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Rajasthan: बीमा कंपनी ने गलत तरीके से ठुकराया मेडिक्लेम, उपभोक्ता आयोग ने ब्याज समेत भुगतान का दिया आदेश
Sat, 18 Jul 2026 10:27 PM IST
सिरोही ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
Published by: सिरोही ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 10:27 PM IST
सार
सिरोही जिला उपभोक्ता आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को मेडिक्लेम गलत तरीके से खारिज करने का दोषी मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को 55,539 रुपये की क्लेम राशि नौ प्रतिशत ब्याज सहित, 15 हजार रुपये हर्जाना और 3 हजार रुपये अदालती खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया।
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सिरोही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सिरोही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी की सेवा में गंभीर कमी मानते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह परिवादी को बीमा क्लेम की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये तथा वाद व्यय (अदालती खर्च) के रूप में 3 हजार रुपये का भुगतान भी करने का आदेश दिया गया है।
डेंगू के इलाज का क्लेम किया था खारिज
मामला आबूरोड निवासी राजेश अग्रवाल का है। उन्होंने अपने पुत्र का डेंगू का इलाज जयपुर स्थित फोर्टिस अस्पताल में कराया था। इलाज के बाद उन्होंने अपनी मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी से क्लेम का दावा किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम अस्वीकार कर दिया कि मरीज को पॉलिसी शुरू होने के शुरुआती 30 दिनों के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इसलिए दावा पॉलिसी की शर्तों के अनुरूप नहीं है।
आयोग ने कंपनी की दलील को माना गलत
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष अभिमन्युसिंह राठौड़, सदस्य नवीनचंद्र मिश्रा और सदस्या जया मिस्त्री की पीठ ने दस्तावेजों की विस्तार से जांच की। जांच में सामने आया कि बीमा पॉलिसी 11 अक्टूबर 2019 को रात 12:00 बजे प्रभावी हुई थी, जबकि मरीज को 10 नवंबर 2019 को दोपहर 12:37 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यानी पॉलिसी प्रभावी होने के बाद 30 दिन, 12 घंटे और 37 मिनट का समय बीत चुका था। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा 30 दिन की शर्त का हवाला देकर क्लेम खारिज करना तथ्यात्मक रूप से गलत पाया गया।
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ये भी पढ़ें- Rajasthan: हवेली में दफन खजाना मिलने का दावा, मालिक ने ठेकेदार पर सोने-चांदी की संपत्ति हड़पने का केस कराया
ब्याज, हर्जाना और अदालती खर्च देने के आदेश
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह परिवादी को 55,539 रुपये की क्लेम राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ भुगतान करे। इसके अलावा मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 15,000 रुपये तथा अदालती खर्च के रूप में 3,000 रुपये का भुगतान भी निर्धारित समय सीमा के भीतर करने का आदेश दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी की ओर से दावा खारिज करना सेवा में कमी (Deficiency in Service) की श्रेणी में आता है।
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डेंगू के इलाज का क्लेम किया था खारिज
मामला आबूरोड निवासी राजेश अग्रवाल का है। उन्होंने अपने पुत्र का डेंगू का इलाज जयपुर स्थित फोर्टिस अस्पताल में कराया था। इलाज के बाद उन्होंने अपनी मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी से क्लेम का दावा किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम अस्वीकार कर दिया कि मरीज को पॉलिसी शुरू होने के शुरुआती 30 दिनों के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इसलिए दावा पॉलिसी की शर्तों के अनुरूप नहीं है।
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आयोग ने कंपनी की दलील को माना गलत
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष अभिमन्युसिंह राठौड़, सदस्य नवीनचंद्र मिश्रा और सदस्या जया मिस्त्री की पीठ ने दस्तावेजों की विस्तार से जांच की। जांच में सामने आया कि बीमा पॉलिसी 11 अक्टूबर 2019 को रात 12:00 बजे प्रभावी हुई थी, जबकि मरीज को 10 नवंबर 2019 को दोपहर 12:37 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यानी पॉलिसी प्रभावी होने के बाद 30 दिन, 12 घंटे और 37 मिनट का समय बीत चुका था। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा 30 दिन की शर्त का हवाला देकर क्लेम खारिज करना तथ्यात्मक रूप से गलत पाया गया।
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ब्याज, हर्जाना और अदालती खर्च देने के आदेश
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह परिवादी को 55,539 रुपये की क्लेम राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ भुगतान करे। इसके अलावा मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 15,000 रुपये तथा अदालती खर्च के रूप में 3,000 रुपये का भुगतान भी निर्धारित समय सीमा के भीतर करने का आदेश दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी की ओर से दावा खारिज करना सेवा में कमी (Deficiency in Service) की श्रेणी में आता है।