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Rajasthan: फसल बीमा में करोड़ों का फर्जीवाड़ा! संदिग्ध खातों का भुगतान रोका, अब एफआईआर से मचा हड़कंप
Tue, 18 Aug 2026 08:10 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Tue, 18 Aug 2026 08:10 PM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े के मामलों पर कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। फर्जी दस्तावेजों और गलत गिरदावरी रिपोर्ट के जरिए बीमा क्लेम लेने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। संदिग्ध खातों का भुगतान रोकने के साथ बैंक खातों और फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की जांच तेज कर दी गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : AI
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विस्तार
राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े के विरुद्ध कृषि विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने राज्य के विभिन्न जिलों में फर्जी कागजात तैयार कर बीमा राशि हड़पने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शासकीय अभिलेखों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात उजागर हुई है कि राज्य के कई जिलों में वास्तविक किसानों के स्थान पर फर्जी नाम और कूटरचित दस्तावेज दर्ज करके अनुचित तरीके से करोड़ों रुपये का बीमा क्लेम उठाया गया था।
फर्जी दावों पर पुलिस प्राथमिकी
फर्जीवाड़े में शामिल गिरोहों ने बीमा पोर्टल पर गलत आंकड़े और फर्जी गिरदावरी रिपोर्ट प्रविष्ट करके क्लेम की राशि ऐंठ ली थी। विभागीय शिकायतों के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी में शामिल संदिग्धों के खिलाफ आपराधिक प्राथमिकी दर्ज दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस उन सभी बैंक खातों का विस्तृत विवरण जुटा रही है, जिनमें बीमा क्लेम की रकम जमा कराई गई थी। पुलिस जालसाजी में शामिल ईमित्र संचालकों, निजी बिचौलियों और साठगांठ करने वाले निचले स्तर के कर्मचारियों को नामजद कर कड़ी कार्रवाई कर रही है।
गिरोह और फर्जी खातों पर शिकंजा
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि एक ही खसरा संख्या तथा दूसरे व्यक्ति की कृषि भूमि के फर्जी दस्तावेज बनाकर कई-कई बीमा पॉलिसियां जारी कराई गई थीं। मामले का संज्ञान लेते हुए कृषि विभाग ने संबंधित बीमा कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे सभी संदिग्ध खातों की क्लेम राशि का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दें। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पुलिस जांच पूरी होने के पश्चात दोषियों से गबन की पूरी राशि की नकद वसूली की जाएगी और उनके अवैध खातों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
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फर्जीवाड़ा रोकने को कड़े कदम
भविष्य में धांधली पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने की योजना बनाई है। विभाग ऑनलाइन पोर्टल को राजस्व विभाग के डिजिटाइज्ड डेटाबेस के साथ एकीकृत कर रहा है, जिससे भूमि रिकॉर्ड का प्रामाणिक सत्यापन ऑनलाइन संभव हो सके। अधिकारियों के अनुसार, अब बिना पारदर्शी सत्यापन और राजस्व अधिकारी की स्वीकृति के किसी भी फसल बीमा आवेदन को मंजूरी नहीं दी जाएगी। फर्जीवाड़े में शामिल पाई जाने वाली बीमा कंपनियों के एजेंटों को काली सूची में डाला जाएगा तथा दोषी कर्मियों के विरुद्ध विभागीय जांच चलाकर कड़ी कार्रवाई होगी।
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फर्जी दावों पर पुलिस प्राथमिकी
फर्जीवाड़े में शामिल गिरोहों ने बीमा पोर्टल पर गलत आंकड़े और फर्जी गिरदावरी रिपोर्ट प्रविष्ट करके क्लेम की राशि ऐंठ ली थी। विभागीय शिकायतों के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी में शामिल संदिग्धों के खिलाफ आपराधिक प्राथमिकी दर्ज दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस उन सभी बैंक खातों का विस्तृत विवरण जुटा रही है, जिनमें बीमा क्लेम की रकम जमा कराई गई थी। पुलिस जालसाजी में शामिल ईमित्र संचालकों, निजी बिचौलियों और साठगांठ करने वाले निचले स्तर के कर्मचारियों को नामजद कर कड़ी कार्रवाई कर रही है।
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गिरोह और फर्जी खातों पर शिकंजा
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि एक ही खसरा संख्या तथा दूसरे व्यक्ति की कृषि भूमि के फर्जी दस्तावेज बनाकर कई-कई बीमा पॉलिसियां जारी कराई गई थीं। मामले का संज्ञान लेते हुए कृषि विभाग ने संबंधित बीमा कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे सभी संदिग्ध खातों की क्लेम राशि का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दें। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पुलिस जांच पूरी होने के पश्चात दोषियों से गबन की पूरी राशि की नकद वसूली की जाएगी और उनके अवैध खातों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
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फर्जीवाड़ा रोकने को कड़े कदम
भविष्य में धांधली पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने की योजना बनाई है। विभाग ऑनलाइन पोर्टल को राजस्व विभाग के डिजिटाइज्ड डेटाबेस के साथ एकीकृत कर रहा है, जिससे भूमि रिकॉर्ड का प्रामाणिक सत्यापन ऑनलाइन संभव हो सके। अधिकारियों के अनुसार, अब बिना पारदर्शी सत्यापन और राजस्व अधिकारी की स्वीकृति के किसी भी फसल बीमा आवेदन को मंजूरी नहीं दी जाएगी। फर्जीवाड़े में शामिल पाई जाने वाली बीमा कंपनियों के एजेंटों को काली सूची में डाला जाएगा तथा दोषी कर्मियों के विरुद्ध विभागीय जांच चलाकर कड़ी कार्रवाई होगी।