फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Jaipur: Rajasthan High Court Refuses Relief to MBBS Student, Says Sympathy Cannot Override Medical Standards

Jaipur: 14 साल में भी MBBS पास नहीं कर सका छात्र, हाईकोर्ट बोला- सहानुभूति के आधार पर डॉक्टर नहीं बना सकते

Sat, 18 Jul 2026 10:26 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Sat, 18 Jul 2026 10:26 AM IST
सार

14 साल में भी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाने वाले छात्र की विशेष अपील खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि न्यूनतम योग्यता साबित नहीं करने वाले छात्र को सिर्फ सहानुभूति के आधार पर डॉक्टर बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

विज्ञापन
Jaipur: Rajasthan High Court Refuses Relief to MBBS Student, Says Sympathy Cannot Override Medical Standards
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और चिकित्सा शिक्षा के मानकों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल सहानुभूति या आर्थिक नुकसान के आधार पर किसी छात्र को डॉक्टर बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस की डिग्री केवल एक अकादमिक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि मरीजों का उपचार करने का अधिकार देने वाला लाइसेंस है। इसलिए सार्वजनिक हित और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

विज्ञापन


जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने शेख तौरीक की विशेष अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2010 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था लेकिन वर्ष 2024 तक भी अंतिम प्रोफेशनल परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका। इसके बाद उसने शेष विषयों की परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
विज्ञापन


अदालती रिकॉर्ड के अनुसार छात्र ने प्रथम वर्ष से लेकर अंतिम प्रोफेशनल परीक्षा तक कई बार परीक्षाएं दीं लेकिन विभिन्न विषयों में लगातार असफल रहा। वर्ष 2020 तक भी वह मेडिसिन और प्रसूति एवं स्त्री रोग जैसे प्रमुख विषयों में उत्तीर्ण नहीं हो सका। कोर्ट ने कहा कि लगभग 14 वर्षों में भी एमबीबीएस कोर्स पूरा नहीं कर पाना यह दर्शाता है कि पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद वह न्यूनतम शैक्षणिक दक्षता हासिल नहीं कर पाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Banswara News: मानगढ़ धाम में भील प्रदेश को लेकर उठी हुंकार, महासम्मेलन में जुटे हजारों आदिवासी

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वर्ष 2010 में प्रवेश के समय एमबीबीएस कोर्स पूरा करने की कोई अधिकतम समय-सीमा निर्धारित नहीं थी। इसलिए वर्ष 2019 में लागू संशोधित मेडिकल शिक्षा विनियम, जिनमें कोर्स पूरा करने के लिए 10 वर्ष की अधिकतम अवधि तय की गई है, उसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।


खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि छात्र के भविष्य को देखते हुए हाईकोर्ट ने 30 जनवरी 2024 को अंतरिम आदेश पारित कर उसे अंतिम प्रोफेशनल परीक्षा में बैठने का एक अतिरिक्त अवसर दिया था। हालांकि उसका परिणाम सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उसमें भी वह असफल पाया गया।

अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि छात्र ने पढ़ाई पर भारी खर्च किया है या उसे आर्थिक नुकसान होगा, राहत नहीं दी जा सकती। यदि कोई अभ्यर्थी वर्षों तक बार-बार अवसर मिलने के बावजूद न्यूनतम योग्यता साबित नहीं कर पाता, तो सार्वजनिक हित की अनदेखी नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि किसी मरीज को ऐसे छात्र का शैक्षणिक रिकॉर्ड बताया जाए तो उसके मन में उपचार को लेकर स्वाभाविक रूप से आशंका उत्पन्न होगी। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने विशेष अपील खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed