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राजस्थान में अवैध प्रवासियों पर बड़ा एक्शन: 1000 से अधिक बांग्लादेशी हुए डिपोर्ट; रोहिंग्या ने बढ़ाई चिंता
Sat, 18 Jul 2026 04:15 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Sat, 18 Jul 2026 04:15 PM IST
सार
राजस्थान में अवैध बांग्लादेशियों पर शिकंजा कस गया है। ढाई साल में 1064 पकड़े गए और 1067 को डिपोर्ट किया गया। गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद कार्रवाई तेज हुई।
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अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर सख्ती
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पूरे राज्य में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ विशेष तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जयपुर, अजमेर, दौसा, नागौर और सीकर जैसे शहरों में कई संदिग्धों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया है और वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
गृह विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार 15 दिसंबर 2023 से 30 जून 2026 तक प्रदेश में 1064 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जबकि इस अवधि में 1067 बांग्लादेशियों को वापस भेजा (डिपोर्टेशन) गया। इसमें पकड़े जाने वालों से ज्यादा आंकड़े भेजे जाने वालों के इसलिए हैं क्योंकि इनसे पूर्व अवधि में जो पकड़े गए थे उन्हें भी इनके साथ डिपोर्ट करने की कार्रवाई हुई है। वहीं 2019 से दिसंबर 2023 तक राज्य में 117 बांग्लादेशी नागरिक और 521 रोहिंग्या चिन्हित किए जा चुके थे।
कुल छह महीनों (1 जनवरी से 30 जून 2026) में ही 10 नए बांग्लादेशी पकड़े गए और 18 को डिपोर्ट किया गया। वहीं, जुलाई में अजमेर से बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया है। इस महिला ने पूछताछ में बताया है कि वह अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आई थी। फिलहाल पुलिस और सीआईडी की टीम महिला से गहन पूछताछ कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि अजमेर में किन लोगों के संपर्क में थी और क्या उसका किसी संगठित नेटवर्क से संबंध है।
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ये भी पढें- Sri ganganagar News: पुलिस ने घेरा तो पुल से छलांग लगा बैठे पांच बदमाश, मुठभेड़ के बाद हथियार सहित दबोचा
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में रोहिंग्या की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2019 में जहां 230 रोहिंग्या चिन्हित थे, वहीं 2023 तक यह संख्या बढ़कर 593 पहुंच गई। इनमें 312 नए रोहिंग्या शामिल हैं, जबकि 51 बच्चों का जन्म राजस्थान में हुआ।
गृह मंत्रालय के आदेश के बाद कार्रवाई तेज
केंद्र सरकार ने 2 मई 2025 को अवैध विदेशियों की पहचान और निष्कासन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए। इसके बाद राजस्थान सरकार ने 8 और 14 मई 2025 को पुलिस महानिदेशक को निर्देश देकर सभी जिलों में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को चिन्हित कर होल्डिंग सेंटर में रखने तथा विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO) के माध्यम से निष्कासन की कार्रवाई तेज करने को कहा।
कानून क्या कहता है?
नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार अवैध प्रवासी वह विदेशी नागरिक है, जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के भारत में प्रवेश करे या वैध वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रुका रहे। ऐसे मामलों में पहचान, हिरासत, आवाजाही पर प्रतिबंध और निष्कासन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और राज्य पुलिस की होती है।
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गृह विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार 15 दिसंबर 2023 से 30 जून 2026 तक प्रदेश में 1064 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जबकि इस अवधि में 1067 बांग्लादेशियों को वापस भेजा (डिपोर्टेशन) गया। इसमें पकड़े जाने वालों से ज्यादा आंकड़े भेजे जाने वालों के इसलिए हैं क्योंकि इनसे पूर्व अवधि में जो पकड़े गए थे उन्हें भी इनके साथ डिपोर्ट करने की कार्रवाई हुई है। वहीं 2019 से दिसंबर 2023 तक राज्य में 117 बांग्लादेशी नागरिक और 521 रोहिंग्या चिन्हित किए जा चुके थे।
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कुल छह महीनों (1 जनवरी से 30 जून 2026) में ही 10 नए बांग्लादेशी पकड़े गए और 18 को डिपोर्ट किया गया। वहीं, जुलाई में अजमेर से बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया है। इस महिला ने पूछताछ में बताया है कि वह अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आई थी। फिलहाल पुलिस और सीआईडी की टीम महिला से गहन पूछताछ कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि अजमेर में किन लोगों के संपर्क में थी और क्या उसका किसी संगठित नेटवर्क से संबंध है।
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सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में रोहिंग्या की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2019 में जहां 230 रोहिंग्या चिन्हित थे, वहीं 2023 तक यह संख्या बढ़कर 593 पहुंच गई। इनमें 312 नए रोहिंग्या शामिल हैं, जबकि 51 बच्चों का जन्म राजस्थान में हुआ।
गृह मंत्रालय के आदेश के बाद कार्रवाई तेज
केंद्र सरकार ने 2 मई 2025 को अवैध विदेशियों की पहचान और निष्कासन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए। इसके बाद राजस्थान सरकार ने 8 और 14 मई 2025 को पुलिस महानिदेशक को निर्देश देकर सभी जिलों में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को चिन्हित कर होल्डिंग सेंटर में रखने तथा विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO) के माध्यम से निष्कासन की कार्रवाई तेज करने को कहा।
कानून क्या कहता है?
नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार अवैध प्रवासी वह विदेशी नागरिक है, जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज के भारत में प्रवेश करे या वैध वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रुका रहे। ऐसे मामलों में पहचान, हिरासत, आवाजाही पर प्रतिबंध और निष्कासन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और राज्य पुलिस की होती है।