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Salumber: बीच से धंसी पुलिया, उखड़ा सीमेंट-कांक्रीट, 5 लाख की पुलिया दो साल में जर्जर, गुणवत्ता पर उठे सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सलूंबर Published by: सलूंबर ब्यूरो Updated Fri, 12 Jun 2026 11:23 AM IST
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सार

जिले के सराड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में करीब 5 लाख रुपये की लागत से बनी एक पुलिया दो साल के भीतर ही जर्जर हो गई। पुलिया में आई दरारों और धंसे हिस्सों को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पुनर्निर्माण की मांग की है।

Salumber: 5 lakh culvert deteriorates within 2 years, center caves in, villagers question construction quality
दो साल में ही जर्जर हुई 5 लाख की पुलिया
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विस्तार

राज्य सरकार और जिला प्रशासन भले ही विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता के दावे कर रहे हों लेकिन सलूंबर जिले में एक निर्माण कार्य ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सराड़ा पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत नाल हलकार के मेहंदीवाला कुआं स्थित उपलाफला में करीब 5 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुलिया दो साल के भीतर ही जर्जर हो गई है। ग्रामीणों ने निर्माण में अनियमितता और घटिया गुणवत्ता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।



मौके पर पुलिया की स्थिति बेहद खराब नजर आ रही है। पुलिया का मध्य भाग धंस चुका है, सीमेंट-कंक्रीट उखड़ गया है और कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि यहां से गुजरना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण राकेश कुमार ने बताया कि पुलिया का निर्माण करीब दो वर्ष पहले ग्रामीणों की आवाजाही सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि निर्माण के कुछ ही महीनों बाद इसमें दरारें दिखाई देने लगीं। धीरे-धीरे पुलिया का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और अब इसकी स्थिति पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि पुलिया के नीचे पर्याप्त मजबूती नहीं दी गई और मिट्टी भराव का कार्य भी तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। यही कारण है कि मामूली बारिश और पानी के दबाव को भी यह निर्माण नहीं झेल सका।

स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के दौरान नाले का पानी पुलिया के ऊपर से करीब दो फीट तक बहता है। इससे गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है और लोगों की आवाजाही में भारी परेशानी होती है। स्कूली बच्चों, किसानों और रोजमर्रा के कार्यों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों को जोखिम उठाकर रास्ता पार करना पड़ता है। कई बार उन्हें लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है। ऐसे में प्रशासन को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

निर्माण कार्यों से जुड़े जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है। सामान्यतः निर्माण के बाद एक निश्चित अवधि तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी रहती है लेकिन यहां दो साल के भीतर ही पुलिया की हालत खराब हो जाना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह मामला निर्माण कार्यों में लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिया निर्माण में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

साथ ही ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त पुलिया को हटाकर तकनीकी मानकों के अनुरूप नए सिरे से निर्माण कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना की आशंका न रहे और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

 

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