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संत त्रिवेणी गिरि हत्याकांड में बड़ा खुलासा: साथी साधु ने बदले के लिए रची साजिश, गुरु के पोस्टर पर था विवाद
Wed, 14 Oct 2026 08:46 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 14 Oct 2026 08:46 PM IST
सार
राजस्थान के सिरोही जिले में कबेश्वर महादेव मंदिर आश्रम के संत त्रिवेणी गिरि महाराज की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच के अनुसार, गुरु के पोस्टर लगाने और खुद को नागा बाबा बताने को लेकर हुए विवाद के बाद साथी साधु ने रंजिश में हत्या की साजिश रची थी।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिरोही जिले के कबेश्वर महादेव मंदिर आश्रम में संत त्रिवेणी गिरि महाराज की हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। गुरु के पोस्टर लगाने और खुद को नागा बाबा बताने के विवाद में रंजिश रखते हुए साथी साधु ने ही इस हत्याकांड की पूरी साजिश रची थी। पुलिस ने मामले में एक संत सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।
पोस्टर लगाने को लेकर हुआ था विवाद
पुलिस जांच में सामने आया कि श्रावण मास के दौरान कबेश्वर महादेव मंदिर में गुरु के पोस्टर लगाने की बात पर 70 वर्षीय त्रिवेणी गिरि महाराज और कोलीवाड़ा निवासी तोलाराम उर्फ तुलसी गिरि (58) के बीच तीखी बहस हुई थी। इस दौरान दोनों के बीच खुद को नागा बाबा बताने को लेकर भी विवाद पैदा हो गया था। इसी कहासुनी के बाद तुलसी गिरि ने मन में रंजिश ठान ली और बदला लेने की योजना तैयार की। उसने इस आपराधिक षड्यंत्र को अंजाम देने के लिए अन्य साथियों को अपने साथ मिलाया।
आश्रम की छत पर शव मिलने से मचा हड़कंप
घटना का खुलासा तब हुआ जब 1 अक्तूबर को पागल गिरि उर्फ पागल बाबा ने पुलिस को अपने गुरु भाई त्रिवेणी गिरि महाराज का शव मंदिर की छत पर पड़े होने की सूचना दी। संत पिछले दो-तीन वर्षों से इस आश्रम में निवास कर रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस टीम को चारपाई पर संत का दो-तीन दिन पुराना शव मिला, जिससे तेज दुर्गंध आ रही थी। कमरे में सारा सामान बिखरा हुआ था, जिससे हत्या का संदेह गहरा गया। इसके बाद पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर शव साधु-संतों को सौंप दिया।
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वारदात को अंजाम देकर आरोपी हुए फरार
योजना के अनुसार 29 सितंबर को आरोपी तुलसी गिरि मोटरसाइकिल से सुमेरपुर पहुंचा। वहां से वह श्रवण कुमार गमेती भील (32) और उसके एक साथी को साथ लेकर आया। तुलसी गिरि ने दोनों को अंदरूनी रास्तों के जरिये मंदिर पहुंचने का मार्ग समझाया और उन्हें वहीं छोड़ दिया। इसके बाद दोनों आरोपी पैदल आश्रम पहुंचे और रात में छत पर सो रहे संत की हत्या कर दी। वारदात के बाद वे कमरे से सामान चुराकर भाग निकले। पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया है और फरार साथी की तलाश में जुटी है।
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पोस्टर लगाने को लेकर हुआ था विवाद
पुलिस जांच में सामने आया कि श्रावण मास के दौरान कबेश्वर महादेव मंदिर में गुरु के पोस्टर लगाने की बात पर 70 वर्षीय त्रिवेणी गिरि महाराज और कोलीवाड़ा निवासी तोलाराम उर्फ तुलसी गिरि (58) के बीच तीखी बहस हुई थी। इस दौरान दोनों के बीच खुद को नागा बाबा बताने को लेकर भी विवाद पैदा हो गया था। इसी कहासुनी के बाद तुलसी गिरि ने मन में रंजिश ठान ली और बदला लेने की योजना तैयार की। उसने इस आपराधिक षड्यंत्र को अंजाम देने के लिए अन्य साथियों को अपने साथ मिलाया।
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आश्रम की छत पर शव मिलने से मचा हड़कंप
घटना का खुलासा तब हुआ जब 1 अक्तूबर को पागल गिरि उर्फ पागल बाबा ने पुलिस को अपने गुरु भाई त्रिवेणी गिरि महाराज का शव मंदिर की छत पर पड़े होने की सूचना दी। संत पिछले दो-तीन वर्षों से इस आश्रम में निवास कर रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस टीम को चारपाई पर संत का दो-तीन दिन पुराना शव मिला, जिससे तेज दुर्गंध आ रही थी। कमरे में सारा सामान बिखरा हुआ था, जिससे हत्या का संदेह गहरा गया। इसके बाद पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर शव साधु-संतों को सौंप दिया।
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वारदात को अंजाम देकर आरोपी हुए फरार
योजना के अनुसार 29 सितंबर को आरोपी तुलसी गिरि मोटरसाइकिल से सुमेरपुर पहुंचा। वहां से वह श्रवण कुमार गमेती भील (32) और उसके एक साथी को साथ लेकर आया। तुलसी गिरि ने दोनों को अंदरूनी रास्तों के जरिये मंदिर पहुंचने का मार्ग समझाया और उन्हें वहीं छोड़ दिया। इसके बाद दोनों आरोपी पैदल आश्रम पहुंचे और रात में छत पर सो रहे संत की हत्या कर दी। वारदात के बाद वे कमरे से सामान चुराकर भाग निकले। पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया है और फरार साथी की तलाश में जुटी है।