SriGanganagar: प्रकृति की शुद्धता और मानवता के उत्थान की ओर निरंकारी मिशन का एक कदम, स्वच्छता अभियान चलाया
प्रकृति की शुद्धता और मानवता के उत्थान की ओर निरंकारी मिशन का एक और स्वर्णिम कदम देखा गया। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा, पानी प्रकृति का अमूल्य उपहार, जिसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है।
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श्रीगंगानगर जिले में संत निरंकारी मिशन के ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ परियोजना के तहत अभियान चलाया गया। इसमें संत निरंकारी सत्संग भवन, ब्रांच श्रीगंगानगर द्वारा मुख्य वाटर वर्क्स, नजदीक डीएवी स्कूल, श्रीगंगानगर में तीसरे चरण का आयोजन किया गया। इसके साथ-साथ जोन नंबर 17 श्रीगंगानगर में सादुलशहर, श्रीकरणपुर, केसरी सिंहपुर, पदमपुर, नुरपुरा ढाणी, खैरूवाला सहित 21 स्थानों पर इस अभियान का आयोजन करके संत निरंकारी मिशन के समर्पित स्वयंसेवकों द्वारा जल संरक्षण और स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित के पावन आशीर्वाद से 23 फरवरी, 2025 की स्वर्णिम प्रभात एक नवीन जागृति एवं सेवा के दिव्य प्रकाश का संदेश लेकर आई, जिसके अंतर्गत इसका आयोजन विश्वभर में हुआ और उसी के साथ दिल्ली के ग्राउंड नं. 8 में एक विशाल सत्संग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
संत निरंकारी मंडल के सचिव एवं समाज कल्याण प्रभारी जोगिंदर सुखीजा ने बताया कि देशभर में आयोजित हुई ‘अमृत प्रोजेक्ट’ परियोजना के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पूर्ण रूप से पालन किया गया। युवाओं की विशेष भागीदारी इस अभियान का प्रमुख आधार रही। उन्होंने यह भी सूचित किया कि यह मुहिम केवल एक दिन की नहीं, अपितु हर माह विभिन्न घाटों व जल स्त्रोतों की स्वच्छता के लिए निरंतर जारी रहेगी।
संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा, संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वाधान में, पूज्य बाबा हरदेव सिंह जी की अनंत शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए इस पवित्र अभियान का आयोजन किया गया। इस वर्ष भी पूर्व की भांति ही ‘आओ संवारें, यमुना किनारे’ का उद्घोष करते हुए इस प्रयास को और व्यापक स्वरूप दिया गया।
27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 1650 से अधिक स्थानों पर, 10 लाख से भी अधिक सेवाभाव से ओत-प्रोत स्वयंसेवक भक्तों ने एक साथ इस पुनीत अभियान को साकार किया। यह दृश्य केवल प्राकृतिक स्वच्छता तक सीमित न रहकर, अंतर्मन को निर्मल और पवित्र करने की एक आध्यात्मिक यात्रा का सुंदर प्रतीक बन गया।
सतगुरु माता सुदीक्षा ने जल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि पानी अमृत समान है, जिसे प्रकृति ने हमें जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपहार के रूप में प्रदान किया है। इसकी स्वच्छता और संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी स्वाभाविक आदत होनी चाहिए। हम अक्सर अनजाने में अपशिष्ट और गंदगी को जल स्रोतों या अन्य स्थानों पर डालकर प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं, जिससे पर्यावरण को हानि होती है।
इसी चिंतन से प्रेरित होकर, ‘प्रोजेक्ट अमृत’ जैसी सामाजिक पहल की शुरुआत की गई है, जो जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। बाबा हरदेव सिंह के जन्मदिवस को समर्पित इस पुनीत सेवा अभियान में हर संत को जल संरक्षण की दिशा में योगदान देने का अवसर मिला।