व की वजह से यह नागौर की पहचान भी बन चुका है। यहां आने वाले भक्त विश्वास करते हैं कि माता हर संकट से रक्षा करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
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किंवदंती है कि प्राचीनकाल में संत पागलनाथ ने जोजड़ी नदी के तट पर कठोर तप किया। तप के दौरान कमंडल रखने की जगह न होने पर उन्होंने अपनी सिद्धि से एक सूखी टहनी को भूमि में रोप दिया, जो रातोंरात खेजड़ी के विशाल वृक्ष में बदल गई। इसी पर कमंडल टांगकर उन्होंने तप पूरा किया। बाद में वे कोलकाता के काली मंदिर से ज्योत लाए और यहां धूनी व मंदिर की स्थापना की। माना जाता है कि यहां कई चमत्कार हुए, जिनमें एक निसंतान सेठ को माता की कृपा से पांच पुत्रों की प्राप्ति शामिल है। प्रत्येक पुत्र के जन्म पर उसने मंदिर में एक दिव्य स्तंभ स्थापित कराया, जो आज भी मौजूद है।
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मंदिर का ऐतिहासिक महत्व तब बढ़ा जब सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने यहां शीश नवाया और संत पागलनाथ को गुरु मानकर 18,000 बीघा भूमि मंदिर को दान कर दी। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम लिकासन माता के नाम पर पड़ा और यहां आज भी नाथ संप्रदाय के अनुयायी रहते हैं।
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आधुनिक काल में भी यहां चमत्कार की मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि एक उद्योगपति को रोग से मुक्ति तब मिली जब माता ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों और पुजारियों की सहमति से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
आज लिकासन माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि चमत्कारों और ऐतिहासिक महत्व की वजह से यह नागौर की पहचान भी बन चुका है। यहां आने वाले भक्त विश्वास करते हैं कि माता हर संकट से रक्षा करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।