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सीकर में ओएसडी बनकर आए थे 20 लाख लेने, व्यापारी ने मांगा आईडी कार्ड तो खुल गई पोल; राजस्थान में सियासी उबाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
Published by: सीकर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 08:26 PM IST
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सार
सीकर में कृषि मंत्री के नाम पर कथित तौर पर 20 लाख रुपये मांगने का मामला सामने आया है। सदर थाना पुलिस ने दो सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर सवाल उठाए हैं।
सदर थाने में दो सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान के सीकर जिले में कृषि मंत्री के नाम पर कथित रूप से 20 लाख रुपये मांगने के आरोप ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। सदर थाना पुलिस ने कृषि विभाग से जुड़े दो कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जबरन वसूली के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं इस मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साधते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।
फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा मामला
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सीकर निवासी रामलाल, जो बीज कारोबार से जुड़े हैं, ने आरोप लगाया कि 2 जून को उनके बेटे विकास के पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को कृषि मंत्री का ओएसडी बताते हुए 20 लाख रुपये की मांग की। शिकायत में कहा गया है कि अगले दिन फिर फोन आया और कथित तौर पर कहा गया कि "मंत्री जी ने पैसे मंगवाए हैं।" लगातार कॉल आने के बाद विकास को 4 जून को सांवली सर्किल स्थित एक होटल में बुलाया गया।
पहचान पत्र मांगने पर बढ़ा शक
परिवार का आरोप है कि होटल में मौजूद व्यक्ति खुद को मंत्री का ओएसडी बता रहा था, लेकिन जब उससे पहचान पत्र मांगा गया तो वह कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका। इस पर संदेह गहरा गया। शिकायत के अनुसार मौके पर मौजूद लोगों ने उसे पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान वहां मौजूद तीन व्यक्तियों में से एक फरार हो गया, जबकि संदीप और रजनीश नामक दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।
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दोनों पक्षों ने दर्ज कराए मामले
सदर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब आरोपी संदीप ने भी बीज कारोबारी और उसके साथियों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया। ऐसे में पुलिस अब दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है और घटनाक्रम की वास्तविकता जानने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है।
डोटासरा ने उठाए सवाल
मामले के सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब सफाई देने का नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने का समय है। डोटासरा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कृषि मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने की बात कही।
ये भी पढ़ें- जयपुर नूरानी मस्जिद विवाद: 'अपराध होगा तो बुलडोजर चलेगा', मुस्लिम फोरम के बयान पर भाजपा विधायक का तीखा पलटवार
मंत्री बोले- कानून करेगा अपना काम
विवाद बढ़ने के बाद कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खुद को पूरे मामले से अलग बताते हुए कहा कि उनका इस प्रकरण से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने उनके नाम का दुरुपयोग किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और उगाही के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच कॉल रिकॉर्डिंग, मोबाइल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और पूरे घटनाक्रम के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं।
फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा मामला
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सीकर निवासी रामलाल, जो बीज कारोबार से जुड़े हैं, ने आरोप लगाया कि 2 जून को उनके बेटे विकास के पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को कृषि मंत्री का ओएसडी बताते हुए 20 लाख रुपये की मांग की। शिकायत में कहा गया है कि अगले दिन फिर फोन आया और कथित तौर पर कहा गया कि "मंत्री जी ने पैसे मंगवाए हैं।" लगातार कॉल आने के बाद विकास को 4 जून को सांवली सर्किल स्थित एक होटल में बुलाया गया।
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पहचान पत्र मांगने पर बढ़ा शक
परिवार का आरोप है कि होटल में मौजूद व्यक्ति खुद को मंत्री का ओएसडी बता रहा था, लेकिन जब उससे पहचान पत्र मांगा गया तो वह कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका। इस पर संदेह गहरा गया। शिकायत के अनुसार मौके पर मौजूद लोगों ने उसे पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान वहां मौजूद तीन व्यक्तियों में से एक फरार हो गया, जबकि संदीप और रजनीश नामक दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।
दोनों पक्षों ने दर्ज कराए मामले
सदर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब आरोपी संदीप ने भी बीज कारोबारी और उसके साथियों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया। ऐसे में पुलिस अब दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है और घटनाक्रम की वास्तविकता जानने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है।
डोटासरा ने उठाए सवाल
मामले के सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब सफाई देने का नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने का समय है। डोटासरा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कृषि मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने की बात कही।
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मंत्री बोले- कानून करेगा अपना काम
विवाद बढ़ने के बाद कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खुद को पूरे मामले से अलग बताते हुए कहा कि उनका इस प्रकरण से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने उनके नाम का दुरुपयोग किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और उगाही के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच कॉल रिकॉर्डिंग, मोबाइल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और पूरे घटनाक्रम के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं।