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Rajasthan: छात्र राजनीति पर छिड़ी रार, शुभम ने व्यवस्था पर उठाए सवाल; कहा- नेपो किड नहीं, हम मेहनत के दम पर आए
Fri, 14 Aug 2026 12:27 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 12:27 PM IST
सार
राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग के बीच शुभम गुढ़ा ने कहा कि चुनाव युवाओं को नेतृत्व का लोकतांत्रिक मंच देते हैं। उन्होंने राजनीतिक परिवारवाद पर सवाल उठाते हुए सरकार से छात्र प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर मांग पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की।
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शुभम गुढा, युवा नेता
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग तेज होती जा रही है। कोई धरने पर बैठा है, कोई टंकी पर चढ़कर आवाज उठा चुका है और छात्र भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि सरकार उनकी बात सुने और छात्रसंघ चुनाव दोबारा कराए। इसी बीच शुभम गुढ़ा ने छात्रसंघ चुनावों की जरूरत और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय से निकले कई बड़े नेता छात्र राजनीति के माध्यम से आगे बढ़े हैं। उनके मुताबिक, छात्रसंघ चुनाव नए नेतृत्व को तैयार करने का माध्यम हैं।
छात्र राजनीति से निकलते हैं नए नेता
शुभम गुढ़ा ने आरोप लगाया कि स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को नए नेताओं के उभरने का डर रहता है। उन्होंने कहा कि बड़े नेता को खत्म करके अपनी लकीर बड़ी करने वाले व्यक्ति को ही बड़ा नेता समझा जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नए छात्र नेता स्थापित राजनीतिक ढांचे के लिए चुनौती बन सकते हैं? उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर वंशवाद और राजनीतिक परिवारों के प्रभाव को लेकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि दोनों दलों में बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं, जिन्हें परिवार या राजनीतिक संरक्षण के रास्ते आगे बढ़ने का अवसर मिला। शुभम ने कहा कि होटल में जब सरकार थी, तब मैंने भी देखा है कि किसी नेता को खत्म करके लकीर बड़ी करने वाले नेता को बड़ा नेता समझा जाता है।
छात्र नेताओं को अपनी आवाज खुद मजबूत करनी होगी
शुभम ने कहा कि छात्र नेताओं को राजनीतिक दलों के पीछे नारे लगाने और आश्वासनों के भरोसे रहने के बजाय अपनी आवाज खुद मजबूत करनी चाहिए। छात्रसंघ चुनाव युवाओं को अपनी पहचान बनाने और नेतृत्व क्षमता दिखाने का अवसर दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक मंच नहीं मिलने पर असंतोष बढ़ सकता है। छात्रसंघ चुनाव केवल चुनाव नहीं हैं, बल्कि युवाओं को राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व के लिए तैयार करने का एक माध्यम भी हैं।
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आंदोलन को लेकर बोले- प्रेशर कुकर जैसी स्थिति
शुभम ने छात्र आंदोलनकारियों की स्थिति की तुलना प्रेशर कुकर से करते हुए कहा कि अगर दबाव लगातार बढ़ता रहे और आवाज निकालने का रास्ता बंद कर दिया जाए तो किसी समय विस्फोट जैसी स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ज्ञापन, धरना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाई जा सकती है। सरकार को आंदोलनकारियों की बात सुनकर समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए।
ये भी पढ़ें- आरक्षण लॉटरी से बदले सियासी समीकरण: पूरा बीकानेर संभाग महिलाओं को; जैसलमेर में 21 में से सिर्फ एक जीतकर बन जाएंगे जिला प्रमुख
'नेपो किड' वाली बात पर क्या बोले शुभम?
'नेपो किड' वाली बात पर शुभम ने कहा कि हमारे पास क्या है साहब? न तो हम भाजपा के हैं, न कांग्रेस के। हम तो अपनी मेहनत के दम पर आए हैं। हमें तो जनता चुनती है। हम दिन-रात जनता के बीच रहकर पसीना बहाते हैं और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसी अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचाकर अपना काम नहीं चलाया है। अपने राजनीति में आने के सवाल पर शुभम ने कहा कि अभी उनकी उम्र कम है और 28 साल की उम्र भी पूरी नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि जनता जो चाहेगी और जैसा चाहेगी, वैसा ही होगा।
सरकार से छात्रों से बातचीत की अपील
शुभम ने सरकार से छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने और छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समस्या आंदोलन करने वालों को रोकने से नहीं, बल्कि उनकी बात सुनकर समाधान निकालने से खत्म होगी।
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छात्र राजनीति से निकलते हैं नए नेता
शुभम गुढ़ा ने आरोप लगाया कि स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को नए नेताओं के उभरने का डर रहता है। उन्होंने कहा कि बड़े नेता को खत्म करके अपनी लकीर बड़ी करने वाले व्यक्ति को ही बड़ा नेता समझा जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नए छात्र नेता स्थापित राजनीतिक ढांचे के लिए चुनौती बन सकते हैं? उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर वंशवाद और राजनीतिक परिवारों के प्रभाव को लेकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि दोनों दलों में बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं, जिन्हें परिवार या राजनीतिक संरक्षण के रास्ते आगे बढ़ने का अवसर मिला। शुभम ने कहा कि होटल में जब सरकार थी, तब मैंने भी देखा है कि किसी नेता को खत्म करके लकीर बड़ी करने वाले नेता को बड़ा नेता समझा जाता है।
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छात्र नेताओं को अपनी आवाज खुद मजबूत करनी होगी
शुभम ने कहा कि छात्र नेताओं को राजनीतिक दलों के पीछे नारे लगाने और आश्वासनों के भरोसे रहने के बजाय अपनी आवाज खुद मजबूत करनी चाहिए। छात्रसंघ चुनाव युवाओं को अपनी पहचान बनाने और नेतृत्व क्षमता दिखाने का अवसर दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक मंच नहीं मिलने पर असंतोष बढ़ सकता है। छात्रसंघ चुनाव केवल चुनाव नहीं हैं, बल्कि युवाओं को राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व के लिए तैयार करने का एक माध्यम भी हैं।
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आंदोलन को लेकर बोले- प्रेशर कुकर जैसी स्थिति
शुभम ने छात्र आंदोलनकारियों की स्थिति की तुलना प्रेशर कुकर से करते हुए कहा कि अगर दबाव लगातार बढ़ता रहे और आवाज निकालने का रास्ता बंद कर दिया जाए तो किसी समय विस्फोट जैसी स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ज्ञापन, धरना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाई जा सकती है। सरकार को आंदोलनकारियों की बात सुनकर समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए।
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'नेपो किड' वाली बात पर क्या बोले शुभम?
'नेपो किड' वाली बात पर शुभम ने कहा कि हमारे पास क्या है साहब? न तो हम भाजपा के हैं, न कांग्रेस के। हम तो अपनी मेहनत के दम पर आए हैं। हमें तो जनता चुनती है। हम दिन-रात जनता के बीच रहकर पसीना बहाते हैं और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसी अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचाकर अपना काम नहीं चलाया है। अपने राजनीति में आने के सवाल पर शुभम ने कहा कि अभी उनकी उम्र कम है और 28 साल की उम्र भी पूरी नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि जनता जो चाहेगी और जैसा चाहेगी, वैसा ही होगा।
सरकार से छात्रों से बातचीत की अपील
शुभम ने सरकार से छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने और छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समस्या आंदोलन करने वालों को रोकने से नहीं, बल्कि उनकी बात सुनकर समाधान निकालने से खत्म होगी।