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अच्छी खबर: राजस्थान में जनजातीय पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, 306 करोड़ रुपये से संवरेंगे ऐतिहासिक स्थल

Tue, 11 Aug 2026 05:21 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 11 Aug 2026 05:21 PM IST
सार

राजस्थान सरकार जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 306 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम कर रही है। ट्राइबल टूरिज्म सर्किट और महाराणा प्रताप सर्किट विकसित किए जाएंगे। इससे ऐतिहासिक स्थलों का विकास, आदिवासी संस्कृति का संरक्षण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

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Tribal tourism in Rajasthan to get a new dimension; historical sites to be revamped at a cost of ₹306 crore.
सांकेतिक - फोटो : Freepik/AI

विस्तार

राजस्थान सरकार जनजातीय अंचलों को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू की गई 'टूरिज्म इन ट्राइब्स' पहल के तहत राज्य की प्राकृतिक संपदा, लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और ऐतिहासिक-धार्मिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में 306 करोड़ रुपये से अधिक की पर्यटन विकास परियोजनाओं पर कार्य जारी है।

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ट्राइबल टूरिज्म सर्किट पर 100 करोड़ रुपये खर्च
राज्य सरकार ट्राइबल टूरिज्म सर्किट के निर्माण पर 100 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके तहत डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम के विकास के लिए 49.40 करोड़ रुपये और बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम के लिए 13.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस सर्किट में चित्तौड़गढ़ का मातृकुंडिया, प्रतापगढ़ का सीतामाता अभयारण्य और गौतमेश्वर महादेव मंदिर भी शामिल हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा का प्रसिद्ध त्रिपुरा सुंदरी मंदिर और उदयपुर का ऐतिहासिक ऋषभदेव मंदिर भी इस पर्यटन परिपथ का हिस्सा बनाए गए हैं।
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महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट पर 206 करोड़ रुपये
राज्य सरकार 206 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट विकसित कर रही है। इसके तहत चावंड, हल्दीघाटी, गोगुन्दा, कुंभलगढ़, दिवेर और उदयपुर सहित प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का विकास और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। साथ ही डूंगरपुर में क्षेत्रीय कला को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक शिल्पग्राम तथा चित्तौड़गढ़ में पर्यटकों के लिए विशेष हेरिटेज वॉक-वे का निर्माण भी कराया जाएगा।

बनफूल योजना से आदिवासी कला को मिलेगा नया बाजार
जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए 'सौंध माटी आदि धरोहर प्रलेखन योजना' संचालित की जा रही है। इसके तहत पारंपरिक वाद्य यंत्रों, पाककला, चित्रकारी, भित्तिचित्र, काष्ठ एवं प्रस्तर कला, लोकनृत्य और लोकगायन का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। वहीं 'बनफूल जनजाति डिजाइन स्टूडियो' और विशेष ब्रांडिंग गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाना है, जिससे स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, स्वयं सहायता समूहों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सके।

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