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SDM थप्पड़कांड: नरेश मीणा की जमानत पर संकट, एससी-एसटी कोर्ट सात मार्च को सुनाएगी फैसला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक Published by: टोंक ब्यूरो Updated Sat, 21 Feb 2026 10:31 PM IST
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सार

Tonk News: नरेश मीणा की जमानत निरस्त करने की याचिका पर टोंक की एससी-एसटी कोर्ट में सुनवाई हुई। बचाव और अभियोजन पक्ष ने दलीलें दीं। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 7 मार्च 2026 को निर्णय सुनाने की तारीख तय की है।

SDM Slap Case: Naresh Meena's Bail in Danger, SC-ST Court to Deliver Decision on March 7
नरेश मीणा की जमानत पर संकट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

टोंक जिले के समरावता गांव में विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में जेल जा चुके नरेश मीणा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। उनकी जमानत निरस्त करने के प्रार्थना पत्र पर आज टोंक की एससी-एसटी कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों ने अदालत में अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 7 मार्च 2026 को निर्णय सुनाने की तारीख तय की है। इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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उपचुनाव के दौरान थप्पड़ कांड से जुड़ा मामला
देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने के आरोप में भगत सिंह सेना के सुप्रीमो नरेश मीणा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। करीब आठ महीने जेल में बिताने के बाद उन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिली थी।
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पिपलोदी प्रकरण के बाद बढ़ी कानूनी चुनौती
झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में स्कूल हादसे के बाद हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान नरेश मीणा की गिरफ्तारी को नगरफोर्ट थाना पुलिस ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन मानते हुए टोंक की एससी-एसटी कोर्ट में जमानत निरस्त करने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसी आवेदन पर आज सुनवाई हुई।

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बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें
सुनवाई के दौरान नरेश मीणा की ओर से अधिवक्ता फतेहराम मीणा ने पैरवी की। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष ने केवल एफआईआर के आधार पर प्रार्थना पत्र दाखिल किया है और अभी तक झालावाड़ मामले की चालान प्रति कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई है। उनके अनुसार जब तक मामले में प्रसंज्ञान नहीं लिया गया, तब तक जमानत निरस्त नहीं की जा सकती।
 
वहीं, विशिष्ट लोक अभियोजक रामावतार सोनी ने अदालत में कहा कि नरेश मीणा ने उच्च न्यायालय से मिली सशर्त जमानत का स्पष्ट उल्लंघन किया है, इसलिए उनकी जमानत खारिज की जानी चाहिए।
 
7 मार्च को आएगा निर्णय
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद एससी-एसटी कोर्ट की विशिष्ट न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने फैसला सुरक्षित रख लिया और 7 मार्च 2026 की तारीख मुकर्रर की। अब सभी की निगाहें अदालत के निर्णय पर टिकी हैं, जो आगे की कानूनी स्थिति तय करेगा।


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