‘दूसरी कक्षा के छात्र ने इशारों में कहा चुप’: LKG की छात्रा का प्राइवेट पार्ट नोंचा, सात साल के बालक पर आरोप
Udaipur News: उदयपुर के निजी स्कूल में एलकेजी की बच्ची के साथ दूसरी कक्षा के छात्र पर निजी अंग नोंचने का आरोप लगा है। इसे लेकर स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का इल्जाम लगा है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विस्तार
उदयपुर के एक निजी स्कूल में चार साल की एलकेजी छात्रा के साथ हुई एक चौंकाने वाली घटना ने स्थानीय समुदाय को हिलाकर रख दिया है। सात अक्तूबर को हुई इस घटना में दूसरी कक्षा के सात साल के छात्र पर बच्ची के निजी अंग को नोंचने का आरोप लगा है। इस मामले ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।
घटना का खुलासा और परिवार की प्रतिक्रिया
घटना का पता तब चला जब सात अक्तूबर की रात बच्ची को असहनीय दर्द हुआ और वह रोने लगी। परिजनों ने जब कारण पूछा, तो बच्ची ने बताया कि स्कूल में एक लड़के ने उसके साथ गलत व्यवहार किया। परिजनों के अनुसार, उस दिन स्कूल से लौटने के बाद बच्ची असामान्य रूप से सुस्त थी और उसने रात का खाना भी नहीं खाया। रात करीब दो बजे दर्द बढ़ने पर उसने अपनी मां को घटना के बारे में बताया। परिजनों ने तुरंत अगले दिन स्कूल प्रबंधन से संपर्क करने का फैसला किया।
स्कूल प्रबंधन ने क्या कहा?
अगले दिन परिजन बच्ची को लेकर स्कूल पहुंचे और शिक्षकों को घटना की जानकारी दी। हालांकि शिक्षकों ने बताया कि उस दिन बच्चे कम आए हैं और परिजनों को अगले दिन फिर से आने को कहा। परिजनों ने अगले दिन दोबारा स्कूल का रुख किया और बच्ची से कक्षा में बच्चों की पहचान कराने की कोशिश की। एलकेजी कक्षा में बच्ची ने किसी को नहीं पहचाना। इसके बाद जब उसे दूसरी कक्षा में ले जाया गया, तो उसने पीछे बैठे एक बच्चे की ओर इशारा किया। परिजनों का दावा है कि उस बच्चे ने इशारों में बच्ची को चुप रहने का संकेत दिया। इसके अलावा जब बच्ची को स्कूल के बाथरूम में ले जाया गया, तो वह डर से सहम गई और अंदर जाने से मना कर दिया। परिजनों का कहना है कि यह व्यवहार बच्ची के साथ हुई घटना के आघात को दर्शाता है।
स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दो दिन तक स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों से बात करने के बावजूद कोई ठोस सहयोग नहीं मिला। प्रबंधन ने आरोपी छात्र का नाम और पता साझा करने से भी इनकार कर दिया। परिजनों का यह भी आरोप है कि स्कूल ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उनकी शिकायत को टालने की कोशिश की। इस देरी और असहयोग के चलते परिजनों ने चार दिन बाद, 11 अक्तूबर को सवीना थाने में शिकायत दर्ज कराई।
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पुलिस कार्रवाई और जांच
सवीना थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। मामले की जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) माधुरी वर्मा को सौंपी गई है। पुलिस ने बच्ची के बयान और परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सवाल
यह घटना न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर, चार साल की बच्ची को इस तरह के आघात से गुजरना पड़ा। वहीं दूसरी ओर, सात साल का एक बच्चा इस तरह के व्यवहार में कैसे शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के व्यवहार पर परिवार, स्कूल और समाज का प्रभाव पड़ता है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों को यौन शिक्षा और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। साथ ही, स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही और बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियमों की मांग भी उठ रही है।
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