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आठ बार फेल होकर भी बन गए डॉक्टर: राजस्थान में फर्जी रैकेट का खुलासा, बिना परीक्षा पास किए कर रहे थे इलाज

Fri, 14 Aug 2026 02:22 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Fri, 14 Aug 2026 02:22 PM IST
सार

राजस्थान एसओजी ने फर्जी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा प्रमाण पत्र के जरिए मेडिकल काउंसिल में पंजीयन और इंटर्नशिप हासिल करने के मामले में तीन और विदेशी एमबीबीएस डिग्रीधारियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 100 से अधिक संदिग्ध सामने आए हैं, जबकि 30 आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।

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Rajasthan Fake Doctor Racket Exposed Failed Exams eight Times Paid Lakhs to Get Registered and Treat Patients
एसओजी - फोटो : amar ujala

विस्तार

विशेष अभियान समूह (SOG) ने फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) स्क्रीनिंग परीक्षा प्रमाण पत्र के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने और मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल करने के मामले में तीन और विदेशी एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। इस फर्जीवाड़े की जांच में अब तक 100 से अधिक संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार सहित 30 आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।
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फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश
पुलिस के अनुसार, भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने तथा राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये वसूलते थे। इस मामले में 4 फरवरी 2026 को मामला दर्ज किया गया था।
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जांच में सामने आया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले ऐसे लोगों के फर्जी FMG स्क्रीनिंग परीक्षा प्रमाण पत्र तैयार किए गए, जो निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कराई गई।
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लाखों रुपये देकर खरीदे फर्जी दस्तावेज
गिरफ्तार आरोपियों में डीग निवासी आशीष कुमार शर्मा भी शामिल है। उसने वर्ष 2021 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया था। एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार देने के बावजूद वह उत्तीर्ण नहीं हो सका। इसके बाद उसने आरोपी शुभम गुर्जर के माध्यम से 25 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज, करौली से इंटर्नशिप की। आरोपी शुभम गुर्जर पहले ही गिरफ्तार होकर न्यायिक अभिरक्षा में है। दूसरे आरोपी मुरलीपुरा निवासी राजेंद्र कुमार यादव ने चीन से वर्ष 2006 से 2012 के बीच एमबीबीएस किया और वर्ष 2012 में भारत लौटा। उसने आठ बार परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने बहरोड़ निवासी संदीप के माध्यम से 29 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर पंजीयन के लिए आवेदन किया। वर्तमान में वह अपनी डॉक्टर पत्नी के अस्पताल में प्रबंधन का काम देख रहा है।


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बिना अर्हता के कर रहा था इलाज
तीसरा आरोपी कोटपूतली-बहरोड़ निवासी नरेश रोलानिया है। उसने वर्ष 2021 में कजाकिस्तान से MBBS किया था। तीन बार परीक्षा में विफल रहने के बाद उसने अपने रिश्तेदार नरेंद्र के माध्यम से 26 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और उदयपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की। पुलिस के अनुसार, नरेश वर्तमान में कोटपूतली के एक अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में बिना FMG परीक्षा पास किए और बिना राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के इलाज कर रहा था।
 
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