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Himachal: तय समय में निर्माण कार्य शुरू नहीं करने पर 15 जलविद्युत परियोजनाओं का आवंटन रद्द

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 22 Jun 2026 06:51 PM IST
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सार

सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए 15 ऐसी परियोजनाओं का आवंटन रद्द कर दिया है, जिनके निर्माणकर्ताओं ने निर्धारित समय में निर्माण कार्य शुरू करने में रुचि नहीं दिखाई।

Allocation of 15 hydroelectric projects cancelled for failure to start construction within the stipulated time
जलविद्युत परियोजना(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए 15 ऐसी परियोजनाओं का आवंटन रद्द कर दिया है, जिनके निर्माणकर्ताओं ने निर्धारित समय में निर्माण कार्य शुरू करने में रुचि नहीं दिखाई। सरकार अब इन परियोजनाओं को जल्द धरातल पर उतारने के लिए नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। सरकार की समीक्षा में सामने आया कि पहले आवंटित 15 जलविद्युत परियोजनाओं के डेवलपर्स ने निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। कई परियोजनाएं वर्षों तक कागजों में ही अटकी रहीं। ऐसे में सरकार ने इनका आवंटन रद्द करने का निर्णय लिया।

3336 करोड़ की 19 जलविद्युत परियोजनाएं

राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में वर्ष 2026 के दौरान 3336 करोड़ रुपये की लागत वाली 278 मेगावाट क्षमता की 19 जलविद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन परियोजनाओं के शुरू होने से प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य की आय में भी वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने ऊर्जा विभाग की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल की विशाल जलविद्युत क्षमता के दोहन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि यही क्षेत्र भविष्य में राज्य की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। जिन परियोजनाओं के लिए समझौते किए गए हैं, उनमें सोयल डाशल, खौली-दो, ग्रामांग, उमली, भरमौर चरण-एक, भरमौर चरण-दो, हरसर चरण-दो, हरसर चरण-तीन, टुंडह चरण-दो, जंगलिक, रूपिन चरण-दो, दुनाली-एक एवं दो, जरी, तोरल कुंडली, टुंडन, कोट डोगरी, अपर कुर्मी, कलाल खोल और मेलन परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी की कुल स्थापित क्षमता 278 मेगावाट है।

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ऊर्जा नीति में संशोधन से निवेश को बढ़ावा: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इसके तहत 25 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं पर रॉयल्टी की दर को 40 वर्षों के लिए एक समान 12 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे निजी निवेश बढ़ेगा और छोटी तथा मध्यम जलविद्युत परियोजनाओं के विकास में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि 150 मेगावाट क्षमता वाली टिडोंग चरण-एक जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा प्रदेश सरकार अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रही है। इसी कड़ी में जियोथर्मल ऊर्जा की संभावनाओं के अन्वेषण और विकास के लिए जियो ट्रॉपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

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