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Shimla News: उद्घाटन के बाद भी आईजीएमसी में शुरू नहीं हुए पेट सीटी स्कैन
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अब सोमवार से स्कैन शुरू करने का दावा कर रह अस्पताल प्रबंधन, स्कैन के लिए 70 से अधिक की है वेटिंग
मरीज के स्कैन के लिए जरूरी है एफडीजी मेडिसिन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के रेडियोथेरेपी विभाग में बने न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में लगी पेट सीटी स्कैन मशीन से अभी तक एक भी स्कैन नहीं हो पाया है। दो अप्रैल को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मशीन का शुभारंभ किया था। उद्घाटन के बावजूद मरीजों को अभी तक कोई राहत नहीं मिली है।
अस्पताल प्रबंधन अब सोमवार से इस नई मशीन से स्कैन शुरू करने की तैयारी चल रही है। आईजीएमसी में स्कैन करवाने के लिए 70 से अधिक मरीजों की वेटिंग लिस्ट है। इनमें से ही दिन के हिसाब से स्लॉट तय कर स्कैन शुरू करने की तैयारी रेडियोथेरेपी का न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग कर रहा है। इस तैयारी के पूरा होने के बाद तय किए शेड्यूल के अनुसार वेटिंग लिस्ट में शामिल मरीजों की स्थिति, उनकी रिपोर्ट को ध्यान में रखकर स्कैन शुरू किए जाने हैं। स्कैन में उपयोग होने वाली एफ-18 एफडीजी रेडियोधर्मी ट्रेसर दवा का आर्डर भी मरीजों के स्लॉट के अनुसार स्कैन से एक दिन पहले किया जाएगा। इस दवा को मान्यता प्राप्त अधिकृत कंपनी ही स्कैन वाले दिन उपलब्ध करवाती है।
कल शुरू होंगे मरीजों के स्कैन : डॉ. रॉव
आईजीएमसी में पैट सीटी स्कैन मशीन का शुभारंभ हो चुका है, लेकिन स्कैन शुरू करने के लिए कई तरह की तैयारियां पहले की जानी आवश्यक हैं। स्कैन के लिए मरीजों की उपलब्ध 70 से अधिक की वेटिंग लिस्ट से एक दिन में चार से पांच मरीजों का स्लॉट रेडियोथेरेपी का न्यूक्लियर मेडिसिन विंग तैयार करता है। इसके अनुसार स्कैन की तैयारी की जाती है। दवाई भी स्कैन के अनुसार ही ऑर्डर की जाती है। यह दवाई उपयोग न होने पर उड़ जाती है। अब सोमवार से टेस्ट शुरू करने की तैयारी है।
यह काम करती है दवा
पेट सीटी स्कैन में एफ-18 एफडीजी (फ्लोरोडिऑक्सिग्लूकोज) दवा को स्कैन से पूर्व मरीज की नसों के माध्यम से चढ़ाया जाता है। यह दवाई मानव शरीर में सक्रिय ट्यूमर कोशिकाओं में जमा हो जाती है, जिससे पैट स्कैन मशीन उन क्षेत्रों को हॉटस्पॉट के रूप में दिखाती है। यह कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने में मदद करता है। यह कैंसर कोशिकाओं में उच्च चयापचय (मेटाबोलिक ) गतिविधि को दर्शाता है, जिससे ट्यूमर की स्थिति का सही पता चलता है। आईजीएमसी को यह दवाई चंडीगढ़ से स्कैन वाले दिन उपलब्ध करवाए जाने की व्यवस्था की जा रही है।
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शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के रेडियोथेरेपी विभाग में बने न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में लगी पेट सीटी स्कैन मशीन से अभी तक एक भी स्कैन नहीं हो पाया है। दो अप्रैल को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मशीन का शुभारंभ किया था। उद्घाटन के बावजूद मरीजों को अभी तक कोई राहत नहीं मिली है।
अस्पताल प्रबंधन अब सोमवार से इस नई मशीन से स्कैन शुरू करने की तैयारी चल रही है। आईजीएमसी में स्कैन करवाने के लिए 70 से अधिक मरीजों की वेटिंग लिस्ट है। इनमें से ही दिन के हिसाब से स्लॉट तय कर स्कैन शुरू करने की तैयारी रेडियोथेरेपी का न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग कर रहा है। इस तैयारी के पूरा होने के बाद तय किए शेड्यूल के अनुसार वेटिंग लिस्ट में शामिल मरीजों की स्थिति, उनकी रिपोर्ट को ध्यान में रखकर स्कैन शुरू किए जाने हैं। स्कैन में उपयोग होने वाली एफ-18 एफडीजी रेडियोधर्मी ट्रेसर दवा का आर्डर भी मरीजों के स्लॉट के अनुसार स्कैन से एक दिन पहले किया जाएगा। इस दवा को मान्यता प्राप्त अधिकृत कंपनी ही स्कैन वाले दिन उपलब्ध करवाती है।
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कल शुरू होंगे मरीजों के स्कैन : डॉ. रॉव
आईजीएमसी में पैट सीटी स्कैन मशीन का शुभारंभ हो चुका है, लेकिन स्कैन शुरू करने के लिए कई तरह की तैयारियां पहले की जानी आवश्यक हैं। स्कैन के लिए मरीजों की उपलब्ध 70 से अधिक की वेटिंग लिस्ट से एक दिन में चार से पांच मरीजों का स्लॉट रेडियोथेरेपी का न्यूक्लियर मेडिसिन विंग तैयार करता है। इसके अनुसार स्कैन की तैयारी की जाती है। दवाई भी स्कैन के अनुसार ही ऑर्डर की जाती है। यह दवाई उपयोग न होने पर उड़ जाती है। अब सोमवार से टेस्ट शुरू करने की तैयारी है।
यह काम करती है दवा
पेट सीटी स्कैन में एफ-18 एफडीजी (फ्लोरोडिऑक्सिग्लूकोज) दवा को स्कैन से पूर्व मरीज की नसों के माध्यम से चढ़ाया जाता है। यह दवाई मानव शरीर में सक्रिय ट्यूमर कोशिकाओं में जमा हो जाती है, जिससे पैट स्कैन मशीन उन क्षेत्रों को हॉटस्पॉट के रूप में दिखाती है। यह कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने में मदद करता है। यह कैंसर कोशिकाओं में उच्च चयापचय (मेटाबोलिक ) गतिविधि को दर्शाता है, जिससे ट्यूमर की स्थिति का सही पता चलता है। आईजीएमसी को यह दवाई चंडीगढ़ से स्कैन वाले दिन उपलब्ध करवाए जाने की व्यवस्था की जा रही है।