भीलवाड़ा स्कूल में सजा बनी संकट: भीषण गर्मी में छात्र से करवाया उठक-बैठक, गिरकर हुआ बेहोश; परिजनों का आक्रोश
भीलवाड़ा के कांवा खेड़ा स्कूल में शिक्षिका द्वारा गर्मी में उठक-बैठक की सजा देने से 14 वर्षीय छात्र बेहोश हो गया। परिजनों ने हंगामा किया। आरोपों से इंकार करते हुए प्रधानाचार्य ने सीमित सजा और जांच की बात कही।
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भीलवाड़ा शहर के कांवा खेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक छात्र को कथित रूप से कठोर सजा दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि डेपुटेशन पर कार्यरत एक शिक्षिका ने 14 वर्षीय छात्र से भीषण गर्मी में उठक-बैठक लगवाई, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह स्कूल परिसर में ही बेहोश हो गया।
जानकारी के अनुसार, छात्र को तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया। घटना की सूचना मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में स्कूल पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। माहौल तनावपूर्ण होने पर संबंधित शिक्षिका वहां से चली गईं।
पीड़ित छात्र की मां सुल्ताना बानो ने बताया कि उनका बेटा आठवीं कक्षा में पढ़ता है। कुछ दिन पहले वह स्कूल में प्रवेश के लिए गई थीं, जहां उनसे मूल निवास प्रमाण पत्र मांगा गया। ई-मित्र की रसीद दिखाने के बावजूद प्रवेश नहीं दिया गया। बाद में बच्चे को स्कूल में बैठाकर पढ़ाने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद वह नियमित रूप से स्कूल जाने लगा।
मां का आरोप है कि इसी दौरान शिक्षिका ने छात्र को सजा के रूप में पहले दिन 100 और अगले दिन 200 उठक-बैठक लगवाईं। भीषण गर्मी के कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सजा से बच्चों में स्कूल के प्रति भय पैदा होता है।
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वहीं, विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रदीप मेहता ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की कमी है और सीमित स्टाफ के साथ कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्र शरारत कर रहा होगा, इसलिए उसे डांटा गया और कुछ उठक-बैठक लगवाई गई होगी।
प्रधानाचार्य ने 100 या 200 उठक-बैठक के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अधिकतम 50-60 उठक-बैठक ही लगवाई गई होगी। साथ ही उन्होंने संबंधित शिक्षिका को भविष्य में इस प्रकार की घटना न दोहराने के निर्देश दिए हैं। घटना के बाद परिजन प्रशासन से मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।