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Pappu Yadav FIR Controversy: Pappu Yadav responds to the FIR registered against him and presents his side of t
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Pappu Yadav FIR Controversy:अपने खिलाफ दर्ज FIR पर पप्पू यादव ने दी प्रतिक्रिया, रखा अपना पक्ष!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sun, 02 Aug 2026 12:40 AM IST
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन नेताओं ने संसद परिसर में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे को उठाने के लिए जिस तरह का प्रदर्शन किया, वह संसद की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप नहीं था। शिकायतकर्ता का कहना है कि संसद परिसर लोकतांत्रिक बहस और विधायी कार्यवाही का स्थान है, इसलिए वहां किसी भी प्रकार का प्रतीकात्मक नाटक या प्रदर्शन उचित नहीं माना जा सकता। यह शिकायत दिल्ली पुलिस को दी गई है, हालांकि शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित नेताओं के खिलाफ स्वतः एफआईआर दर्ज हो गई है या आरोप सिद्ध हो गए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
वहीं, अपने खिलाफ शिकायत और एफआईआर की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने कोई मर्यादा नहीं लांघी है और उनका उद्देश्य केवल राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे की ओर देश का ध्यान आकर्षित करना था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ शिकायत की जा सकती है तो फिर चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। पप्पू यादव ने कहा, "हमने कोई मर्यादा नहीं लांघी है। चंदा चोरी पर एफआईआर क्यों नहीं कर रहे? सनातन को बचाने के लिए एक बार नहीं, एक लाख बार गर्दन कटाने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने दावा किया कि उनका विरोध किसी धर्म या आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार और जवाबदेही की मांग को लेकर था। उनके अनुसार, यदि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के दुरुपयोग के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्ष का कहना है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा, जबकि विरोधी पक्ष का आरोप है कि संसद परिसर का उपयोग राजनीतिक प्रदर्शन के लिए नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है और संबंधित एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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