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Tonk : डॉक्टरों की लेटलतीफी ने ली मासूम की जान, पेटदर्द की शिकायत पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे
Tue, 20 Aug 2024 04:19 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 20 Aug 2024 04:19 PM IST
सार
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पेटदर्द की शिकायत लेकर पहुंचे 13 साल के बच्चे की तरफ अस्पताल की लापरवाही ने मासूम की जान ले ली। मृतक के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल स्टाफ की लेट-लतीफी ने बच्चे की जान ले ली।
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राजस्थान
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
टोंक के सबसे बड़े सरकारी जनाना अस्पताल में डॉक्टरों की 50 मिनट की लापरवाही 13 साल के एक मासूम बच्चे की जान पर भारी पड़ गई, जिसके चलते मासूम आयुष की मौत हो गई। दरअसल टोंक के नला गांव निवासी आयुष को पेट दर्द की शिकायत के बाद निवाई अस्पताल से टोंक इलाज के लिए रैफर किया गया था लेकिन टोंक के जनाना अस्पताल के मेडिकल स्टाफ की लेटलतीफी और लापरवाही ने मासूम को मौत की नींद सुला दिया।
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मृतक आयुष के परिजनों का आरोप है कि सुबह जब आयुष को लेकर निवाई से जनाना अस्पताल लेकर पहुंचे तो आयुष की सार-संभाल करने और इलाज के लिए डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ से गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली, जिससे बच्चे की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और मृतक के शव को सआदत अस्पताल मोर्चरी में रखवाया, जहां शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। मामले को लेकर परिजनों ने लापरवाह चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए पुलिस को लिखित में शिकायत दी है।
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वहीं मामले को लेकर टोंक के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अशोक कुमार यादव का भी कहना है कि आयुष के इलाज में शिशु वार्ड के मेडिकल स्टाफ कर्मचारी कमलेश की लापरवाही सामने आई है। यादव ने बताया कि बच्चे की तबियत बिगड़ने के बाद भी मेडिकल स्टाफ द्वारा शिशु विशेषज्ञ डॉक्टर को कॉल नहीं किया गया। यादव का दावा है कि मामले की फेक्चुअल रिपोर्ट निदेशालय भेजी जाएगी और लापरवाही के खिलाफ एक्शन भी लिया जाएगा।
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