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Rajasthan: न छत, न दीवारें, सलूम्बर में खुले आसमान के नीचे 'ककहरा' सीखने को मजबूर 21 मासूम, उठे सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सलूम्बर
Published by: सलूंबर ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 09:31 AM IST
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सार
राजस्थान के सलूम्बर जिले के बस्सी सामचोत पंचायत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय अंगारी फला का भवन 2025 में गिरा दिए जाने के बाद अब तक नया भवन स्वीकृत नहीं हुआ है। पिछले डेढ़ साल से स्कूल अस्थायी व्यवस्था में चल रहा है, जिससे 21 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सलूम्बर में बिना भवन चल रहा स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सलूम्बर जिले की पंचायत समिति सलूम्बर के अंतर्गत ग्राम पंचायत बस्सी सामचोत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय अंगारी फला की स्थिति शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर रही है। वर्ष 2024 में विद्यालय भवन को जर्जर घोषित करते हुए उसे गिराने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद अक्टूबर 2025 में पुराने भवन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
डेढ़ साल से अस्थायी भवन में चल रही पढ़ाई
भवन गिराए जाने के बाद अब तक नए भवन की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण विद्यालय पिछले करीब डेढ़ साल से अस्थायी भवन में संचालित हो रहा है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
21 बच्चों का भविष्य अस्थिर माहौल में
विद्यालय में फिलहाल 21 विद्यार्थियों का नामांकन है, जो पिछले दो वर्षों से अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सीमित संसाधन, पर्याप्त कक्षाओं की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थायी भवन नहीं होने से बच्चों को न सुरक्षित माहौल मिल रहा है और न ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाएं। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें: CM सम्राट की विद्यार्थियों को तोहफा; अनुदान किया डबल, 10 हजार छात्रों की जेब में आएंगे ज्यादा पैसे
बार-बार गुहार, फिर भी नहीं मिला समाधान
विद्यालय प्रशासन ने कई बार संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को नए भवन की स्वीकृति के लिए लिखित और मौखिक रूप से जानकारी दी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लगातार अनदेखी से यह साफ है कि इस गंभीर मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
DMFT और SDRF से अन्य काम, लेकिन यहां अनदेखी
जिले में जिला प्रशासन द्वारा DMFT फंड और SDRF के तहत कई निर्माण कार्यों को स्वीकृति देकर पूरा भी करवाया जा रहा है। इसके बावजूद शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र की इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब अन्य कार्यों के लिए बजट मिल सकता है, तो इस विद्यालय के लिए क्यों नहीं?
सरकारी दावे बनाम जमीनी हकीकत
राज्य सरकार शिक्षा में सुधार और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यह मामला उन दावों की असलियत को सामने लाता है। एक ओर शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात होती है, वहीं दूसरी ओर छोटे बच्चों को बिना भवन के पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जल्द समाधान की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द विद्यालय भवन की स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके। मुकेश भगवान त्रिवेदी, पीईईओ, बस्सी सामचोत ने कहा, “विद्यालय भवन के संबंध में हमारी ओर से प्रशासन को कई बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन अभी तक नए भवन की स्वीकृति प्राप्त नहीं हो सकी है।”
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डेढ़ साल से अस्थायी भवन में चल रही पढ़ाई
भवन गिराए जाने के बाद अब तक नए भवन की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण विद्यालय पिछले करीब डेढ़ साल से अस्थायी भवन में संचालित हो रहा है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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21 बच्चों का भविष्य अस्थिर माहौल में
विद्यालय में फिलहाल 21 विद्यार्थियों का नामांकन है, जो पिछले दो वर्षों से अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सीमित संसाधन, पर्याप्त कक्षाओं की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थायी भवन नहीं होने से बच्चों को न सुरक्षित माहौल मिल रहा है और न ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाएं। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है।
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बार-बार गुहार, फिर भी नहीं मिला समाधान
विद्यालय प्रशासन ने कई बार संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को नए भवन की स्वीकृति के लिए लिखित और मौखिक रूप से जानकारी दी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लगातार अनदेखी से यह साफ है कि इस गंभीर मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
DMFT और SDRF से अन्य काम, लेकिन यहां अनदेखी
जिले में जिला प्रशासन द्वारा DMFT फंड और SDRF के तहत कई निर्माण कार्यों को स्वीकृति देकर पूरा भी करवाया जा रहा है। इसके बावजूद शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र की इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब अन्य कार्यों के लिए बजट मिल सकता है, तो इस विद्यालय के लिए क्यों नहीं?
सरकारी दावे बनाम जमीनी हकीकत
राज्य सरकार शिक्षा में सुधार और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यह मामला उन दावों की असलियत को सामने लाता है। एक ओर शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात होती है, वहीं दूसरी ओर छोटे बच्चों को बिना भवन के पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जल्द समाधान की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द विद्यालय भवन की स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके। मुकेश भगवान त्रिवेदी, पीईईओ, बस्सी सामचोत ने कहा, “विद्यालय भवन के संबंध में हमारी ओर से प्रशासन को कई बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन अभी तक नए भवन की स्वीकृति प्राप्त नहीं हो सकी है।”
