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नागौर निकाय चुनाव में बदला सियासी गणित: 2.37 लाख मतदाता करेंगे फैसला; आरक्षण से कई दावेदारों को झटका
Thu, 13 Aug 2026 07:02 PM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 07:02 PM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच नागौर जिले में अध्यक्ष पदों की आरक्षण लॉटरी से स्थानीय राजनीति के समीकरण बदल गए हैं। जिले के 9 निकायों में 285 वार्ड और 2,37,916 मतदाता हैं।
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नागौर में बदला सियासी गणित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच नागौर जिले में अध्यक्ष पदों की आरक्षण लॉटरी ने स्थानीय राजनीति का पूरा गणित बदल दिया है। जिले के नगर परिषद और नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पदों के आरक्षण की स्थिति सामने आने के बाद कहीं पुराने दावेदारों की राह बंद हुई है तो कहीं नए चेहरों के लिए सियासी दरवाजे खुल गए हैं। खास बात यह है कि इन निकायों में कुल 2,37,916 मतदाता और 285 वार्ड हैं। यानी आने वाले निकाय चुनाव जिले की स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव तय कर सकते हैं।
60 वार्ड वाली नागौर नगर परिषद सबसे बड़ा मैदान
जिले की सबसे बड़ी नगरीय इकाई नागौर नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। यहां 85,162 मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। इनमें 43,722 पुरुष, 41,437 महिलाएं और 3 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। कुल 113 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस बार नागौर नगर परिषद का चेयरमैन पद OBC ओपन के लिए आरक्षित हुआ है। पिछली बार यह पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था और भाजपा का बोर्ड बना था, जिसकी चेयरमैन मीतू बोथरा थीं।
मेड़ता सिटी में महिला दावेदारों पर नजर
मेड़ता सिटी नगर पालिका में 40 वार्ड और 34,961 मतदाता हैं। इनमें 17,923 पुरुष और 17,038 महिला मतदाता हैं। कुल 42 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा। अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने से महिला दावेदारों की भूमिका अहम हो गई है। राजनीतिक दलों में अब महिला चेहरों की तलाश और टिकट को लेकर लॉबिंग तेज होने की संभावना है।
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बसनी में 30 हजार से ज्यादा मतदाता
बसनी निकाय में 40 वार्ड हैं। यहां कुल 30,260 मतदाता हैं, जिनमें 15,735 पुरुष और 14,525 महिला मतदाता शामिल हैं। कुल 40 मतदान केंद्र हैं। इतनी बड़ी मतदाता संख्या के कारण यहां भी अध्यक्ष पद का चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
जायल में OBC महिला के लिए आरक्षण
जायल नगर पालिका में 25 वार्ड हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 13.5 हजार मतदाता हैं। अध्यक्ष पद OBC महिला के लिए आरक्षित हुआ है। जायल के लिए यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले चुनाव में यह क्षेत्र ग्राम पंचायत व्यवस्था में था और अब नगर पालिका बनने के बाद पहली बार निकाय चुनाव की दिशा में बढ़ रहा है।
कुचेरा में सभी वर्गों के लिए खुला मुकाबला
कुचेरा नगर पालिका में 25 वार्ड और 17,467 मतदाता हैं। इनमें 9,092 पुरुष और 8,375 महिलाएं हैं। 25 मतदान केंद्रों पर वोटिंग होगी। अध्यक्ष पद अनारक्षित ओपन होने के कारण सभी वर्गों के उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे में दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
डेगाना में बदला आरक्षण का समीकरण
डेगाना नगर पालिका में 25 वार्ड और 16,257 मतदाता हैं। इनमें 8,268 पुरुष और 7,989 महिला मतदाता हैं। कुल 25 मतदान केंद्र हैं। पिछली बार SC वर्ग के लिए आरक्षित रही अध्यक्ष पद की सीट अब अनारक्षित हो गई है। इससे सभी वर्गों के संभावित दावेदारों के लिए रास्ता खुल गया है।
मेड़ता रोड में SC महिला को मौका
मेड़ता रोड नगर पालिका में 25 वार्ड और 15,251 मतदाता हैं। इनमें 7,796 पुरुष तथा 7,455 महिला मतदाता हैं। यहां 25 मतदान केंद्र हैं। अध्यक्ष पद SC महिला के लिए आरक्षित होने से अनुसूचित जाति वर्ग की महिला दावेदारों के लिए नेतृत्व का अवसर सामने आया है।
रियांबड़ी में पहली बार चुनी जाएगी स्थानीय सरकार
रियांबड़ी नगर पालिका में 20 वार्ड हैं और 10,620 मतदाता पहली बार नगर पालिका की स्थानीय सरकार चुनेंगे। इनमें 5,435 पुरुष और 5,185 महिला मतदाता हैं। कुल 20 मतदान केंद्र हैं। अध्यक्ष पद OBC के लिए आरक्षित है। ऐसे में यहां पहले अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक उत्सुकता बनी हुई है।
मुंडवा में 14,514 मतदाता करेंगे फैसला
मुंडवा निकाय में 25 वार्ड हैं। यहां कुल 14,514 मतदाता हैं, जिनमें 7,361 पुरुष और 7,153 महिला मतदाता हैं। कुल 25 मतदान केंद्र हैं। वार्ड स्तर पर मजबूत उम्मीदवार और स्थानीय पकड़ चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
यह भी पढ़ें: चाय कड़क नहीं बनी तो बरसाईं गोलियां, फायरिंग में घायल होटल कर्मचारी की एंबुलेंस पलटने से मौत
अब टिकट वितरण पर टिकी नजर
आरक्षण लॉटरी के बाद अब असली राजनीतिक खेल टिकट वितरण का होगा। जिन नेताओं की परंपरागत सीट आरक्षित हो गई है, वे अपने परिवार या समर्थक को मैदान में उतार सकते हैं। वहीं अनारक्षित सीटों वाले निकायों में पुराने राजनीतिक दिग्गज सीधे मुकाबले में लौट सकते हैं। कुल मिलाकर नागौर में चुनाव आरक्षण, जातीय समीकरण, महिला नेतृत्व, स्थानीय गुटबाजी और पार्टी संगठन के इर्द-गिर्द घूमता नजर आएगा।
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60 वार्ड वाली नागौर नगर परिषद सबसे बड़ा मैदान
जिले की सबसे बड़ी नगरीय इकाई नागौर नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। यहां 85,162 मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। इनमें 43,722 पुरुष, 41,437 महिलाएं और 3 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। कुल 113 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस बार नागौर नगर परिषद का चेयरमैन पद OBC ओपन के लिए आरक्षित हुआ है। पिछली बार यह पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था और भाजपा का बोर्ड बना था, जिसकी चेयरमैन मीतू बोथरा थीं।
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मेड़ता सिटी में महिला दावेदारों पर नजर
मेड़ता सिटी नगर पालिका में 40 वार्ड और 34,961 मतदाता हैं। इनमें 17,923 पुरुष और 17,038 महिला मतदाता हैं। कुल 42 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा। अध्यक्ष पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने से महिला दावेदारों की भूमिका अहम हो गई है। राजनीतिक दलों में अब महिला चेहरों की तलाश और टिकट को लेकर लॉबिंग तेज होने की संभावना है।
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बसनी में 30 हजार से ज्यादा मतदाता
बसनी निकाय में 40 वार्ड हैं। यहां कुल 30,260 मतदाता हैं, जिनमें 15,735 पुरुष और 14,525 महिला मतदाता शामिल हैं। कुल 40 मतदान केंद्र हैं। इतनी बड़ी मतदाता संख्या के कारण यहां भी अध्यक्ष पद का चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
जायल में OBC महिला के लिए आरक्षण
जायल नगर पालिका में 25 वार्ड हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 13.5 हजार मतदाता हैं। अध्यक्ष पद OBC महिला के लिए आरक्षित हुआ है। जायल के लिए यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले चुनाव में यह क्षेत्र ग्राम पंचायत व्यवस्था में था और अब नगर पालिका बनने के बाद पहली बार निकाय चुनाव की दिशा में बढ़ रहा है।
कुचेरा में सभी वर्गों के लिए खुला मुकाबला
कुचेरा नगर पालिका में 25 वार्ड और 17,467 मतदाता हैं। इनमें 9,092 पुरुष और 8,375 महिलाएं हैं। 25 मतदान केंद्रों पर वोटिंग होगी। अध्यक्ष पद अनारक्षित ओपन होने के कारण सभी वर्गों के उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे में दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
डेगाना में बदला आरक्षण का समीकरण
डेगाना नगर पालिका में 25 वार्ड और 16,257 मतदाता हैं। इनमें 8,268 पुरुष और 7,989 महिला मतदाता हैं। कुल 25 मतदान केंद्र हैं। पिछली बार SC वर्ग के लिए आरक्षित रही अध्यक्ष पद की सीट अब अनारक्षित हो गई है। इससे सभी वर्गों के संभावित दावेदारों के लिए रास्ता खुल गया है।
मेड़ता रोड में SC महिला को मौका
मेड़ता रोड नगर पालिका में 25 वार्ड और 15,251 मतदाता हैं। इनमें 7,796 पुरुष तथा 7,455 महिला मतदाता हैं। यहां 25 मतदान केंद्र हैं। अध्यक्ष पद SC महिला के लिए आरक्षित होने से अनुसूचित जाति वर्ग की महिला दावेदारों के लिए नेतृत्व का अवसर सामने आया है।
रियांबड़ी में पहली बार चुनी जाएगी स्थानीय सरकार
रियांबड़ी नगर पालिका में 20 वार्ड हैं और 10,620 मतदाता पहली बार नगर पालिका की स्थानीय सरकार चुनेंगे। इनमें 5,435 पुरुष और 5,185 महिला मतदाता हैं। कुल 20 मतदान केंद्र हैं। अध्यक्ष पद OBC के लिए आरक्षित है। ऐसे में यहां पहले अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक उत्सुकता बनी हुई है।
मुंडवा में 14,514 मतदाता करेंगे फैसला
मुंडवा निकाय में 25 वार्ड हैं। यहां कुल 14,514 मतदाता हैं, जिनमें 7,361 पुरुष और 7,153 महिला मतदाता हैं। कुल 25 मतदान केंद्र हैं। वार्ड स्तर पर मजबूत उम्मीदवार और स्थानीय पकड़ चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
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अब टिकट वितरण पर टिकी नजर
आरक्षण लॉटरी के बाद अब असली राजनीतिक खेल टिकट वितरण का होगा। जिन नेताओं की परंपरागत सीट आरक्षित हो गई है, वे अपने परिवार या समर्थक को मैदान में उतार सकते हैं। वहीं अनारक्षित सीटों वाले निकायों में पुराने राजनीतिक दिग्गज सीधे मुकाबले में लौट सकते हैं। कुल मिलाकर नागौर में चुनाव आरक्षण, जातीय समीकरण, महिला नेतृत्व, स्थानीय गुटबाजी और पार्टी संगठन के इर्द-गिर्द घूमता नजर आएगा।