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Rajasthan: मालपुरा दंगा मामले में आठ दोषियों को उम्रकैद, 24 साल पहले सांप्रदायिक बवाल में हुई थी छह की मौत

Tue, 03 Dec 2024 04:27 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 03 Dec 2024 04:27 PM IST
सार

राजस्थान में टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में 24 साल पहले हुए सांप्रदायिक बवाल में जयपुर की विशेष अदालत ने आठ लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दंगे में छह लोगों की निर्ममतापूर्ण तरीके से हत्या की गई थी।

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Rajasthan Eight convicts sentenced to life imprisonment in Malpura riot case six people died in communal riots
मालपुरा दंगा मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

टोंक के मालपुरा दंगा मामले में जयपुर की विशेष अदालत ने एक केस में आठ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मालपुरा में साल 2000 में हिंदू-मुस्लिम तनाव के बाद दंगे भड़क गए थे। इसमें छह लोगों की हत्या हुई थी, जिनमें दो नाबालिग भी थे। सोमवार को मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा, हत्यारों ने धारदार हथियारों से निर्ममतापूर्वक इस घटना को अंजाम दिया है। ऐसे में इनके प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती। 

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वहीं, दो अन्य मामलों में जल्द फैसला देने की संभावना पीड़ित पक्ष के वकील पुरुषोत्तम बनवाड़ा ने बताया कि साल 2000 में मालपुरा में दो संप्रदायों के बीच दंगा हुआ था। इसमें एक पक्ष से हरिराम और कैलाश माली की मौत हो गई थी। दूसरे पक्ष से भी चार लोगों की मौत हुई थी। दोनों पक्षों की ओर से मामले दर्ज कराए गए थे। अदालत ने अभी दो मामले में फैसला सुनाया है। शेष दो मामलों में भी जल्द फैसला आने की संभावना है। शेष दोनों मामलों के आठ आरोपी 2016 में ही हाईकोर्ट से बरी हो चुके हैं। शेष 17 आरोपियों को लेकर फैसला आएगा। 
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संदेह का लाभ पाकर पांच बरी
हरीराम की मौत के मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए इस्लाम, मोहम्मद इशाक, अब्दुल रज्जाक, इरशाद, मोहम्मद जफर, साजिद अली, बिलाल अहमद और मोहम्मद हबीब को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, कैलाश माली के मामले में पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। पहले केस में पत्नी के सामने कर दी थी पति की हत्या। बचाव पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि हरीराम की मौत के मामले में उसकी विधवा धन्नी देवी ने 10 जुलाई 2000 को मालपुरा (टोंक) थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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इसमें कहा गया कि वह अपने पति हरिराम के साथ खेत पर जा रही थी। इस दौरान आरोपियों ने धारदार हथियार से उसके पति पर हमला बोल दिया और उसके शरीर पर कई जगह वार किए। इसके चलते उसकी मौत हो गई। दूसरे केस में संदेह का लाभ देते हुए बरी किया कैलाश माली की हत्या के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कैलाश के बेटे ने घटना को लेकर एफआईआर दर्ज कराई थी। कोर्ट में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि अभियोजन के पास घटना को लेकर कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं है। एफआईआर दर्ज कराने वाले कैलाश के बेटे का कहना है कि उसे घटना के बारे में गांव के कुछ लोगों ने बताया था। जब तक वह मौके पर पहुंचा घटना हो चुकी थी। उसने किसी भी आरोपी को पिता को मारते हुए नहीं देखा था।

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