सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rahul Gandhi’s Education Rally, Why Were These Four Major Education and Exam Hubs Chosen?

Explainer: राहुल गांधी ने अपनी नई मुहिम के लिए शिक्षा के चार बड़े केंद्रों को ही क्यों चुना, इनका क्या इतिहास?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 17 Jun 2026 03:57 PM IST
विज्ञापन
सार

राहुल गांधी की शिक्षा यात्रा उन शहरों तक पहुंच रही है जो देश में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र जीवन के बड़े केंद्र माने जाते हैं। कोटा, प्रयागराज, पटना और दिल्ली लाखों युवाओं की आकांक्षाओं और करियर की तैयारी से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रहा है इन शहरों का इतिहास और क्यों है ये देश के शिक्षा का प्रमुख केंद्र? आइए पूरी रिपोर्ट में जानते हैं। 

Rahul Gandhi’s Education Rally, Why Were These Four Major Education and Exam Hubs Chosen?
भारत के चार प्रमुख शिक्षा केंद्र - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी 17 जून से एक देशव्यापी अभियान की शुरुआत की। इसका केंद्र शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विशेष रूप से नीट यूजी पेपर लीक विवाद है। कांग्रेस का दावा है कि परीक्षा प्रणाली में बढ़ती अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। इसी मुद्दे पर युवाओं को लामबंद करने के लिए राहुल गांधी कोटा, प्रयागराज, पटना और दिल्ली जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्रों का दौरा करेंगे।


दिलचस्प बात यह है कि यात्रा के लिए चुने गए ये चारों शहर केवल राजनीतिक महत्व नहीं रखते, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र आंदोलनों के प्रमुख केंद्र भी रहे हैं। इन शहरों का अपना अलग शैक्षिक इतिहास है और प्रत्येक शहर भारत के लाखों छात्रों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। आइये इन शहरों और शिक्षा से इनके रिश्ते को विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
विज्ञापन

कोटा: भारत की कोचिंग राजधानी

भारत में कोचिंग उद्योग का सबसे बड़ा प्रतीक राजस्थान का कोटा शहर रहा है। आज जिस कोटा को देश की कोचिंग राजधानी कहा जाता है, उसकी कहानी 1985 में शुरू हुई थी। उस समय जे.के. सिंथेटिक्स में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले वी.के. बंसल ने अपने घर से छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में वे सातवीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाते थे, बाद में दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को भी पढ़ाने लगे। 1985 में उनके एक छात्र ने IIT-JEE परीक्षा पास कर ली। इस सफलता ने वी.के. बंसल को एक नई दिशा दिखाई। उन्होंने बंसल क्लासेज की स्थापना की, जो आगे चलकर देश के सबसे बड़े कोचिंग संस्थानों में से एक बन गया। 
विज्ञापन


इसने कोटा में एक नई शैक्षणिक अर्थव्यवस्था को जन्म दिया। देखते ही देखते शहर में दर्जनों बड़े संस्थान खड़े हो गए और कोटा इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का राष्ट्रीय केंद्र बन गया। कोटा जिला प्रशासन और विभिन्न शिक्षा रिपोर्टों के अनुसार हर वर्ष करीब 2 से 2.5 लाख छात्र जेईई और नीट की तैयारी के लिए यहां पहुंचते हैं।

प्रयागराज: 'ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट' और IAS की नर्सरी

राहुल की यात्रा का दूसरा प्रमुख पड़ाव प्रयागराज है। 1887 में स्थापित इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत के सबसे पुराने आधुनिक विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। इसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा के कारण इसे लंबे समय तक 'ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट' कहा जाता रहा।

इलाहाबद से निकले कई बड़े राजनीतिक चहरे

  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय से निकलने वाले छात्रों ने देश की राजनीति, प्रशासन और शासन व्यवस्था को दशकों तक दिशा दी। 
  • भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे। 
  • वी.पी. सिंह और नारायण दत्त तिवारी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे, जबकि चंद्रशेखर ने यहीं से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। 
  • पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा, विजय बहुगुणा, रीता बहुगुणा जोशी, मुरली मनोहर जोशी, मदन लाल खुराना, अर्जुन सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी और जनेश्वर मिश्र जैसे अनेक राष्ट्रीय नेता भी इसी विश्वविद्यालय से जुड़े रहे। इतना ही नहीं, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री समेत कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी यहां शिक्षा प्राप्त की।
प्रयागराज को आज भी उत्तर भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं का बड़ा केंद्र माना जाता है। शहर और इसके आसपास के नैनी, झूंसी व फाफामऊ जैसे इलाकों में लगभग पांच लाख छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 2,000 कोचिंग संस्थान संचालित हैं, जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में छात्र पहुंचते हैं। अपेक्षाकृत कम खर्च में कोचिंग और रहने की सुविधा उपलब्ध होने के कारण प्रयागराज UPSC, PCS, SSC, रेलवे, बैंकिंग और पुलिस भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए एक प्रमुख केंद्र है। यही वजह है कि इसे अक्सर देश की 'IAS-PCS की नर्सरी' भी कहा जाता है।

पटना: नालंदा की विरासत से आधुनिक कोचिंग राजधानी तक

  • राहुल गांधी के अभियान का तीसरा पड़ाव पटना है। राहुल 11 जुलाई को पटना जाने वाले हैं। 
  • बिहार भारत की शिक्षा परंपरा का प्राचीन केंद्र रहा है। 5वीं शताब्दी में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम द्वारा स्थापित नालंदा महाविहार केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का ज्ञान केंद्र था। 
  • नालंदा विश्वविद्यालय के आधिकारिक इतिहास के अनुसार यहां एक समय लगभग 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे। 
  • चीन के प्रसिद्ध यात्री ह्वेनसांग और इत्सिंग ने अपने यात्रा वृत्तांतों में इसकी समृद्ध शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख किया है।
  • यहां बौद्ध दर्शन के अलावा गणित, चिकित्सा, खगोलशास्त्र, व्याकरण, तर्कशास्त्र और राजनीति जैसे विषय पढ़ाए जाते थे।
  • नालंदा के अलावा विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी बिहार की ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा था। 
  • औपनिवेशिक काल में बिहार की शिक्षा व्यवस्था ने नया रूप लिया। 1863 में स्थापित पटना कॉलेज और 1917 में स्थापित पटना विश्वविद्यालय ने आधुनिक उच्च शिक्षा की नींव रखी। 
  • पटना विश्वविद्यालय को भारतीय उपमहाद्वीप का सातवां सबसे पुराना विश्वविद्यालय माना जाता है। यह विश्वविद्यालय लंबे समय तक पूर्वी भारत में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र रहा।
  • यहीं से देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह और अनेक प्रशासक, न्यायविद व शिक्षाविद निकले। 
  • पिछले दो से तीन दशकों में पटना की पहचान एक नए रूप में उभरी है। आज यह पूर्वी भारत का प्रमुख कोचिंग हब माना जाता है। 
  • बोरिंग रोड, मुसल्लहपुर हाट, राजेंद्र नगर, कंकड़बाग, आशियाना और बहादुरपुर जैसे इलाके हजारों प्रतियोगी छात्रों से भरे रहते हैं। 
  • बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक से छात्र यहां UPSC, BPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, CUET, NDA और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं।
  • दिल्ली की तुलना में यहां कोचिंग फीस, किराया और जीवनयापन की लागत अपेक्षाकृत कम होने से मध्यमवर्गीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए यह अधिक सुलभ विकल्प बन गया है। 

दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की भी राजधानी 

राहुल गांधी के अभियान का अंतिम पड़ाव दिल्ली है। भारत की राजधानी दिल्ली केवल राजनीतिक शक्ति का केंद्र नहीं है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा राजधानी भी मानी जाती है। 

  •  इसकी शैक्षिक विरासत मध्यकालीन दौर से शुरू होती है, जब दिल्ली सल्तनत और मुगल शासन के दौरान यहां मदरसों, पुस्तकालयों और विद्वानों को संरक्षण मिला। 
  •  मुगल काल में शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) फारसी, अरबी, गणित, खगोलशास्त्र और इस्लामी अध्ययन का प्रमुख केंद्र था।
  • आधुनिक शिक्षा की नींव यहां ब्रिटिश शासन के दौरान मजबूत हुई। 
  • 1922 में स्थापित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने राजधानी को उच्च शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बना दिया। 
  • इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (1969), जामिया मिल्लिया इस्लामिया (1920, दिल्ली में 1925 से), IIT दिल्ली (1961), AIIMS (1956) और बाद में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU Delhi) जैसे संस्थानों ने दिल्ली को देश के सबसे बड़े अकादमिक केंद्र के रूप में स्थापित किया। 
  • आज NIRF रैंकिंग में शामिल कई शीर्ष विश्वविद्यालय और संस्थान दिल्ली में स्थित हैं।


दिल्ली का मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर 
पिछले तीन दशक में दिल्ली की एक और पहचान बनी है, देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में। विशेष रूप से मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर UPSC अभ्यर्थियों की राजधानी माने जाते हैं। यहां हर साल देशभर से हजारों छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा करोल बाग, बेर सराय और लक्ष्मी नगर जैसे इलाके SSC, बैंकिंग, CAT, CLAT, CUET, GATE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। केवल ओल्ड राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर क्षेत्र में ही हजारों अभ्यर्थी किराये के कमरों और छात्रावासों में रहकर UPSC की तैयारी करते हैं। दिल्ली का कोचिंग उद्योग हजारों करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था में बदल चुका है, जिसमें कोचिंग संस्थान, पुस्तक बाजार, हॉस्टल और छात्र सेवाएं शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed